फौज़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* ऐे सैनिक,फौज़ी,जवान,है तेरा नितअभिनंदन।अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन॥ गर्मी,जाड़े,बारिश में भी,तू सच्चा सेनानी,अपनी माटी की रक्षा को,तेरी अमर जवानी।तेरी देशभक्ति लखकर के,माथे तेरे चंदन,अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन…॥ आँधी-तूफाँ खाते हैं भय,हरदम माथ झुकाते,रिपु तो तुझको देख सिहरता,घुसपैठी थर्राते।सीमाओं का प्रहरी तू तो,वीर शिवा का नंदन,अमन-चैन का तू … Read more

शब्द का सौंदर्य

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** शब्द के सौंदर्य को जग में सजाकर ही रहूँगा।छंद की कारीगरी को आजमा कर ही रहूँगा॥ मुक्त कविता के समय में गा रहा हूँ शब्द लय में,मुक्त तो ग्रह भी नहीं हैं व्योम गंगा के निलय में।ज्ञान पिंगल का जमाने को बताकर ही रहूँगा,छंद सौंदर्य को जग में सजाकर ही रहूंगा…॥ … Read more

अन्तिम अनुसंधान नहीं है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ कोई अनुसंधान जगत का,अन्तिम अनुसंधान नहीं है। अनुसंधान नहीं है अन्तिम,तो है बस जीवन ही जीवनजो पा लिया उसी को पाना,बनता विषय खोज का नूतन।आदि अंत हो जिसका कोई,स्वयं यहां विग्यान नहीं है॥ मिला नहीं है कुछ भी हमको,मिलना ही मिलना है केवलमिलना ही तो वह अभाव है,जो मिल कर भी करता है … Read more

मातृ वंदना

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है।जन्म धरा है इस माटी में,जीव जगत की शान है॥ शुभ किसान जो अन्न उपजाते,वंदन उनको कीजिए,अमर शहीदों की गाथा को,मस्तक पर नित लीजिए।लहू वतन पर यहाँ दिया है,करते शुभ गुणगान है,मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है…॥ मातृभूमि को शीष नवाके,किया ब्रिटिश … Read more

अँधियार हटाता चल तू

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** हर अँधियार हटाता चल तू।दीपक एक जलाता चल तू॥ सूरज बनकर सदा चमकना,खुशबू बनकर सदा महकना।वातावरण बनाता चल तू,हर अँधियार हटाता चल तू…॥ दुनिया का है चलन निराला,नहीं यहाँ खुश होने वाला।सबको ये समझाता चल तू,हर अँधियार हटाता चल तू…॥ लोभ मोह में फँसे हुए सब,गले-गले तक धँसे हुए सब।सारे फंद … Read more

कौन बचाये!

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** अर्थी लेटा पूत धरा का,बोलो उसको कौन बचाये!स्वागत करते घने अँधेरे,छूट गयी पीछे रोशनियाँ!कर्जे से पसरा सन्नाटा,रोज डराता ब्याजू बनिया!आँखों के आगे छाये हैं,आँधी बरसातों के साये!बोलो उसको कौन बचाये…॥ गुर्राते रोजाना उस पर,जन्तु सींग नाखूनों वाले!हाथों की रेखा को खायें,काले काले खूनी छाले!घूम रही जंगली आंधियाँ,कैसे उनसे फसल रखाये!बोलो उसको … Read more

माँ दे स्नेह समान

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* ईश्वर का अवतार सार माँ,जीवन का आधार।निर्मल ममता नित्य बाँटती,देती निश्छल प्यार॥ नित्य करे परिवार सुरक्षा,अनुपम सारे काम,भाव धरे हर क्षण सेवा का,माँ ही चारों धाम।पालन का नित्य श्रेय उठाती,इससे ही उद्धार,ईश्वर का अवतार सार माँ,जीवन का आधार…॥ जीव धरे नौ माह कोख पर,मिले जन्म से नाम,दुग्ध धार से तृप्त करे … Read more

सच पूछो तनहाई है

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** दिल-दिमाग में जबसे दौलत,कूट-कूट कर छायी है।भीड़ भले ही आसपास है,सच पूछो तनहाई है॥ प्रतिस्पर्धा ये रेगिस्तानी,दौलत की मृगमरीचिका।तपते रिश्ते सूख रहे हैं,पता नहीं है पानी का॥प्रतिस्पर्धा को छोड़ें,बदलें,पर करे कौन अगुवाई है।भीड़ भले… ठाठ-बाट के साधन इतने,आकर्षित बाजार किये।‘सब-कुछ’ से झट घर भर लेवें,जागी आँखें स्वप्न लिये॥अहं भरा दीवानापन ये,इसकी ना … Read more

मोहित स्वयं है विराग

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ जागा री सखि अनुराग।जीवन की नदिया सींचे बह-बह के,यौवन की बगिया सावन-सी लहके।सपनों की कलियों के चिटके वदन से-फूटा सुनहला पराग। अँखियों की कोर आज झांके मन पपिया,ढूंढे क्षितिजवा के छोर रंग रसिया।सुख की अँधियारी दरारों के भीतर,उजला प्रभाती चिराग। खुशियों के मोर नचे मानस कगारे,आशा के छोड़ रही पावस फव्वारे।साँसों की झोंकों … Read more

मीरा थी बस श्याम दिवानी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* गीतों में मीरा का गायन,वंदन-अभिनंदन है।मीरा थी बस श्याम-दिवानी,जिसका अभिवंदन है॥ धारण कर बैरागी चोला,मंदिर किया बसेराबनकर के बैरागिन जिसने,पाया धवल सबेरा।लगा हुआजिसके माथे पर,अहसासों का चंदन है,मीरा थी बस श्याम-दिवानी,जिसका अभिवंदन है॥ बना हलाहल अमिय निमिष में,श्याम-राग रंग लायापहन गेरुआ वसन हर्ष से,जिसने भाव दिखाया।उस मीरा का नाम प्रेम,जो … Read more