धरती

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (विशेष चिन्ह ‘…..’ से प्रदर्शित शब्द धरती के पर्यायवाची हैं।) धारण करती है सदा,जल थल का संसार। जननी जैसे पालती,धरती जीवन धारll भूमि उर्वरा देश की,उपजे वीर सपूत। भारत माँ सम्मान हित,हो कुर्बान अकूतll पृथ्वी,पर्यावरण की,रक्षा कर इन्सान। बिगड़ेगा यदि संतुलन,जीवन खतरे जानll धरा हमारी मातु सम,हम है इसके लाल। रीत … Read more

श्रीकृष्ण चालीसा

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* दोहा- गुरु चरणों में है नमन,वंदन श्री भगवान। शारद माँ रखना कृपा,करूँ कृष्ण गुणगान॥ चौपाई- कृष्ण अष्टमी भादौ मासे। प्राकृत जीव वन्य मनु हासे॥ जन्मत मिटे मात पितु बंधन। प्रकटे निशा देवकी नंदन॥ लिए छबरिया में शिशु सिर धर। चले निहंग बदन पद पथ पर॥ मेह रात्रि जल यमुना बाढ़ी। पितु … Read more

भज रे मन श्रीकृष्ण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** नारायण कारा जनम,लिया कंस संहार। असुर कर्म आतंक से,मुक्त किया संसार॥ नारायण अनुराग मन,पूत देवकी गेह। भाद्र मास तिथि अष्टमी,वासुदेव नर देह॥ कृष्ण अमावश कालिमा,जात कृष्ण अभिराम। कालिन्दी दे सुगम पथ,नंदलाल सुखधाम॥ लीलाधर षोडश कला,वासुदेव रच रास। राधा संग अठखेलियाँ,कर नटवर उल्लास॥ पीताम्बर घन श्याम तनु ,मोरमुकुट नित … Read more

वसुधा को आह

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** ऐ सावन क्या कर दिया, ऐसा तूने राड़। बहा रही है जिन्दगी, भू पर चढ़ती बाढ़॥ सावन नित देने लगा, वसुधा को यूँ आह। पानी,पानी हो रहा, नहीं नीर की थाह॥ नीरद अब विनती सुनो, मंद करो कुछ चाल। मनुज कष्ट हैं सह रहे, वसुधा हुई निढाल॥ नीरद तुमने भर … Read more

कृष्ण जन्म

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** कृष्ण जन्माष्टमी स्पर्धा विशेष………. द्वापर युग का अंत था,वर्षों पाँच हजार। मथुरा का राजा भयो,उग्रसेन सरकारll बड़ा पुत्र था कंस जो,महाबली महाराज। चाचा देवक जी कहे,कर आओ कुछ काजll छोटी पुत्री देवकी,छोड़ चले ससुराल। ध्वनि सुनी जो मार्ग में,कंस हुआ बेहालll मारेगा तुझे आठवाँ,पुत्र देवकी लाल। जन्म भूमि … Read more

ऊपर से रब देखता

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** आज़ादी का अपहरण,करे जहाँ सरकार। तर्क बगावत का वहाँ,पाता है आधार॥ ज़र के भूखे भेड़िए,चन्द ज़मीर फरोश। पै दर पै दिखला रहे,फिर से अपना जोश॥ अगर चाहिए ज्ञान तो,सुख का कर दे त्याग। विद्या मिलती है उसे,जिसके दिल में आग॥ इधर-उधर की बात कर,मचा रहे हैं शोर। … Read more

दिखी घाटी में मुस्कान

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** सालों,सालों में दिखी, घाटी में मुस्कान। पाथर भी गाने लगे, आज नेह के गान॥ गीत नेह के भर गये, ऊँचा माँ का भाल। हरियाली घाटी हुई, जो थी खूं से लाल॥ एक हमारा ध्वज हुआ, उपजा एक विधान। जग में उजली हो गई, भारत की पहिचान॥ परिचय-डॉ.विद्यासागर कापड़ी का सहित्यिक … Read more

मन की शक्ति

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** मन के हारे हार है,मन के जीते जीत। मन में दृढ़ संकल्प हो,बने वही फिर मीत॥ मन तो एक तरंग है,बहता है दिन-रात। रुके नहीं रोके कभी,बनती कैसे बात॥ पंछी जैसी चाल है,करे नहीं आराम। मन ऐसा है बावरा,फिरता सुबहो-शाम॥ मन चंचल तन सारथी,चलते हैं दिन रैन। रोके … Read more

सावन सरस सुजान

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* सावन श्रंगारित करे,वसुधा,नारि,पहाड़। सागर सरिता सत्यशिव,नाग विल्व वन ताड़ll दादुर पपिहा मोर पिक,नारी धरा किसान। सबकी चाहत नेह जल,सावन सरस सुजानll नारि केश पिव घन घटा,देख नचे मन,मोर। निशदिन सपन सुहावने,पिवमय चाहत भोरll लता लिपटती पेड़ से,धरा चाहती मेह। जीव जन्तु सब रत रति,विरहा चाहत नेहll कंचन काया कामिनी,प्राकृत मय ईमान। … Read more

कस नकेल अरि आन्तरिक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अरि अवसर की ताक में,यायावर चहुँओर। है भुजंग खल देश के,डँसते बनकर चोरll हालाहल विषकुंभ बन,बने मान जयचंद। वतन विरोधी दे बयां,आतंकी अभिनंदll कुलांगार घूमें वतन,बन द्रोही निर्लज्ज। बुला रहे दुश्मन यहाँ,साजिशें रच सज़्जll दे पनाह नापाक को,कर सत्ता सुखभोग। अरबों को हैं लूटते,राष्ट्र प्रगति बन रोगll छोटे … Read more