चरित्र सबसे बड़ी शक्ति

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** मनुष्य के भीतर अनेक शक्तियाँ निहित है, उन सभी में सबसे सर्वोत्तम स्थान चरित्र का है। मनुष्य जिनसे अपने अन्दर अच्छे आचरण और गुणों का विकास करता है, वह शक्ति चरित्र ही है। इसलिए चरित्र के सम्बन्ध में किसी ने यह उल्लेखनीय बात कही है कि, जिनके चरित्र से शील का … Read more

सरकार की अच्छी पहल, पर कैसे होगी सफल ?

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** महात्मा गांधी का सपना… इस विषय पर कोई विवाद नहीं कि मातृभाषा माध्यम से शिक्षा और राष्ट्रभाषा को लेकर जितना महात्मा गांधी ने कहा, लिखा और सार्थक प्रयास किए उतने शायद किसी और ने नहीं किए, लेकिन यह भी सच है कि उनके नाम और उनके माध्यम से सत्ता पाने वाले … Read more

कश्मीर में लोकतंत्र की वापसी जरुरी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** पंचायती राज दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री ने जम्मू में ऐसी परियोजनाओं का शिलान्यास किया है, जिनसे जम्मू-कश्मीर की जनता को बड़ी राहत मिलेगी। २० हजार करोड़ रु. सरकार लगाएगी और ३८ हजार करोड़ रु. का निवेश पिछले २ साल में हो चुका है। प्रधानमंत्री के साथ दुबई और अबू धाबी के … Read more

चिकित्सकों को दोष देने के बजाय जागरूकता जरूरी

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज के दौर में लगभग सभी लोगों को चाहे वह अमीर हो या गरीब, कृषक हो या मजदूर, नेता हो या व्यापारी, नौकर हो या मालिक, अधिकारी हो या कर्मी, संत हो या फकीर, को चिकित्सकों की जरूरत पड़ती है, और यह भी कड़वा सच है कि लगभग सभी लोग चिकित्सकों को … Read more

हर आंधी में टिकी रहेंगी पुस्तकें

ललित गर्गदिल्ली ************************************** सर्वविदित है कि पुस्तक का महत्व सार्वभौमिक, सार्वकालिक एवं सार्वदैशिक है, किसी भी युग या आंधी में उसका महत्व कम नहीं हो सकता, इंटरनेट जैसी अनेक आंधियाँ आएगी, लेकिन पुस्तक संस्कृति हर आंधी में अपनी उपयोगिता एवं प्रासंगिकता को बनाए रख सकेगी, क्योंकि पुस्तकें पढ़ने का कोई एक लाभ नहीं होता। पुस्तकें … Read more

हिंदी:राष्ट्र भाषा की राह में रोड़ा कौन ?

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)****************************************** भारत के हिन्दी भाषी क्षेत्रों के अधिकांश पढ़े-लिखे लोग भी यही मानते हैं कि भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी है। यह जरूर है कि भारतीयों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा मान लिया है परंतु हमें शायद यह ज्ञान नहीं है कि संवैधानिक तौर पर हिन्दी आज भी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। भले … Read more

हिंदी की ऐतिहासिक संस्थाओं का हश्र

डॉ. हरिसिंह पाल,दिल्ली****************************** आज इस भवन में मनोज वर्मा नर्सरी चल रही है। इसकी दीवारों पर मीरा बाई, सूरदास आदि की काव्य पंक्तियां उत्कीर्ण हैं। इस विशाल भवन के अंदर कबाड़ भरा पड़ा है। पुरानी पुस्तकें, पांडुलिपियां और समाचार पत्र तो कबके कबाड़ियों के हाथों पुनः कागज बनकर नष्ट हो गए होंगे।जबसे इस भवन को … Read more

रोकना होगा स्वयं के लालचीपन को

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** पृथ्वी दिवस विशेष…. बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं ने समस्या तो बढ़ाई है, इससे कोई असहमति नहीं है, लेकिन हमारे लालचीपन को तो भगवान और पृथ्वी भी कभी पूरा नहीं कर सकते हैं। अर्थात हमारी धरती माता किसी भी मानव की जरूरत को तो पूरा कर सकती है, पर उसके लालच को कभी … Read more

भारत-पाकःबेहतर मौका

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो जवाबी खत लिखा है, उसे देखकर लगता है कि दोनों देशों के बीच पिछले ३ साल में जो संवादहीनता पनप गई थी, अब शायद टूट जाए। मोदी ने शाहबाज को बधाई का जो पत्र लिखा था, उसमें यही … Read more

परिस्थितियां

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ***************************** पृथ्वी दिवस विशेष….. पता नहीं, समझ में नहीं आता कि यह अकल्पनीय बात कैसे, कब, दिमाग में आई कि ‘गर धरा ना होती तो…,’ क्या ? कुछ भी नहीं होता। या कुछ होता भी, तो आसमान के नीचे हवा में झूल रहा होता, क्योंकि धरा के नहीं होने से … Read more