मुंशी प्रेमचंद जी की कुर्सी!

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** मुंशी जी-कथा संवेदना के पितामह… मैं निठल्ला-सा मुखपोथी, मेरा मतलब फेसबुक की दीवारों को आवारा आशिक की तरह छेड़ रहा था कि, एक पोस्ट पर नजर पड़ी। पोस्ट मेरे और आप सबके प्रिय हिंदी साहित्य के पितामह मुंशी प्रेमचंद जी को लेकर थी, तो स्वाभाविक था अपनी आवारगी को लगाम … Read more

मुझे भी इतिहास बनाना है…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** ‘इतिहास’, वह विषय जो समय की धूल में अपनी गौरव गाथाएँ समेटे रहता है, पर पता नहीं क्यों, कभी इतिहास ने मुझे इस पर गर्व करने का मौका नहीं दिया। मैं यहाँ अपने निजी इतिहास की बात कर रहा हूँ, आप शायद इसे गलत समझ रहे होंगे। मेरे देश का … Read more

मुझे भी बिकना है…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** आईपीएल मैच का सीजन चल रहा था। क्रिकेट का तो शुरू से मेरा ज्ञान सिर्फ फील्ड से बाहर गई गेंद को दौड़-दौड़ कर लाकर बॉलर को पकड़ाने तक सीमित है।कभी-कभार मेरे साथी किसी पड़ोस वाली आंटी के मकान का शीशा तोड़ने पर मेरा झूठा नाम लगा देते थे। इसी बहाने … Read more

लंगड़ी टांग का खेल

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** बचपन में याद है हम सभी एक खेल खेला करते थे, ‘लंगड़ी टांग’ का खेल। बहुत मजेदार खेल था। खेल में शामिल लोगों को जितना मज़ा नहीं आता था, उतना मज़ा दर्शकों को आता था, जो २ पैरों पर खड़े होकर यह खेल देखते थे। हम गिरते-पड़ते, दौड़ते-भागते, लड़खड़ाते हुए … Read more

अंतिम इच्छा

डॉ. बालकृष्ण महाजननागपुर ( महाराष्ट्र)*********************************** एक वरिष्ठ साहित्यकार काफी दिन से बीमार चल रहे थे। प्रत्येक दिन समाचार-पत्र में काव्य पाठ का समाचार पढ़कर अधिक उत्तेजित हो उठते। काश! मैं भी काव्य-पाठ में शामिल हो जाता तो मेरा नाम भी समाचार-पत्र में छप जाता…।    बीमारी में वह कहीं भी जाने में असमर्थ थे। एक … Read more

यमराज और मैं…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)***************************************************** नींद खुली तो किसी को सामने पाया, मैंने कहा-“पहचाना नहीं ?” उसने कहा-“मैं यमरा-ज हूँ।”यह सुनकर मैं काँप गया और यमराज जी की नीयत भांप गया। मैंने कहा-“बताइए, मैं आपकी क्या सेवा करूं ?” उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया-“जनाब, सेवा तो मैं आपकी करने आया हूँ। इस लोक में आप … Read more

छात्रों का प्रार्थना पत्र

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ एक छात्र नेता ने,तमाम छात्रों को सहेजाऔर प्रधानमंत्री की सेवा में,एक प्रार्थना पत्र भेजा।उसमें लिखा था-महोदय,विनम्र निवेदन है-कि एककेन्द्रीय घुटाला जांच आयोगबनाया जाय,उसमें हमें रोजगार दिलाया जाय।इस योजना का विस्तार,देश भर में हो।हर नगर हर गाँव में,एक कार्यालय होराजनेता घुटालों का विस्तार करें,देशभर में उनका प्रचार करें।नये-नये छात्रों कोरोजगार मिलेगा,इससे जांच कार्यालयों काकार्य … Read more

महँगाई …!

राधा गोयलनई दिल्ली******************************************     अरे कहाँ है महंगाई…?       बंद करो महँगाई का रोना। हमारे जैसे बन जाओ ना।       देखो ना हमारे मुख्यमंत्री ने घोषणा करी थी ‘जहाँ झुग्गी,वहीं मकान।’ हमारे साथियों ने झुग्गियाँ बनाई हुई थीं। हमारे पास चिट्ठी भेजी। “यहाँ आ जाओ। इस देस मा सरण बड़ी आसानी से … Read more

चलनी की खोज

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** करवा चौथ विशेष… करवाचौथ के दिन पत्नी सज-धज के पति का इंतजार कर रही कि, शाम को घर आएंगे तो छत पर जाकर चलनी में चाँद-पति का चेहरा देखूँगी। पत्नी ने गेहूँ की कोठी मे से धीरे से चलनी निकाल कर छत पर रख दी थी। चूँकि, गाँव में पर्दा प्रथा की … Read more

आईए! कुछ मिलकर सोचते हैं!

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* राजनीति की किताब उल्टी पढ़ें या सीधी, अक्षर सारे एक से दिखते हैं। दाएँ से पढ़ें या बाएँ से, शब्द वही अर्थ देते हैं जो स्पष्ट समझाने होते हैं। श्वेत-पट राजनेताओं पर खूब फबते हैं। सिर पर बंदरनुमा टोपी और कुर्लेदार पगड़ी या प्रादेशिक दस्तार व टोपी पहन जब इतराते हैं, … Read more