चूं चूं का चुनावी भूत

सुनील जैन राही पालम गांव(नई दिल्ली) ******************************************************** जवानी में नींद नहीं खुलती और बुढ़ापे नींद आती नहीं। जवानी में जॉगिंग जी का जंजाल लगती है,तो बढ़ापे में जीवन का सार। जवानी में हर काम कर लेंगे की भावना से छोड़ते चले जाते हैं और बुढ़ापे में अभी कर लो कल रहे या नहीं रहें। खैर,इसका मतलब … Read more

दार्शनिक की पाठशाला और मैं

जितेंद्र शिवहरे इन्दौर(मध्य प्रदेश) ********************************************************************* जीवन को भली-भांति जानने और समझने के लिए मुझे एक दार्शनिक की कक्षा में कुछ समय बिताने का सौभाग्य मिला। उन्होंने मेरी मुख मुद्रा को भांप कर पहले मुझसे ही भरी महफिल में सवाल किया-“बेटे! तुम्हारे अनुसार जीवन क्या है ?” मैं चौंका। पहला ही प्रश्न मुझसे पूछकर उन आदरणीय … Read more

व्यथा दर्शन:मोबाईल का गुम होना और नींद का खोना

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** मोबाईल का सभी के पास होना अनिवार्य हो गया। जीवन की आश्यकताओं में मोबाईल भी शामिल हो ही गया। पुराने समय में चिठ्ठी-पत्री कबूतर,और धीरे-धीरे डाक से भेजी जाने के बाद मोबाईल के चलन में आगे। सुबह-शाम मोबाईल हाथों में,शराब की बोतलों पर हानिकारक संदेश लिखा होता है,फिर भी लोग … Read more

बदलते रंग-रामभरोसे के संग

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* आज वर्तमान परिवेश में व्यक्ति के जीवन में रंगों की अहमियत बढ़ती ही जा रही है,फिर वह होली के रंग हों,मुस्कानों के रंग हों,या आध्यात्म के रंग,बस रंगों का होना ही जीवन की सार्थकता को सही मुकाम देता है। फिर भी नित्य नए रंग बदलती इस बहुरंगी दुनिया में … Read more

बुरा न मानो भाई होली है

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* बुरा न मानो भाई होली है, ये तो मस्तानों की टोली है। हम भी कुछ लेकर आए हैं झोली में, अरे भाइयों पहले रंग न लगाओ एक मिनट के लिए रूक जाओ। पुलवामा पर हुए शहीदों के लिए, मौन श्रद्धांजलि अर्पित करो। स्वाभिमान की पिचकारी में, हृदय भाव का जल … Read more

बड़े दम का ‘पट्ठा’

सुनील चौरे ‘उपमन्यु’  खंडवा(मध्यप्रदेश) ************************************************ ‘पट्ठा’ याने प्रत्येक काम में दक्ष, जी हाँ,जो हास-परिहास,चतुराई से अपना काम निकलवा ले या फिर अपना काम करवा ले,मेरे ख्याल से उसी का नाम पट्ठा होता है। मुझे याद है,बामन्दा जी दामनदा जी की तारीफ़ कर रहे थे। कह रहे थे-“सभी दूर प्रसिद्ध हो चुका है मेरा पट्ठा।” यानि … Read more