तुम्हें पाने की आस

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* तुम हो मेरा वो क्षितिज, जो दूर होकर भी मुझसे कहता…मेरा है। तुम मानो ठहरे हो, इस उम्मीद में कि यूँ ही रोज चलते-चलते, मैं पहुँच सकूँ किसी रोज तुम तक, और पा सकूँ तुम्हें अपने पास,अपने साथ फिर भर उठूँ मैं तुम्हें अपने दामन में, जैसे भर उठते हैं अंधेरे … Read more

जीवन दर्शन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* प्रकृति का अदभुत दृश्य, वृक्ष डाल पे लगे दो पत्ते, एक सूखा मुरझाया पत्ता, टूट गया डाली सेl एक ने पाया जीवन स्पंदन, हरा हो गया एक अंत की ओर चला हैl एक तरफ़ आरंभ हो रहा, एक काल के मुख में जाता, एक जीवन संचार हो रहाl समय की … Read more

बसंत आया

प्रभावती श.शाखापुरे दांडेली(कर्नाटक) ************************************************ काले बादल, झूम-झूम बरसे- धरती परl वर्षा की मस्ती, ले कागज की कश्ती- चल घूमें रेl रंग-बिरंगे, छाते जो काले नीले- लागे सुंदरl ओस की बूँदें, छाये पंखुड़ियों पे- मानो मोती होl बसंत आया, महकाई बगिया- खिले कुसुमl छह ऋतुएँ, जीना सिखाए हमें- विविध रँगl परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी … Read more

वो मुझसे ऊब जायेगा

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** मुझे ऐसा क्यूँ लगता है वो मुझसे ऊब जायेगा, मुकम्मल शायरी में जब मेरा दिल डूब जायेगा, जिसे मैं ढालता रहता हूँ गीतों और ग़ज़लों में- मुझे तन्हा बनाकर के वही महबूब जायेगाl परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म … Read more

जन्मदात्री

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** आठों याम जो जीती-मरती दिवा हो या रात्रि, महिमा का जिसकी वर्णन ना हो,वो है जन्मदात्री। हरदम दु:ख ले,सुख ही देती धैर्य में जैसे धारित्री, खुद भूखे रह भोग लगाती,जय हो तेरी जन्मदात्री। गीला हो जाए जब बिस्तर माघ में हो अँधियारी रात्रि, शिशु को सूखे खुद गीले पर सो … Read more

ख़त मेरा खोला उसने सबके जाने के बाद

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************** खत मेरा खोला उसने सबके जाने के बाद। दिल हुआ रोशन,शमा बुझाने के बाद। महफ़िल चुप थी मेरी चुप्पी के साथ, हुआ हंगामा मेरे हलफ उठाने के बाद। जो अब तक देखा वो कुछ भी नहीं था, कयामत हुई उनके दुपट्टा गिराने के बाद। माँ को समझाया,मैं जरूर आऊँगा, पर … Read more

बढ़ रही गर्मी,कट रहे पेड़

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गर्मी देखो बढ़ रही,कटते जंगल पेड़। आओ पौधा रोप लो,बंजर धरती मेड़॥ मत काटो इंसान तुम,ये तो छायादार। गर्मी से रक्षा करे,पालन पोषण सार॥ जीव जगत इनसे जिए,इनसे है संसार। पेड़ लगा काटो नहीं,मत करना व्यापार॥ धरती का श्रृंगार है,पादप वृक्ष पहाड़। पर्यावरण बचाय लो,आव लगाव झाड़॥ सूरज … Read more

एक चेतावनी…

डॉ.मंजूलता मौर्या  मुंबई(महाराष्ट्र) ************************************************************* दरकते पहाड़,उफनती नदियाँ, समुद्र से आता हुआ मौत का सैलाब… आंधी से बर्बाद होते गाँव और शहर, एक चेतावनी है…। कहीं दहकता ज्वालामुखी है, कहीं भूकंप से काँपती धरती… और कहीं बादल का सीना फट जाना, एक चेतावनी है…। सूर्य देव क्रुद्ध हो आग बरसा रहे, इंद्र देव भी हमसे रुष्ठ … Read more

आम

हेमा श्रीवास्तव ‘हेमाश्री’ प्रयाग(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* भोर सुहानी कोयल है कूजती, बहती शीतल बयार आयी आम की बहार। रसाल फल तो है राजा जिसके बड़े भाग वही चाखा, खट्टेपन से लड़कर जीता है वह वर्ष भर। फूल से फल बनने तक मंजरियाँ है महकती जब, तब ऋतु परिवर्तन होती है मधुमक्खी मीठा मधु ढोती है। यह … Read more

पावनी धरा..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** नित जीवन का सृजन कर, पोषती व्यथाएं झेलकर। रस,साँस लेते हम सदा, निज वर्धन कर रहे खेलकर॥ देती अथाह पावनी धरा, इसे हम भी कुछ अर्पण करें। भू,जल,वायु नित शोधित रहे, अहा सब वृक्षारोपण करें॥ न घिरे धरा तम में देखना, हम ये विटप कटने न देंगे। ये घन पावन … Read more