सच्चा दोस्त तो दीपक

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)******************************** ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)…. दोस्ती एक अमूल्य रिश्ता है,जहाँ केवल दिल से दिल मिलता हैवहाँ तो ना ही कोई ऊँच है, और ना ही कोई नीच,आपस में होता है केवल प्यार ही प्यार। दोस्त वही जो सुख-दु:ख में साथ निभाता है,जो हर मुश्किल घड़ी में सामने आकर खड़ा हो जाता हैवही … Read more

नीरा आर्य – तेरे रूप अनेक

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)********************************************** नारी तेरी अनेक कथा,रूप एक, पर कार्य अनेकसोच बदलकर काम है करती,देश का सदा मान है रखती आओ सबको एक बात बताऊँ,‘नीरा आर्य’ आज़ाद हिंद में रहती थींदेश की पहली महिला जासूस थीं,झाँसी रेजिमेंट की सिपाही थी। उत्तर प्रदेश के बागपत में जन्म लिया,शिक्षा पाई कोलकाता मेंकई भाषा में प्रवीण थीं,देश की … Read more

मन की रीति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** जो हो गये हैं उन्हें अब भी बुलाता है,बीती बातों को कभी नहीं भुलाता है।निराशा में भी आशा के फूल खिलाता है,आज भी तो मन मचल-मचल जाता है।उनकी यादों से अधरों पर आये लाली है़,सच में ही मन की रीति बेहद निराली है…॥ पुरानी बातें मन से कहाँ निकल पाती हैं,मन … Read more

हम हैं वासी एम.पी. वाले

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)******************************************* हम हैं वासी एम.पी. वालेदिल के सच्चे भोले-भाले,शीतल धार नर्मदा बहती-हरियाली खेतों में रहती। धीरे-धीरे नगर बस गयाजल प्रपात का मान बढ़ गया,संगमरमरी खान की नगरी-जबलपुर प्रसिद्ध हो गया। शिव दर्शन उज्जैन में करतेहर-हर महादेव सब गाते,लोग यहाँ के सब हैं सच्चे-बाबा महाकाल के बच्चे। भोपाल ताल है सबसे न्यारा,सब नगरों में … Read more

स्वतंत्रता पुकारती

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)************************************* माँ हमारी भारती, वो स्वतंत्रता पुकारती,हमें नि:शब्द देखती, बाट हमारी जोहती। हमारे लाल हमें न भूले, माँ याद करा देती,अपना कर्तव्य भले भूलें, माँ नहीं भुला पाती। जाने कौन घड़ी में, वेश बना खलनायक आए,हमारे घरों का सुख-चैन, सेंध मार चुरा ले जाए। हमें जब तक समझ आती, माल हमारा जा चुका … Read more

जनवादी कलमकार मुंशी प्रेमचंद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** मर्म रचयिता (मुंशी प्रेमचंद विशेष)…. प्रेमचंद की लेखनी, जन-जन की आवाज़।सबकी पीड़ा के बने, जो उस युग में साज़॥ हर निर्धन की वेदना, बनी कलम का सार।प्रेमचंद की दिव्यता, बनी प्रखर उजियार॥ लिखीं कथाएँ अनगिनत, उपन्यास- सम्राट।प्रेमचंद जी उच्च थे, किया सृजन मेंं ठाठ॥ रंगभूमि उनने रचा, गबन और गोदान।प्रेमचंद की … Read more

‘दोस्ती’ विश्वास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************** ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)…. ‘दोस्ती’सुंदर एहसासलगते पास-पासरखो प्यारविश्वास। ‘दोस्ती’,रिश्ता नाज़ुकसींचना स्नेह से,आएगी खुशबूचंदन। ‘दोस्ती’,खजाना अनमोलपूरी दुनिया मानतीकरना सम्मानकुबेर। ‘दोस्ती’,रखो उल्लासहोते अनेक रंगभरो दरारनि:स्वार्थ। ‘दोस्ती’,मन खुशउमंग का नाताहृदय बड़ाआधार। ‘दोस्ती’,ईर्ष्या नहींभरोसा है नींव,सुदृढ़ समभावताकत। ‘दोस्ती’मतलब साथहाथ बढ़ाना सदाहटना मतआजीवन। ‘दोस्ती’महल अनमोलभीड़ से अलग,बेशर्त संबंधमजबूत। ‘दोस्ती’मधुर मुस्कानदूसरे की जान,दर्द याददवा। … Read more

पहली बारिश तर कर गई…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* ये प्रश्न पूछनाक्या सार्थक था ?हर दिन में कई बारकि तुम कहाँ हो ? नज़र दौड़ाई,तो तुम्हें हरवॉट्सएप ग्रुप में पाया,तुम्हारे संदेश जैसे मुझे चिढ़ा रहे हैं। तुम्हें पूछा तोहमेशा की तरह,लंबा मौन ही पायाया फिर कई प्रश्न रहे निरुत्तर! फिर आँखें बंद कर के,अपने आस-पास ढूँढाअपनी हर एक साँस में,तुम्हें … Read more

युगद्रष्टा प्रेमचंद

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)************************************** मर्म रचयिता (मुंशी प्रेमचंद विशेष)… वे केवल लेखक नहीं थे,वे उस भारत की आवाज़ थेजो खेतों की मेड़ों पर उगता था,और भूख के साथ भीईमान का अन्न बोता था। उन्होंने महलों की नहीं,झोपड़ियों की कथा लिखीउनकी कलम ने,धूल से ढके चेहरों मेंमनुष्यता का उजाला खोजा। ‘गोदान’ में होरी की थकी साँसें,‘कफ़न’ में … Read more

जो भोगा, वही रचा

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)*************************************** मर्म रचयिता (मुंशी प्रेमचंद विशेष)…. अध्यापक, संपादक, लेखक, उपन्यासकार थे प्रेमचन्द,हिंदी जगत के सर्वमौलिक, उपन्यासकार थे प्रेमचंद। वास्तव में एक सच्चे कलाकार थे, मुंशी प्रेमचंद जीवन में जो भी भोगा, वही साहित्य में रचे प्रेमचंद  ३१ जुलाई, १८८० में लमही ग्राम बनारस में हुआ जन्म,१८८५ में प्रेमचंद ने मौलवी से उर्दू शिक्षा की … Read more