एक राह और एक लक्ष्य

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** लक्ष्य को पाना भी लक्ष्य है,जीवन की राह कठिन होसफलता पाना भी लक्ष्य है,लक्ष्य कभी ना डगमगाना है। अर्जुन-सा बाण साधना है,राह पर हो सदा रहे अडिग।सफलता राह चूमेगी हमारी,एक राह और एक लक्ष्य संग है॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्में श्री वर्मा … Read more

हाथों का करिश्मा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** दो हाथों का करिश्मा, जाने सकल जहान।जैसे भी वर्णन करो, इसका नहीं बखान॥इसका नहीं बखान, करिश्मे करती ज़्यादा।नारी करती पूर्ण, अगर वह करती वादा॥घर बन जाए स्वर्ग, असर उसकी बातों का।रखती सबका ध्यान, साथ उन दो हाथों का॥

देता सीख गुलाब

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* रचना शिल्प-दोहा आधारित… रंग न उड़ने दो कभी, रखो बनाकर आब।जीवन होता मखमली, जैसे फूल गुलाब॥ डाली लगा सुगंध दे, तोड़ो तो गल जाय।देता सीख जुड़े रहो, अनुनय करे गुलाब॥ ताजा तर रखना सदा, कभी न यह मुरझाय।जीवन में सुख ये भरे, पानी और गुलाब॥ आकर्षक होता सभी, दु:ख-सुख के ये रंग।विविध … Read more

देना हमें विवेक

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** हे ‘सरस्वती’,मिले विद्या का दानबनें साक्षर। माँ ‘वाणीश्वरी’,मिले सबको खुशीदे ऐसा वर। ‘वीणावादिनी’,मानव अधिकारसभ्य जीवन। माता ‘शारदा’,अक्षर वरदानतुमसे मिले। तुम ‘वाग्देवी’,तुम ही सरस्वतीतुम शारदा। हे ‘बुद्धिदात्री’,अक्षर अमृत मिलेबनाओ ज्ञानी। आप ‘विदुषी’,देना हमें विवेकबनें सफल। अक्षर बोधदिखाए हमें लक्ष्यभाग्य स्वर्णिम। हे माँ ‘भारती’,जगमगाए देशसदा उत्सव। ‘हंसवाहिनी’,धैर्य, शील औ’ शांतिदें आशीर्वाद॥

वर दो

मीरा सिंह ‘मीरा’बक्सर (बिहार)******************************* पुस्तकधारिणी वीणापाणि,ज्ञान सुधा उर भर दोरहूँ सदा तेरी गुण गाती,माता मुझको वर दो। कर दो मन से दूर अँधेरा,माँ ज्योतिर्मय कर दोबढ़कर थामों हाथ हमारा,मन ऊर्जा से भर दो। भटक न जाऊँ जग माया में,माता हाथ पकड़ लोझंकृत कर दो मन वीणा को,मुझमें अपना स्वर दो। मेरे सब अवगुण हर लो … Read more

कठिन पहेली ज़िंदगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कठिन पहेली जीवनी, समझे संत सुजान।तन मन धन अर्पित वतन, परहित श्रम यश मान॥ कठिन डगर मुश्किल सुपथ, साथ रहे पुरुषार्थ।बने लक्ष्य जनहित वतन, पालन हो धर्मार्थ॥ निर्णेता नित परिश्रम, मानव की पहचान।कहाँ आलसी सिद्धि पथ, देशभक्ति सम्मान॥ पल-पल जीवन समर्पित, राष्ट्र धर्म उत्थान।रखें आस्था कर्म में, बढ़े धीर … Read more

प्रार्थना वीणावादिनी से…

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… हे वीणावादिनी! तू इतना भला आज मेरा कर दे,मानव के श्रेष्ठ गुणों से लबालब तू मेरा दामन भर दे। शिक्षा के अहंकार में ना डूबूँ, सरल सहज ही बना रहूँ,ज्ञान के निर्मल ओज से मैं, पानी-सा निर्मल और शुद्ध रहूँ। दौलत की झूठी … Read more

लगता ‘बसंत’ था…

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* बसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… खुशियों भरी ऋतु,कलियों, फूलों, बहारों कानवचेतन मन का,उल्लासित तन कारंग-बिरंगी सपनों का,आम की बयार काभौंरों की गुंजन का,कोयल की कूक काइंद्रधनुषी रंग की तितलियों का,प्रीत का, मौसम बहार का‘बसंत।’ वक्त उनकी यादों का,गुजरता नहीं था यह सिलसिलासाथ बिताई सुहानी शामों का,उनके साथ होने … Read more

जलता रहे प्रेम दीप

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** न कोई चाहत, न कोई शर्त, बस प्रेम का उजियारा,मन से मन का संग जुड़ा, जैसे चंद्र का तारा। ना स्वार्थ, ना अभिमान, बस एक निश्चल धारा,जो हर दु:ख में साथ चले, सुख में झूमे पारा। नज़रों में सच्चाई हो, दिल में हो अपनापन,हर स्पर्श में हो कोमलता, हर शब्द में हो … Read more

घोला प्रेम रंग

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* घोला प्रेम रंग रस थोड़ा,डूब प्रेम में प्रेम निचोड़ाप्रेम धूप रख प्रेम सिखाते,आया है फरवरी माह निगोडा़…। प्रेमरोग हर दिल में छाया,उस पर बसंत यह बौरायाप्रेम उगा सरसों खेतों में,प्रेम पलाश गिराया ओढ़ा…। प्रेम बूंद बादल से बरसे,प्रेम बरसा प्रेम को तरसेप्यार प्रेम की इस आँधी ने,कोई स्थान नहीं है छोडा़…। नफरत … Read more