पुतले-सी देह

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेतहाशा भागते-दौड़ते,गाड़ियों की सवारी करतेखड़े-बैठे गपशप करते…मैंने केवल देह को देखा। लाइन में लगते, टांग खींचते,धक्का-मुक्की जबरन करतेहर गली और चौराहे में,मैंने केवल देह को देखा। स्वाद बढ़ाते, अनर्गल मिलाते,कभी थूकते, छुपते-छुपातेबची-खुची आत्मा मिटाते,मैंने केवल देह को देखा। करते इशारे साँझ-सवेरे,अस्त-व्यस्त कपड़ों में बंधतेअय्याशी में गोते लगाते,मैंने केवल देह को देखा। … Read more

नारी क्यों अंधकार में ?

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मिली बहुत दिन बाद सहेलीगले लगाया पर वह मौन,मैंने पूछा उससे-बहनाकहो सताता तुमको कौन ? बहती आँखों के अश्रुधार नेदुःख उसका बता दिया,ठीक नहीं है कुछ तो ऐसामैंने भी अनुमान किया। बड़े प्यार से पास बिठा करपकड़ा मैंने उसका हाथ,बोली वह-घर बिखर गया हैनहीं पति है मेरे साथ। बच्चों का पालन-पोषणऔर सास … Read more

पग-पग चुनौती ज़िंदगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* समझ चुनौती जिंदगी, है सुख-दु:ख संयोग।सफल वही संसार में, लोभ मोह तज भोग॥ लखि बलिदानी पूत को, भारत माँ हूंकार।शंखनाद कुरुक्षेत्र में, करो पाक संहार॥ उठा भीम फिर से गदा, संकट में है देश।पार्थ चढ़ा गांडीव शर, दे दुश्मन संदेश॥ फिर छायी काली निशा, घूम रहा आतंक।जाग घटोत्कच तुम … Read more

मेरी मर्जी

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* मर्ज अड़ा है मर्जी का…लेकर चलता, है मुश्किल,इस तोहफे के नाकाबिलछलनी-छलनी दरका यह,नन्हा दिल हजारों कील। ठहर जवाब अभी दूंगा,दुनिया की खुदगर्जी का…मर्ज अड़ा है मर्जी का…॥ अब नहीं दर्द को ढोना,नही ज़िंदगी है खोनाबैठ अजाब चल कोना,अपने दिल को है धोना। छोड़ चला लफ्फाजी ये,किरदारों को फर्जी का…ये मर्ज अड़ा है … Read more

पीला बसंत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** बसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… बसंत पंचमी का उत्सव,माँ सरस्वती को समर्पित हैपूजा करके उनको पीले फूल,पीले वस्त्र करते समर्पित हैं। पीला रंग माँ,सरस्वती को भाता हैसभी धार्मिक कार्य में भी,पीला रंग नज़र आता है। ज्ञान की देवी सरस्वती,इनका सच्चे मन से पूजन करेंऔर अपने-आपको,ज्ञान से … Read more

महापर्व चलो कुम्भ

सौ. निशा बुधे झा ‘निशामन’जयपुर (राजस्थान)*********************************************** चले हम तो चले,रेलम-रेल चलेपनघट नहीं घाट चले,माँ गंगा के द्वार चले। तप-जप नाम करे,भक्ति भाव आस्था लिएपग न डग-मग हो जाए,आस्था के सैलाब में। मिलते महापर्व पर,वसंत की बेला में।पग-पग हम चले,महाकुम्भ मेले में॥

राष्ट्रभक्ति के दीवाने

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* दो बूँद आँसू की न निकले, देश पे मरनेवालों पे,दिन-रात चौकसी चौकन्ने, नींद रहित अहर्निश परवानेबेफिक्र कुटुम्बों से होकर, जो राष्ट्रभक्ति के दीवाने,हमने जन्मा जिस माटी में, पालित पोषित जाबांज हुए। अब बारी आयी है मेरी उस माटी की लाज बचाने,हो देशशत्रु या आतंकी, हर एक चुनौती को अपनेसमूल … Read more

मिले करार दिल से

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* इबादतों-सी रहे मुहब्बत, मिले दिलों को करार दिल सेइनायतें भी कुदरती हों, न हो कभी बेकरार दिल से। बना रहे महबूब दिल तो, खुदा रखें महफूज़ दिल को,मिटे न हसरत रहे तसल्ली, मिला करेंगे रसूल दिल से। रसूख दिल का बना रहेगा, कुदूरतों को मिटा सकेगा,खुलूस होता मुजीब दिल का, … Read more

राष्ट्र धर्म आसक्ति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शील त्याग गुण कर्म पथ, नीति न्याय अनुरक्ति।वही लोक योगी बने, राष्ट्र धर्म आसक्ति॥ भौतिक सुख आसक्ति मन, सत्ता पद गुमराह।मानवता मतलब कहाँ, सुरसा मुख है चाह॥ अमृत उत्सव देश में, आज़ादी की याद।भूख प्यास की आग में, जली बाल बुनियाद॥ बीते छीयत्तर बरस, आजादी संघर्ष।परम वीर कुर्बानियाँ, लोकतंत्र … Read more

बदला-बदला बसंत

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** बसंन्त पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… बसंत!तुम्हारे बदले स्वरूप ने चौंका दियाहै,नव कलियों के संगीत ने मौन साध लिया हैनभ के इस अनंत विस्तार में कहीं,किसी पक्षी की गूंज नहीं। अभी तो वृक्षों ने धारण किए थे हरित परिधान,अब उनकी शाखाएं सूखीउंगलियों-सी बेजानआकाश को टटोलती हैं,याचना भरे स्वर … Read more