पुतले-सी देह
सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेतहाशा भागते-दौड़ते,गाड़ियों की सवारी करतेखड़े-बैठे गपशप करते…मैंने केवल देह को देखा। लाइन में लगते, टांग खींचते,धक्का-मुक्की जबरन करतेहर गली और चौराहे में,मैंने केवल देह को देखा। स्वाद बढ़ाते, अनर्गल मिलाते,कभी थूकते, छुपते-छुपातेबची-खुची आत्मा मिटाते,मैंने केवल देह को देखा। करते इशारे साँझ-सवेरे,अस्त-व्यस्त कपड़ों में बंधतेअय्याशी में गोते लगाते,मैंने केवल देह को देखा। … Read more