मानवता हम भूल गए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राजनीति के दाँव-पेंच फॅंस, मानवता हम भूल गए हैंजाति-धर्म-भाषा क्षेत्रों में, लोभ मोह मशगूल हुए हैं। सब रिश्ते खोकर अपनापन, बस अपने को तरस रहे हैंपड़े अकेले मरघट जीवन, नैन अश्क़ ग़म बरस रहे हैं। नश्वर भौतिक तन मन वैभव, जानबूझ कर भूल गए हैंराष्ट्र बोध परमार्थ निकेतन, भूल … Read more

मंजिल हमें पाना है

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** मिला है भाग्य से मानव जीवन,इसे सत्कर्मों से सार्थक बनाना हैचल पड़े हैं जीवन पथ पर,चलना बस चलते जाना है। सफ़र है हमारा कठिन,पर आगे तो हमें जाना हैराहें है बहुत ही मुश्किल,पर मंजिल हमें पाना है। सुविधाओं से शक्ति पाकर,कंटकों को साथी बनाकरनाम हरि का लेते जाना है,बढ़ना, बस … Read more

पत्र प्रियतम का…

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** पहली बार स्वप्न निद्रा मेंप्रियवर ने एक पत्र लिखा,अपनेपन का संबोधन देमुझको ‘प्रियतम मित्र’ लिखा। लिखा उन्होंने मेरे हमदमविह्वल कभी नहीं होना,कहीं अगर एकांत में हो तुमफोटो पकड़ के मत रोना। बड़ा अनोखा रिश्ता अपनाजन्मों का संबंध लिखा,पहली बार न जाने कैसाउन्होंने मुझको पत्र लिखा। फिर यह लिखा दुखी मत होनानहीं अगर … Read more

पसीने का अपमान है ये

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास… मुफ्तखोरी से बरगलाने की ये कौन-सी आँधी चली है,स्वार्थ के चलते राष्ट्र लूटने की नेताओं की चाँदी पली हैपसीने की कीमत कम करने की देखो बाढ़-सी बरबादी चली है,नेताओं के क्षुद्र स्वार्थ चलते, मुफ्त बाँटने की उन्मादी पली है। ये सुविधा नहीं है मित्रों! ये तुमको … Read more

मुफ्तखोरी की व्यवस्था ‘विनाश’

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास… मुफ्तखोरी बढ़ रही है सरकारी विश्वास में,बेरोजगारी घर कर रही, मुफ्तखोरी लिबास मेंपूरी तरह आश्रित जनता मुफ्त आत्म विश्वास में,जीने का अंदाज सीख लिया मुफ्त बढ़ती आस में।झोंक रही है प्यारी जनता, जीवन अपना खुद ही सर्वनाश में,जब तक हम पर आश्रित होंगे समझो जीवन … Read more

स्वस्थ तन-मन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भोर होते ही घर से निकल जाइए,उगते सूरज की थोड़ी किरण पाइएताज़गी अपनी साँसों में भर लीजिए,खिलते फूलों की थोड़ी महक लीजिए। कितना उम्दा कलाकार है देखिए,है करामात कैसी ज़रा सोचिएथोड़ा पैदल चलें थोड़ा कसरत करें,मन और तन की थोड़ी हिफ़ाज़त करें। स्वस्थ तन-मन से सधते बहुत काम हैं,स्वस्थ तन-मन का बस … Read more

कठिन प्रतिज्ञा सिया की

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अगहन शुक्ला पंचमी, सनातनी त्यौहार।विवाह दिन श्री राम का, अवध हुआ उजियार॥ हुआ स्वयंवर जानकी, सजा जनक दरबार।धनु पिनाक को तोड़ने, आये राजावार॥ कठिन प्रतिज्ञा सिया की, वरमाला आधार।धनुष भंग जो वर करे, पहनाये गलहार॥ तोड़ न पाये शिव धनुष, राजा राजकुमार।देख दुखी राजा जनक, वीर हीन संसार॥ दुखी … Read more

जयमाला

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* राजा भूपति आए बैठे, जनक के दरबार।मनोहर छवि श्रीराम की, देते तन-मन वार॥ सीता की विवाह बेला, धनुष बाण टूटेगा,जनक द्वारे भीड़ लगी राजा का मोह छूटेगा।बलशाली राजा आए जनक के दरबार,राजा भूपति…॥ सीता के सपने लिये, मन में चलते द्वन्द हजार,फूलों-सी कोमल सिया, किसे करें स्वीकार।इक-दूजे को देखते, नृप … Read more

माँ के बिना सूना है जहाँ…

सुनीता रावत अजमेर(राजस्थान) ************************************************************* आदाबो एहतराम ऐ मेरी माँ तुझे,झुक-झुक करूं सलाम ऐ मेरी माँ तुझे। बाँहों के पालने में झुलाती रही मुझे,लोरी हरेक रात सुनाती रही मुझे। अच्छे-बुरे का पाठ पढ़ाती रही मुझे,दुनिया की बदनज़र से बचाती रही मुझे। कंधे पे जग की सैर कराती रही मुझे,गोदी में लेके लाड़ लड़ाती रही मुझे। लफ़्ज़ों के … Read more

लालच का खेल

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ हर जगह जहाँ भी देखो,दुनिया में लालच का खेल हैमतलब के इस जहाँ में,सब लालच में अपने-आपको लगाए हुए हैं। दु:ख-तकलीफ़ में भी,लोग अपना ईमान भूल गएचंद पैसों की खातिर,लालच के रंग में डूब गए। अजब-गजब ज़िन्दगी के इस रंग में,पैसे की भूख की खातिरदो रोटी को भूल गए,लालच के … Read more