लिखना मेरा शौक़

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** धन्यवाद कहते रहो धरो सदा मन धीर,मालिक ऊपर बैठ कर लिखता है तक़दीर। खोये-खोये से सदा क्यों इतने गंभीर,बेचैनी छिपती नहीं तुम हो बहुत अधीर। स्वप्न सुनहरे देखिए नहीं बुराई कोय,बने बावले घूमते नहीं उचित यह पीर। आशा सब पूरी करें, करें सदा उपकारऐसा तो होता नहीं देख सकल संसार। अहित कभी … Read more

कलम हूँ सतरंगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मैं कलम हूँ सतरंगी पट, इन्द्रधनुष बन खिल जाती हूँ,अन्तर्मन के ऊहापोह को, धवल पत्र पर मुस्काती हूँ।दर्पण अतीत में वर्तमान गढ़ जाती हूँ नव पथ भविष्य-कालचक्र संवेद हृदयतल सुख-दु:ख गाथा लिख जाती हूँ॥ गहन घटा श्यामल दवात मसि, इंतज़ार कलमें करती हूँ,मानव मन के निहित भाव को कलमों … Read more

याद रहे अधिकार

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* याद रहे अधिकार, भूल गए कर्त्तव्य सब।किया नहीं उपकार, स्वार्थ सिद्धि में लग गए॥ मिले स्वतः अधिकार, ध्यान रखें कर्त्तव्य तो।कर्म रचित संसार, गीता भी कहती यही॥ देती हैं उपदेश, मानस की चौपाइयाँ।कर्म रहेंगे शेष, मिटे सभी अधिकार तो॥ कल होंगे अधिकार, आज करेगा कर्म जो।होंगे भव से पार, कर्म … Read more

करें सुश्रुषा मातु-पिता की

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* करें सुश्रुषा मातु-पिता की,सन्तति का कर्त्तव्य निभाएँनिशिवासर सन्तान समर्पित, मातु- पिता जीवन यश गाएँ। तनिक क्लेश हो असहिष्णुता सन्तानों को नित सहलाए,कर्जदार हम जीवनभर उस मातु- पिता प्रति शीश नवाएँ। विस्तृत नभ-सा छत्र पिता बन सन्तति जीवन सदा बचाए,जननी ममतांचल संजोए निज सीने का दूध पिलाए। क्षमा दया करुणार्द्र … Read more

मत कर अब तू टालम-टोल

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** झूठ-मूठ का रूठ-रूठ कर,आँखें बनाता गोल-गोल।गाल हाथ से थाम दोनोंअपना बस्ता अथर्व खोल…॥ घर-बाहर खेल रहे बच्चे,उसको भी करना है खेल।गृह कार्य से जान बचाता,एसे तो होएगा फैल।मम्मी उसे मनाती मेरा,राजा बेटा तू अनमोल।अपना बस्ता अथर्व खोल…॥ खेल-कूद भी है आवश्यक,पढ़ना भी मानो तुम सार।पुस्तक कलम से करो दोस्ती,जीवन की न पढ़ेगी … Read more

पानी की बूँद

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* छलक उठी पानी की बूँद भरे हुए बर्तन से कुछ दूर,सहम उठी, तनिक घबरा गई जब उछली वह पानी की बूँद। डरना उसका वाजिब था जब उछल पड़ी पानी की बूँद,मिट रहा था अस्तित्व उसका जब दूर हुई वह पानी की बूँद। अस्तित्व उसका मिटने वाला ही था कि,सहसा जा गिरी … Read more

सहारा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ परेशानी दुःख-दर्द में घिरे हुएजीवन में,कोई भी जब रास्तानहीं मिलाकठिनाईयों से तो मैं लड़ा,पर तेरा सहारा मेरे लिए मंजिल बन गई। बहुत तलाश रहा था मैं रोशनी को,मेरे अंधियारे जीवन मेंएक किरण दिखी तो किनारा मिला,तेरा सहारा मेरे लिए मंजिल बन गई। दुनिया के सितम से मजबूर हम,टूटा हुआ तारा … Read more

गुजर गए, याद आई

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** गुजर गए याद आई,आँसू लुढ़का गालों परकई आँसू लुढ़कते सुख गए,सिसकियाँ हिचकियाँ सखी बनीतस्वीर बेजानजब भी देखा जान आ गई। तिथियों पर सजा उपवन,मगर खुशबू फूलों की कहाँ खो गईसूख गए फूलों कोतस्वीर से उतारा,फूल तो वही रहेसिर्फ डोरी हाथ रह गईं। दीवार पर टँगी तस्वीर,मानो निहार रही तुम्हेंऔर आने वाले अपनों … Read more

अभी भी वक्त है ‘समझो’…

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** कोठियों पर कोठियाँ, बनकर हुई यहाँ सवार है,हिमाचल की राजधानी ‘शिमला’ का यह बाजार है। पहाड़ी की टेकरी पर बसा, हुआ यह निर्माण है,इन्हीं में प्रबन्धित शहर की, आबादी तमाम है। देवदार के हरे पेड़ों की बड़ी घनी यहाँ छाँव है,चारों ओर को कस्बे हैं, दूर-दूर बसे कई गाँव हैं। कह … Read more

मिलेगी मंज़िल, ले अगर ठान

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* नया है सफ़र नया है शहर,नयी पहचान, नयी उड़ानमिलेगी मंज़िल तू ले अगर ठान,हर कदम पर मिलेंगे काँटे हज़ार। हिम्मत मत हार हो जा तैयार,साथ देगा स्वयं का विवेकये जीवन है महासंग्राम,देकर जाएंगे बेहतर अंजाम। लोग उलझाएंगे पल-पल,हर ओर चाटुकार और सलाहकारलेना है तुझे निर्णय सोच-समझकर,हर दाँव तू खेल बहुत संभलकर। … Read more