नज़्म

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माहौल

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ दुनिया को डरा रही है मौत की परछाइयाँ,सब ही समझ रहे हैं इसकी गहराइयाँ। कैसा राक्षस है ये क़फ़न बेचने वाला,अब भी उसे तो चाहिये मीठी मिठाईयां। लाशों […]

दिल में बस गये क़रार बनकर

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ वो आये चमन में बहार बनकर,दिल में बस गये मेरे क़रार बनकर। उनका इतराना शर्माना या ख़ुदा,मन में घुस गया कटार बनकर। देखूँ उनको या ग़ुलाबी गुल देखूँ,जिस्त […]

बीता साल

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** ना कोसो बीते साल को,ये तो फ़र्ज़ निभाने आया था,इंसां को उसकी हद समझाने और जगाने आया थाl लख्त है जिस क़ुदरत का,उसको दोयम […]

ज़िन्दगी और मैं

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** आई थी ज़िंदगी तो हँसने खेलने,इसकी नुमाईश कर,लगा मैं बेचनेथी भूख ज़र की,गैरों को सौंपा इसे,सौदागरों के हाथों में छोड़ा इसेl इल्म का श़बाब […]

दुआ

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** इल्तिज़ा इतनी-सी मेरी है ख़ुदा,मैं करूँ,वो ही दुआ,जो है दुआ। माँगना ख़ुद के लिये तो,भीख है,बेक़स का हक़ माँगूं अगर,तो है दुआ। माँगूं तख़्तो-ताज़ […]

अना नहीं ये

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** दुनिया के बाज़ार में,व्यापार है बहुत,फ़नकार हैं बहुत,तो ख़रीदार भी बहुतउम्मीद से ज्यादा मिली कीमत जिन्हें,खुश थेख़ुद्दार थे हम,इसलिये,बस,हम नहीं बिके। कीमत वफ़ा की […]

मुश्किल वक़्त गुज़र जाएगा

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** देख दुश्वारियाँ,बोला बूढ़ा शजर, है वक़्त मुश्किल,मगर,जाएगा ये गुज़र इम्तिहां की घड़ी है,जरा सब्र कर, है वक़्त मुश्किल,मगर,जाएगा ये गुज़रll हर बरस छीनती,बर्ग ये […]

तेरा ज़िक्र

श्रीकांत मनोहरलाल जोशी ‘घुंघरू’ मुम्बई (महाराष्ट्र) *************************************************************************** तेरा ज़िक्र एक बार निकला, तेरे बारे में बातें हज़ार हुईl आँखों का मिलना था या एक मुलाकात थी वो, उस रात खयालों की […]

सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** महफ़िल मस्ती मय का दरिया है, सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में। साकी,शबाब,शराब,शराबी सब डूबे हैं, सावन के कारे कजरारे घने बालों में। मनमोहन की […]

दो जून की रोटी

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** जिन्दगी में बहुत मेहनत के बाद, कमाई है,दो जून रोटी। अपना स्वेद बहाया और बड़ी, लगन से पाई है,दो जून रोटी। श्रम से झिलमिलाए हैं स्वेद […]