सूखेगा कब आँख का पानी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** घन घन घन घनघोर घटाएं,घहर घहर घबराते बादल। भरी दुपहरी दीख रहा है, सूरज को भी अस्ताचल॥ बिजली कड़की बादल बरसे,जैसे अम्बर टूट गया हो। सदियों से जो धैर्य रखा था,इंद्रदेव का छूट गया हो॥ ताल तलैया नदिया नाले,सागर में कोहराम मचा है। अंदर-बाहर तन-मन भीगा,कौन कहाँ कब कौन बचा … Read more

मापदण्ड

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** चलो लिखो!!! भूख और फुटपाथ, नंगी देह और अंधाधुंध सामान से पटा बाजार, कूड़े के ढेर में बोतलें ढूँढते हाथ, बड़ी-बड़ी इमारतों में शिक्षा का रहवास, और वहीं कबाड़ी के यहाँ फटी किताब, उलटते-पलटते मापदंड से बाहर, फिर-फिर उल्टे बेंत पूरा दृश्य रंगमंच की शोभा लजा रहा है, … Read more

काश हम चिड़िया होते

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** काश हम चिड़िया होते, आसमान में हम रहते। शोरगुल से दूर रहते, मन हमारे शांत होते। काश हम चिड़िया होते, भीड़ पर नहीं चलते। काम से हम चले जाते , घर भी जल्दी आ जाते। काश हम चिड़िया होते, पेड़ों पर हम चढ़ जाते। फलों को तोड़कर खा जाते, … Read more

श्रावण की मस्ती

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** श्रावण का आना,वनों का बहकाना, घटाओं का शोर,मयूर का नृत्य दामिनी की चमक,अम्बर का दिवस, बूंदों की रिमझिम,नक्षत्र का संगीत चातक की प्रीत संग नक्षत्र की है बूँदl भोले की जयकार,सावन की है पहचान, कावड़ियों की चली बारात,गंगा का स्नान पुण्य बड़ा महान,सजी-धजी कावड़, चली भोले के द्वार। मयूर का नृत्य,कोयल … Read more

आँधियों के वार से

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** सागर को कभी झलकता देखा नहीं है डूबी है किश्तियाँ उसमें खुद के भार से, इश्क़ में अपने जज्बातों को रोके रखना… जीता नहीं है कोई,खुद अपने से हार के। गम और खुशी का तो ये शाश्वत रिश्ता है प्यार इन दो बुनियाद पर ही तो टिकता है, आँखें मिलाकर … Read more

ये दुआ है मेरी

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** आबाद रहे दुनिया तेरी ये दुआ है मेरी, यूँ हो रब की रहमत मिलें सदा चमन की कलियाँ, न हो काँटो की सहर ये दुआ है मेरी। तेरे जीवन रूपी सियाही के अल्फ़ाज़छीन तुझसे, खुशियों की सौंप दूँ सौगात मैं तुझे, खुदा की इतनी रहे मेहर ये दुआ है … Read more

पानी बिन जग सूना

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** ऐ मालिक देख, फिर तेरी बात हो रही। ख़ुद की करनी भोग रहे, और रब से फरियाद कर रहे। पेड़ काट-काट कर, हमने अपनी औकात दिखाई। जब प्राण फंसे संकट में, कहते खुदा तू हरजाई। कहीं पानी से हाहाकार मचा, कहीं बूंद-बूंद में जीवन फंसा। धरती प्यासी-प्राणी प्यासे, देख हाल … Read more

मँहगाई

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** उसकी पेट और पीठ मिली मुझे चकित करती रही, साथ ही चकित करती रही उसके आगे धरी, थाली में रोटी भी। जो किसी छाल की तरह, सूखकर ऐंठ-सी गयी थी, नमक भी रोटी से रूठकर, उसे छूना भी नागवार समझ बैठा था। मेरा धीर-गम्भीर मन करुणा से भर गया, रोने लगी … Read more

कैसे ऋण चुकाएं वीर तुम्हारा

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* ऊधम सिंह माँ का गौरव था, वो अमर वीर बलिदानी था। गुलामी स्वीकारी न हर्गिज़, वो वीर अति स्वभिमानी था॥ जलियाँ वाले बाग में जिसने, निर्दोषों को मरवाया था। उसी डायर को लंदन जाकर, ऊधम सिंह ने मार गिराया था॥ अंग्रेजों के जुल्मों को यह बालक, उर में सहन नहीं … Read more

सूखा सावन

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** सावन भी है सूखा साजन,जैसे गुजरा आषाढ़, खेतों में है पपड़ी सूखी,जैसे पसरा सूखाड़। कहीं-कहीं में सूखी नदिया,कहीं पे आयी बाढ़, सूखे में कोई रोता देखो,कोई डूबा रोये दहाड़। आसमान से शोले बरसे,धरती आग उगलती है, बरखा के इस मौसम में भी,धरती भाप उगलती है। सावन में हरियाली कैसे,वसुधा … Read more