सूखेगा कब आँख का पानी
ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** घन घन घन घनघोर घटाएं,घहर घहर घबराते बादल। भरी दुपहरी दीख रहा है, सूरज को भी अस्ताचल॥ बिजली कड़की बादल बरसे,जैसे अम्बर टूट गया हो। सदियों से जो धैर्य रखा था,इंद्रदेव का छूट गया हो॥ ताल तलैया नदिया नाले,सागर में कोहराम मचा है। अंदर-बाहर तन-मन भीगा,कौन कहाँ कब कौन बचा … Read more