समन्दर

डॉ. लखन रघुवंशी बड़नगर(मध्यप्रदेश) ************************************************** पक्षियों को समंदर से प्यार है, वे जब भी पानी को छूकर अपने पंख फड़फड़ाते हैं, मानो समंदर की सोयी आत्मा को जगाते हैं। और सिर्फ नदियाँ ही समंदर में नहीं मिलती, अंततः सारे रास्ते भी समंदर में मिल जाते हैं। हम ज़मीन के रास्ते समंदर की यात्रा करते हैंll

हरे-भरे पेड़

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** बैठे-बैठे मन कहीं खो गया, कड़ी धूप में आज रो दिया… दूर दूर तक हाय पेड़ नहीं, ना हवा ठंडी है,ना छाया कहीं। रूक जाओ अब भी ऐ मानव, पेड़ काटकर बनो ना दानव… क्यूं ये अपराध हो रहा, जघन बढ़ा पाप हो रहा… पेड़ों से ही साँसें अपनी। आओ हम … Read more

बरसो रे मेघा बरसो

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- आओ मेघा राजा आओ, प्यासी धरती जल बरसाओl सूखी नदियाँ ताल-तलैया, आकर इनकी प्यास बुझाओl आओ मेघा राजा… ढोर पखेरू मानुष सारे, तड़प रहे प्यासे बेचारेl जल ही जीवन प्राण वही है, प्राण दान इनको दे जाओl आओ मेघा राजा… सूख गयी खेतों की बाली, धानी चुनर हो गई … Read more

जीवन है अनमोल

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ जीवन है अनमोल तो, क्या लगाओगे तुम मोल। बिकता है सब-कुछ, पर मिलता नहीं जीवन। इसलिए ‘संजय’ कहता है, क्यों व्यर्थ गवां रहे हो, यह मानव जीवन। मिला है बहुत प्यार, अपनों से हमें यार। फिर क्यों किसी का, हम दिल दुखाए यहां। हँसी-खुशी के संग, जीवन को जीएं हम। हिल-मिलकर … Read more

कठोर

डॉ.सरला सिंह दिल्ली *********************************************** मानव है कितना कठोर निर्दयी, दया नहीं आती है मौत पर भी। नहीं समझता पिता के जज्बात, कांधे पे बेटे के शव का बोझ भी। गाड़ियों की कमी नहीं आज तो, एम्बुलेंस से या भेजते कैसे भी। थमा दी डिस्चार्ज स्लिप उसको, कह दिया ले जाओ इसे कैसे भी। नहीं दया … Read more

प्यार हुआ है मुझे

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** अजब-सा नशा छाया है और खुमार हुआ है मुझे, लो अब मैं चीख़कर कहता हूँ प्यार हुआ है मुझेl रातभर अब करवटें बदल कर सोने लगा हूँ, हाँ,अब उसका बनकर उसमें ही खोने लगा हूँl बेचैन रहती है नज़रें मेरी तुझे देखने की खातिर, इश्क़-ए-सफ़र के सफ़र का हूँ मैं … Read more

ईर्ष्या

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* रत्नजड़ित मखमली मयान में,देखो छिपी हुई तलवार हूँ, जल के कोमल प्रवाह में,असीम छिपी हुई रमणीय-सी धार हूँ। गर्म रक्त से कलेजा ठंडा करना आता हैं,हाँ मैं ईर्ष्या हूँ, मंद-मंद मुस्कान लिए,मुझे तिल-तिल मरना आता हैं। मैं क्रूरता और बर्बरता का कृत्य कितना खिलवाती हूँ,उसर-सी हूँ मैं, तेरी त्याग-तपस्या अर्पित … Read more

गुजर

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** वक्त गुजरा है मेरा,मैं अभी नहीं गुजरा, मेरी खुशियों,गमों को ले के साथ ये गुजरा। इसने ही बनाये ये हालात मेरे अच्छे-बुरे, आते-जाते हुए हालातों को भी ये ले गुजरा। इसकी ही तर्ज पे बनते-बिगड़ते हैं रिश्ते, रिश्तों को बना के यही रिश्ते तोड़कर गुजरा। आता-जाता रहा ये … Read more

दीर्घायु

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** मिल जाए आशीष हमें, दीर्घायु बन जाएं जीवनभर परोपकार कर, लोगों के काम आएं। हृदय,अंतर्मन पुनीत कर, द्वेष का परित्याग करें छल,कपट को छोड़ नित, स्नेह की बौछार करें। जग में सारे अपने हैं, अपनों से पहचान मिले मंजिल कितनी भी पा जाएं, कभी न हम गुमान करें। कर्म से श्रेष्ठता … Read more

तेरे लिए

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* गम हैं बहुत यहाँ पीने के लिए, मगर खुशियाँ हैं कम यहाँ जीने के लिए। गर मिटा नहीं सकता गम किसी का,दो कदम तो चल, तेरी कोशिश ही बहुत है दर्द कम करने के लिए। जोआज नहीं वो कल होगा,आज से बेहतर कल होगा, जीवन के इस समय … Read more