भारत का किरीट

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** उठ भारत! हो जाग्रत,और किरीट सम्हाल अपना, जो झुका सदियों से,उठा सम्मान से भाल अपना। जो हुआ विगत उसकी परत को मन से त्याग दे, गौरव की वीणा में विजय का पुन: तू अब राग दे। झककोर अपने-आपको,जगा अपने संचित बल को, द्युति ले आँखों में,और हृदय खंड में ला अनल … Read more

पर्यावरण की ओढ़नी

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** पेड़ों का है कहना, ना तुम हमें काटना धूप-छाँव का बिस्तर देते, राहगीर की पीड़ा हर लेते फल-फूल का है भंडार, वर्षा में सहायक होते। संजीवनी बन देते प्राण, तादाद बढ़े हमारी करो यह उपकार, पेड़ लगाओ सब बच्चे- बूढ़े और जवान। गंगा माँ स्वर्ग की देवी, भगीरथ का तपोबल महान … Read more

शत-शत नमन

डाॅ.देवेन्द्र जोशी  उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************** शत-शत नमन है धरा की धूल को, जन्म दिया जिसने बलराम से फूल को। फूल जो मातृभूमि की भेंट चढ़ गया, देख दुश्मन को वो आगे बढ़ गया। बिना रूके बिना डरे लड़ता ही गया, सीना ताने बहादुरी से बढ़ता ही गया। आतंकियों से लड़ते-लड़ते कुर्बान हो गया, माँ का लाड़ला … Read more

राष्ट्र प्रेम

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- देशप्रेम एक गुरूमंत्र है,सबको यही सिखाना है, कर पुरुषार्थ देश को अपने उन्नत हमें बनाना हैl हर घर पर लहराए तिरंगा,जन गण मन का गान हो, वंदेमातरम् गूँजे,ऐसा हिन्दुस्तान बनाना हैl राष्ट्रप्रेम जिस हृदय नहीं,हृदय नहीं वो पत्थर है, देशभक्ति का दीपक हमको हर दिल में जलाना हैl सारा … Read more

थोड़ा-सा मुस्कुराइये…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ तनाव भरी है यह जिंदगी, थोड़ा-सा मुस्कुराइयेl सुरम्य प्रकृति की गोद में, थोड़ा-सा भ्रमण कर आइयेl बिखरी बिखरी-सी है जिंदगी, मेरे हमसफ़रl मिले फुरसत तो, कोई मीठा-मीठा संगीत गुनगुनाइयेll परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि ५ मई १९६९ और जन्म स्थान-ऋषभदेव है। वर्तमान … Read more

घर की रौनक बच्चे

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** बच्चे मन के होते सच्चे, सुन्दर कृति ईश्वर की सौन्दर्यमय उनकी लीलाएं, मन मोहते,लोगों का। चहक-चहक कर फुदकने लगते, घर-आँगन में खुशियाँ बिखेरते मन भी उनके निर्मल होते, हृदय से सरस भाव झलकते। माता-पिता की आँखों का तारा, उनसे है जग में उजियारा नींद न आये तब माँ से, सुनने लगते … Read more

रेलगाड़ी के गार्ड का डिब्बा

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** रेलगाड़ी के अंत में वो,मैं गार्ड का डिब्बा हूँ, किसी ओर की मंजिल को,मैं उससे बंधा हूँ। छूट गये निशानों को देखना ही मेरी फितरत, क्या हो रहा है आगे,यह देखने को अंधा हूँ। खींच ले रहे हैं शायद,ये आगे वाले ही मुझे, या उनके साथ,खुद घिसटता हुआ बंदा हूँ। … Read more

करें योग व्यायाम

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष……………. तन-मन और जीवन को आओ थोड़ा सरस बनाएं, करें योग व्यायाम ध्यान और जीवन को सरल बनाएं हम। जग में फैल रही कटुता पर योग ध्यान का लेप लगाएं, वाणी में भरकर मिठास नव जागृति का दीप जलाएं। कुंभ दंभ का फोड़ धरा पर होंठों … Read more

प्रतीक्षा

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* अपनी अनन्त यादों… तुम्हारे असंख्य वादों के साथ जी रही थी मैं। मन कहता रहा.. तुम आओगे…जरूर आओगे, एक दिन! जाते हुए कहा था तुमने… मिलते रहेंगे हम आगे भी, तुम्हारे वादे पर यकीन कर मैं आने वाले उस कल की करती रही… प्रतीक्षा। तुम्हारी औपचारिक बातों को… समझ … Read more

दोहरी जिंदगी

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* हर कोई है जी रहा लिए दोहरे रूप, हर इंसान का बदला हुआ है स्वरूप। हर रिश्ते से खेल रहा इंसान, बिक गया सबका ईमान। जार-जार हो रही मासूमियत, शर्मशार हो रही है आज इंसानियत। हर शख्स ने पहना है नकाब, इस मसले का नहीं है कोई जवाब। सबकी जिंदगी … Read more