बेरोजगार

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* बेरोजगार की अपनी अलग कहानी है, हाथ में डिग्री और आँख में पानी है। पदक से अब मैं सब्जी को तौलूंगी, प्रमाण-पत्र के संग रद्दी की दुकान खोलूंगी। हर दिन मेरा एक आँसू बहता है, जब नब्बे प्रतिशत के संग भी बटुआ खाली रहता है। हुनर भी नहीं रहा अब … Read more

जिजीविषा

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** जिजीविषा… जीने की उत्कंठ इच्छा, तब और प्रबल होती गयी जब जीवन में में बस निराशा ही निराशा थी। घोर अंधकार जहाँ कुछ दिखाई न दे, पर तब भी रोशनी की एक छोटी-सी किरण ने जीवन जीने की राह दिखाई, और फिर चल पड़े उस अंधकार को चीरकर जीवन के … Read more

जिंदगी का सफर

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मिला है मनुष्य जीवन, जीने का मौका हमें। तो सफर कर रहे हैं, जिंदगी को जीने का। तो क्यों ना इसे हम, आप साकार बनाएं। और इस जीवन को, कल्याण करने में लगाएं॥ धर्म के साथ जीने का, फल अच्छा मिलता है। मैं नहीं कहता ऐसा, इतिहास के पन्नों में मिलता … Read more

बूंदें जीवन की सौगात

अलका जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** प्यास बुझाने को व्याकुल सावन की बूंदें, समंदर में जज्बा कहाँ प्यास बुझाने का यार रिश्तेदारों… बूंद-बूंद बारिश की बूंदें, बूंदों की बदौलत जीवन की सौगात पाई हमने… ज़मीं पर जल जीवन लिया यार रिश्तेदारों। आसमां के बुलावे पर जब-जब श्वेत वस्त्र धारण कर ऊपर पहुँची, दुनिया पुकार उठी बादल-बादल याद … Read more

बसे हो मेरी यादों में…!

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* मेरे बाबा ! हूँ तुमसे दूर जरूर फिर भी बसे हो मेरी यादों में। दिया जन्म, माँ ने जरूर पर ममता तो उड़ेली तुमने ही, पहला कदम चलना भी सिखाया था तुम्हीं ने, छुप-छुपकर मेरी बातों को सुन मन-ही-मन मुस्कुराना तुम्हारा, जब देखो मेरे ही किस्सों को दोहराना, न … Read more

बस,काम से काम रखो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** आँखों में अक्सर अपने तूफान रखो, यहाँ सिर्फ अपने काम से काम रखो। दिल से नफरतें बाहर निकाल फेंको, तुम दिल में प्यार-मोहब्बत तमाम रखो। कोशिशें करते रहो आखिरी साँस तक, गिर कर उठना हर बार है ये जान रखो। ये मत सोचों चार लोग क्या सोचेंगें, अपनी सोच को … Read more

रस्में

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* रस्मों की जंजीरों से, हम सब हैं यूँ बंधे हुए। प्रीत के धागे में हों जैसे, फूल रंग-बिरंगे गुथे हुए। रस्मों-रिवाजों से समाज, आगे बढ़ता रहता है। जो करते प्रतिरोध हैं, समाज पीछे छोड़ देता है। मुहब्बत किसी रस्मो रिवाज की मोहताज नहीं। इसीलिए इसे कोई भी, मानने को … Read more

बूढ़े सपने

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* आड़ी-तिरछी रेखाओं से अटा चेहरा, केश घटाएं चांदी हो गयी, मंद पड़ गयी नयन की ज्योति, पपड़ाए होंठ सूखा हलक़ झड़ गयी अब तो, दन्त-मालिका। लुंज-पुंज ये देह हो गयी, वक़्त और जिम्मेदारियों के बीच पता ही नहीं चला, ये रूप की छांव कब ढल गयी। कब ज़िन्दगी फ़िसल गयी, … Read more

माँ जैसा कोई नहीं

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* माँ की होती शक्ति अपार, माँ करती है निस्वार्थ प्यार। बदली दुनिया माँ रही वही, सृष्टि में माँ जैसा कोई नहींll माँ होती है ईश्वर का रूप, देवी समान माँ का स्वरूप। माँ की ममता का पार नहीं, सृष्टि में माँ जैसा कोई नहींll माँ होती बच्चे की प्रथम गुरु, … Read more

मेरा गाँव

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** शहरों की अब हवा लग गई, कहां खो गया मेरा गाँव। दौड़-धूप की जिंदगी हो गई, चैन कहां अब मेरा गाँव। पढ़-लिखकर होशियार हो गये, निरक्षर नहीं है मेरा गाँव। गली-गली में नेता हो गए, पार्टी बन गया है मेरा गाँव। भूल रहे सब रिश्ते-नाते, संस्कार खो रहा … Read more