नया वर्ष आया, खुशियाॅं लाया

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचनाशिल्प:१६-१४ के क्रम में ४ चरण प्रति छंद में कुल ३० मात्राएं, अनिवार्य रूप से चरणान्त में ‘मगण (sss) ३ गुरु वर्ण (२२२) का प्रयोग। नया वर्ष भारत का आया।खुशियाॅं साथ सजा लाया॥पर्व गुड़ी पड़वा ये भाया।इसका सुख सबने पाया॥ आओ गीत खुशी के गाएं।गीतों से खुशियाॅं पाएं॥साथ सभी के … Read more

स्वर्ग -नर्क कहाँ है

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** स्वर्ग कहाँ है कौन जानता, कहाँ रहे है नर्क।मानव सत से रहे परे अरु, व्यर्थ लगाता तर्क॥ कौन भला मृत देह बाद में, लौटा वापस आज।नर्क-स्वर्ग की कहे कहानी, खोला जिसने राज॥ स्वर्ग लोक की बात बताए, कैसा रहता हाल।नर्क लोक में क्या-क्या होता, कौन बताए चाल॥ कैसा है यमराज लोक … Read more

रंग… मिलन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** होली विशेष…. ‘होली’,मन मस्तीरंग की तरंग,मिलन बहानाखुशी। संस्कृति,सिखाती सबकोमिलकर पर्व मनाएँ,घुल जाएँरंग। सौहार्द,है त्यौहारस्नेह का उजाला,रहना सदामस्त। जीवन,बड़ा कठिनरंगीन होना पड़ेगा,उल्लास जरूरीमनोरंजन। उत्सव,जीवन रंगआनंद नहीं तो,सब फीकाबेरंग। खिलखिलाहट,चाहिए हमेंरंग है प्रतीक,जोड़ते हमेंमन। सद्भावना,बढ़ाते रंगइन बिन नीरसता,होती सदाजंग। होली,पर्व उल्लासकरें कामना हम,बिखरे सदाप्रसन्नता। होली,मतलब पवित्रताहर रंग अनूठा,देता सीखमिलन। परम्पराएँ,हमारी विरासतइनको सहेजना है,रंग जैसेअनूठे॥

शिव जी सदा जग पालक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* जय देव सदा जग-पालक हैं।हम तो शिवजी! बस याचक हैं॥करना करुणा नहिं लायक हैं।हम तो शिवजी! गुण गायक हैं॥ प्रभुजी शिव! के हम दास सदा।हम तो चरणों पर ख़ास सदा॥हम रंग रँगे उर वास सदा।शिवजी! हमको अहसास सदा॥ शिव जी! तुम तो ममतामय हो।शिव जी! तुम तो गति औ’ लय हो॥शिव … Read more

स्वस्थ देहयुक्त योग

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** हे मानव नित भोर भये सब, कर लें योग।कभी देह को नहीं धरेगा, कोई रोग॥ भिन्न-भिन्न योगा के गुण को, जानें आप।मानव नित पदचार करें तन, सहता ताप॥ संग योग फिर खान-पान का, रख लें ध्यान।नित्य भोर पर जल पीना है, हो संज्ञान॥ सुबह सैर को निसदिन जाएँ, मानें बात।शुद्ध वायु … Read more

रहते प्रभु जीवन में सबके

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचनाशिल्प:४ सगण (‘S’॥) के क्रम में कुल १२ वर्ण प्रति चरण।… कहते बनती बतियां मुझसे।तब तो कहता बतियां सबसे॥मुझसे मिलते प्रभु आ करके।रहते प्रभु जीवन में सबके॥ प्रभु से इस जीवन में खुशियाॅं।सजती रहती मन की दुनिया॥मन मुक्त हुआ उपयुक्त हुआ।सजती प्रभु से हर एक दुआ॥ जग है धन का … Read more

नवल प्रभात

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** इस विरहन का प्रीत हो, इस धड़कन की आस हो।व्याकुल निर्झर मन कहे, मेरा तुम विश्वास हो॥ अंतस मन की ज्योत तुम, तुम ही नवल प्रभात है।जीवन का उजियार तुम, तुमसे ही दिन अरु रात है॥ धड़क रहा जो नित्य ही, इस प्रियसी की श्वाँस हो।नीर नयन की धार तुम, प्रियवर … Read more

मानवता का रंग

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** जीवन हो निर्मल, भाषा अविरल, मृदुवाणी का, ध्यान धरें।मन होवे सुंदर, समता अंतर, मानवता का, मान करें॥छल और छलावा, व्यर्थ दिखावा, त्याग सभी जन, नित्य बढ़ें।जनहित कर जाएँ, जन मुस्काएँ, जीवन अनुपम, आप गढ़ें॥ गोरा अरु काला, हदय उजाला, जिसका होवे, मान करें।अंतर्मन जावें, भाव बनावें, रूप मोह से, सदा डरें॥ईष्या … Read more

वसंत की बयार

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ऋतुराज,फिर आयामन को लुभाता,फूल खिलेमनभावन। मन,अपना झूमेलपक लूँ ख़ुशी,छूटे नहींसाथ। प्रेम,हास-उल्लासहर कोई गुलज़ार,मौसम हसींमनमोहन। यादें,खजाना खुलास्मृति ढेर सारी,हमराह कौन ?आज। नवयौवन,खिला चेहरावसंत की बयार,उड़ना चाहेप्यार। तितलियाँ,लुभाती रंगीनप्रकृति की चित्रकारी,बड़ी हसीनमनमोहिनी। धरा,महक उठीओढ़ी पीली चादर,किसान चहकेजनउत्सव। कोयल,बनी कोकिलापंछी झूमे डाल,करें सुस्वागतमसबका। अभिलाषा,माँ शारदेकृपा बनी रहे,वर मिलेंअनेक। बाँसुरी,मन मोहतीछिड़ी सुरीली तान,इठलाए गोरियाचहके॥

माघ-स्नान वृत

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* पावन बहुत प्रयाग, चलो करें वंदन अभी।गुंजित सुखमय राग, रहें हर्षमय हम सभी॥ कितना चोखा मास, कहते जिसको माघ हम।जीवित रखता आस, हर लेता हर ओर तम॥ तीर्थ सुपावन नित्य, माघ माह की जय करो।खिल जाये आदित्य, सदा नेहमय लय वरो॥ गंगा में हो स्नान, जीव करे यश का वरण।मिलता नित … Read more