मेहनत से न भागता

डॉ.सत्यवान सौरभहिसार (हरियाणा)************************************ बजते घुँघरू बैल के,मानो गाये गीत।चप्पा चप्पा खिल उठे,पा हलधर की प्रीत॥ देता पानी खेत को,जागे सारी रात।चुनकर काँटे बांटता,फूलों की सौगात॥ आँधी खेल बिगाड़ती,मौसम दे अभिशाप।मेहनत से न भागता,सर्दी हो या ताप॥ बदल गया मौसम अहो,हारा-थका किसान।सूखे-सूखे खेत है,सूने बिन खलिहान॥ चूल्हा कैसे यूँ जले,रही न कौड़ी पास।रोते बच्चे देखकर,होता खूब … Read more

नमन नियंता नारियाँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** वर्धापन महिला दिवस,महाशक्ति को आज।करुणा ममता स्नेहिला,नवजीवन आगाज॥ धीरा-वीरा साहसी,प्रतिमानक संघर्ष।मातु सुता भगिनी वधू,है जीवन निष्कर्ष॥ भावुक-नाजुक कोमला,मानक नित संकोच।नवदुर्गा जगतारिणी,सजग रखे शुभ सोच॥ मनसा वाचा कर्मणा,परसुख जीवन दान।ममतांचल छाया बनी,कौलिक नित सम्मान॥ पढ़ी-लिखी नारी सबल,चढ़े लक्ष्य सोपान।आज निर्भया नारियाँ,सफला हर अरमान॥ सहज सरल मृदुभाषिणी,अश्रु नैन आगार।प्रिया खुशी मुस्कान … Read more

रखें समरसता का ताव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************** समरसता यदि संग है,तो पलता मधुमास।अपनाकर संवेदना,मानव बनता ख़ास॥ समरसता-आचार तो,है करुणा का रूप।जिससे खिलती चाँदनी,बिखरे उजली धूप॥ समरसता सुविचार से,मानव बने उदार।द्वेष,कपट सब दूर हों,बिखरे नित उपकार॥ अंतर्मन में नम्रता,अधरों पर मृदु बोल।समरसता करती सदा,जीवन को अनमोल॥ रीति-नीति हमसे कहें,बन तू सद् इनसान।समरसता देवत्व है,पाए जीवन मान॥ समरसता से … Read more

हिंदी मानस में बसी

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)***************************************** अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पर्धा विशेष…. हिन्दी भाषा मातृ सम,जिसका अनुपम प्यार।सहज,सरल,बेहद मधुर,अति स्नेहिल व्यवहार॥ हिन्दी मानस में बसी,हिन्दी से ही मान।हिन्दी भाषा प्रेम की,हिन्दी से पहचान॥ हिन्दी करती हिन्द का,साहित्यिक श्रृंगार।सिखलाती है सभ्यता,दे स्नेहिल पुचकार॥ हिन्दी भाषी हम सभी,हिन्दी अपनी शान।आओ हिन्दी का करें,हम मिलकर उत्थान॥ हिन्दी अपनी अस्मिता,संस्कार अभिमान।करें सृजन … Read more

प्यार हमें निजभाष से

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पर्धा विशेष…. प्यार हमें निज भाष से,यही हमारी शान।हमको इस पर गर्व है,यही राष्ट्र का मान॥ मातृभाष के मान से,होता राष्ट्र महान।निजभाषा से एकता,अरु होता है ज्ञान॥ आजादी के यज्ञ में मातृभाष का योग।निज भाषा से उन्नती,परभाषा है रोग॥ निजभाषा अपनाइये,रखो उसी का ध्यान।हमको इस पर गर्व है,मातृभूमि … Read more

हिंदी दिल में बसे

सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’मुम्बई(महाराष्ट्र)*************************************************** हिंदी में ही मन बसे,और बसे संसार।सरिता हिंदी भाव की, जीवन का आधार॥ सहज सरल भाषा यही,जिसकी नहीं मिसाल।जो इसका आदर करे,करती उसे निहाल॥ अनुजा संस्कृत की यही,सुंदर भाषा ज्ञान।शब्द शब्द परखा हुआ,साँचा यह विज्ञान॥ हिंदी महिमा मैं करूँ,शब्द नहीं है पास।हिंदी भाषा विश्व हो, यह है मन की आस॥ विश्व पटल … Read more

युवाशक्ति को नमन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************** युवाशक्ति को है नमन्,जो रचती इतिहास।हो हिमगिरि-सा दृढ़ युवा,ऊँचा ज्यों आकाश॥ युवा उठे तो हो सृजन,विचले तो विध्वंस।युवा विवेकानंद है,है मानस का हंस॥ तूफ़ानों को जीतकर,ला दे नवल विहान।युवा सदा गतिशील है,है वह मंगलगान॥ भगतसिंह,सुखदेव है,युवा लगे ‘आज़ाद’।हर बाधा से लड़ करे,युवा वतन आबाद॥ युवा जोश का नाम है,रखता नित … Read more

अनुशासन विजयी जगत

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय **************************************** अनुशासन की नित कमी,लोभ घृणा उत्थान।प्रतीकार में जल रहा,शैतानी हैवान॥ अनुशासन बिन छात्र अब,निर्भय बन परिवार।मानक बस उत्तीर्णता,मनोयोग लाचार॥ आजा़दी मतलब नहीं,अनुशासन अवमान।मोटर गाड़ी अधिनियम,जीवन रक्षक मान॥ युवा जोश नित होश खो,मदोन्मत्त मधुपान।नित न्यौता दे मौत को,चला यान गतिमान॥ अनुशासन की है कमी,विरत नार्य संकोच।यौवन के मधुशाल में,बदली बेटी सोच॥ … Read more

शिक्षा धन सबसे बड़ा

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** शिक्षा धन सबसे बड़ा,शिक्षा है अनमोल।शिक्षा से कुछ भी नहीं,और नहीं हैं तोल॥ शिक्षा से संस्कार का,होता आज विकास।शिक्षा से इंसान है,शिक्षा ज्ञान प्रकाश।। सबसे उत्तम ज्ञान है,मत बनना अज्ञान।अज्ञानी दु:ख पात है,जैसे मृत्यु समान॥ जीवन में सुख पाइए,शिक्षा ज्ञान अपार।शिक्षा ज्योत जलाइए,जगमग हो संसार॥ उन्नति देश समाज की,शिक्षा से … Read more

इन्सान और भगवान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* इंसां होना है कठिन,सुन तू ऐ भगवान।देख परेशानी ज़रा,जीना ना आसान॥ इंसां नित ही भोगता,कष्ट,दर्द का शाप।दु:ख के काँटे,वेदना,कौन सकेगा माप॥ इंसां ईश्वर पूजता,सुखी रहे हर एक।पर पीड़ा का संग है,बढ़ते रोग अनेक॥ सचमुच में होना सरल,स्वर्ग बैठ भगवान।पर धरती पर आदमी,की आफ़त में जान॥ जब धरती पर आ गए,भगवन् … Read more