बन जाओ अनमोल

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* ग़म है,पीड़ा,है व्यथा,पर है सुख भी साथ।जो जैसा चिंतन करे,आता वैसा हाथ॥ खुशियाँ मिलती हैं बहुत,तकलीफ़ें भी संग।जीवन के दो रूप हैं,होते हैं दो रंग॥ वैसे जीवन को कठिन,माने है इनसान।कभी-कभी यह सत्य है,पर जीवन वरदान॥ जीवन का निर्माण कर,मानव बने महान।तप जाए जब आग में,तब मानव भगवान॥ जीवन के … Read more

कृष्णामृत

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ आँखों में छवि आपकी,हे प्रभु कृपा निधान।दुख-भंजन दुख टारिये,हम बालक नादान॥ कृष्ण बजाये बाँसुरी,मुख पर सुन्दर साज।मधुवन नाचे राधिका,गोपिन की सरताज॥ भोली-भाली राधिका,कृष्ण प्रेम बँध आय।मधुबन घूमे संग में,मंद-मंद मुस्काय॥ मोहन की छवि चित्त में,रख अपने वो पास।पिया-पिया रटने लगी,राधा हुई उदास॥ श्यामल मोहन रूप तो,राधा गोरी रंग।रास रचा ब्रजधाम … Read more

दीप पर्व

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष….. दीप कर रहे वंदना,सदा रहे उजियार।हर घर नित खुशहाल हो,दूर भगे अँधियार॥ दहरी पर आकर रमा,करती रहीं पुकार।पर गृहस्वामी ने नहीं,किया उचित सत्कार॥ रोशन है बस्ती,नगर,आलोकित हर गाँव।उल्लासों के संग ही,पाता है सुख ठाँव॥ है गृहलक्ष्मी पूज्या,सम्मानित हर नार।अंतर के आनंद से,जगमग है संसार॥ घर में … Read more

कर्म सदा करते रहो

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) *************************************************** कर्म बनाये भाग्य को,कर्म सभी का मूल।दोष भाग्य को देत हैं,यही मनुज की भूल॥ भाग्य भरोसे बैठकर,कभी न सोचो व्यर्थ।कर्म सदा करते रहो,यह जीवन का अर्थ॥ जीवन कर्म प्रधान है,करता जो सत्कर्म।उसका भाग्य बुलंद हो,जीवन का यह मर्म॥ सुख-दु:ख मिलते भाग्य से,विधि का यही विधान।भाग्य बना है कर्म से,कर्म दिलाये मान॥ … Read more

मधुरिम हो सम्बन्ध

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** मधुरिम रिश्ते नित सुखद,हैं जीवन वरदान।अति कोमल नाजुक सतत,निर्भर नित सम्मान॥ निर्भर हो रिश्ते मधुर,त्याग शील परमार्थ।लघुतर जीवन तब सफल,रिश्ते हो बिन स्वार्थ॥ घर-बाहर समाज हो,चाहे देश-विदेश।आपस के व्यवहार पर,रहते रिश्ते शेष॥ रिश्ते हैं अनमोल धन,मधुरामृत उपहार।सखा सहोदर पूत सम,जीवन का आधार॥ नीति-रीति नित प्रीति पथ,रिश्ते चले अघात।सरल सहज … Read more

माँग रही वरदान

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)*********************************************** पावन कार्तिक मास के,कृष्ण पक्ष की चौथ।सुहागिनें रखती सभी,शुभ व्रत करवाचौथll करती करवाचौथ व्रत,माँग रही सौगात।माँ गौरा कर दो कृपा,अमर रहे अहिवातll सजी सुहागन जोहती,नभ में शशि की बाट।अर्घ्य चंद्र को दे करें,दर्शन पिया ललाटll पति के प्रति निष्ठा दिखे,तब शुभ करवा पर्व।धन्य सुहागन ‘शिव’ वही,जिनको पति पर गर्वll व्रत रख … Read more

प्रियतम मेरे आ मिलो

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************************** रात सुहानी चाँदनी,सबके मन को भाय।शीतल मंद समीर में,लगे हिया हरषायll तारों से जगमग धरा,धवल ज्योत्सना रंग।ऐसे में खुश रागिनी,पाकर पिय का संगll शरद पूर्णिमा चाँदनी,रजनी भी सुनसान।प्रियतम मेरे आ मिलो,तुम हो मेरी जानll सागर की लहरें चले,देख चाँद के पार।मिलने की चाहत लिए,पाने को वह प्यारll गहन तिमिर रातें … Read more

हो बेटी निर्बाध

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* देखो कलियुग कालिमा,फैला है व्यभिचार।निशिदिन मरती बेटियाँ,लाचारी सरकारll लव ज़िहाद के नाम पर,परिवर्तन नित धर्म।फाँस रहे मासूम को,प्यार नाम दुष्कर्मll भोली-भाली बेटियाँ,फँसती झूठा प्यार।बेच रही निज अस्मिता,धोखा हत्या हारll अद्भुत है निर्लज्जता,असंवेदित भाव।पागलपन हिंसक प्रकृति,खल कामी दे घावll मति विवेक चिन्तन विरत,पशुता है आचार।निर्भय हैं वे मौत से,आदत से … Read more

हो विजया मानव जगत्

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** सकल मनोरथ पूर्ण हो,सिद्धदातृ मन पूज।सुख वैभव मुस्कान मुख,खुशियाँ न हो दूजll सिद्धिदातृ जगदम्बिके,माँ हैं करुणागार।मिटे समागत आपदा,जीवन हो उद्धारll सिंह वाहिनी खड्गिनी,महिमा अपरम्पार।माँ दुर्गा नवरूप में,शक्ति प्रीति अवतारll खल मद दानव घातिनी,करे भक्त कल्याण।कर धर्म शान्ति स्थापना,सब पापों से त्राणll श्रद्धा मन पूजन करे,माँ गौरी अविराम।रिद्धि-सिद्धि अभिलाष जो,पूरा … Read more

माप तौल कर बोल

डॉ. रामबली मिश्र ‘हरिहरपुरी’वाराणसी(उत्तरप्रदेश)****************************************** (रचना शिल्प:मात्रा भार ११/१६) माप तौल कर बोल।सोच समझकर बोला करना॥ बोलो नहीं कुबोल।मृदु भाषी बन चलते रहना॥ बोली हो अनमोल।ठोक बजाकर बातें कहना॥ नहीं बजाओ ढोल।गोपनीयता कायम रखना॥ नहीं खोलना पोल।हर मानव की इज्जत करना॥ मत हो जाना गोल।साथ निभाते चलते रहना॥ बनना सीखो घोल।सीखो घुलमिलकर के रहना॥ कभी न … Read more