राजभाषा नीति का उल्लंघन,बार-बार, लगातार,सुनिए सरकार

प्रति सेवा में, सचिव महोदया राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,भारत सरकार, नई दिल्ली-११००११ सन्दर्भ: १८ जून २०१४,१६ अगस्त २०१४, १३ सितंबर २०१७,५दिसंबर २०१८ तथा ८ दिसंबर २०२० की शिकायतें और विभिन्न अनुस्मारक (संलग्न) विषय:भारत सरकार के विभागों-मंत्रालय द्वारा हिंदी में विज्ञप्तियाँ न जारी करने एवं पीआईबी द्वारा राजभाषा अधिनियम का निरंतर उल्लंघन करने की लोक शिकायत। … Read more

महिला सशक्तिकरण:राक्षसी सोच को मारना जरुरी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)…. आज के आधुनिक समय में महिला सशक्तिकरण एक विशेष चर्चा का विषय है। हमारे आदि-ग्रंथों में नारी के महत्व को मानते हुए यहाँ तक बताया गया है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है,वहाँ देवता निवास करते … Read more

नारी जीवन समाज संरचना का आधार

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)…. नारी और जीवन के अनगिनत मनोभाव व विचार युगों से यदा-कदा प्रकट होते ही रहे हैं। हिंदी कवियों की कविताओं में नारी की पहचान कभी ‘ श्रद्धा सुमन’ बन जाती है तो कभी ‘अबला।’ अन्य भाषाओं की रचनाओं में है-भाव भंगिमा में श्रृंगार रस की … Read more

यूक्रेन पर हमला:‘नाजीवाद’ और ‘नवनाजीवाद’ की लड़ाई ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** आज जबकि हम दुनिया में २ महाशक्तियों के वर्चस्व की लड़ाई में एक और हँसते-खेलते देश यूक्रेन को बर्बाद होते देख रहे हैं तथा इस थोपे गए युद्ध का औचित्य तलाशने की कोशिशें कर रहे हैं,तब इस बात की ओर कम ही लोगों का ध्यान गया है कि इस पूरे घटनाक्रम के … Read more

यूक्रेनः भारत पहल क्यों न करे ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर भारतीय लोगों की नजरें शुरु से गड़ी रही हैं लेकिन १ भारतीय छात्र की मौत ने देश के प्रचारतंत्र को हिलाकर रख दिया है। सरकार की तरह भारत की जनता भी अब तक बिल्कुल तटस्थ थी। वह रूस और यूक्रेन के इस युद्ध को एक तटस्थ … Read more

मातृभाषा अर्थात स्वभाषा का महत्व

डॉ. विजय कुमार भार्गवमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ स्वतंत्रता सैनानियों ने अपना बलिदान इसलिए दिया था कि उनका देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होकर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बने। उसके लिए उनका मानना था कि भारतीय भाषाएँ हर क्षेत्र में प्रतिष्ठापित हों और हिन्दी भारत की सम्पर्क राष्ट्रभाषा बने। क्या उनका सपना पूरा हुआ या आज मानसिक गुलामी … Read more

आतंक का जवाब आतंक नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* २००८ में अहमदाबाद में हुए आतंकी हमले के अपराधियों को विशेष अदालत ने जो सजा सुनाई है, वह स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी सजा है। इसमें ३८ अपराधियों को मृत्युदंड, ११ को उम्रकैद और ४८ पर २.८५ लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसके पहले राजीव गांधी हत्याकांड में २६ लोगों को … Read more

पद-प्रभाव का दुरूपयोग विचारणीय

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** प्रजातंत्र में चुने हुए प्रतिनिधियों को विधायिका मानते हैं,उनके अधीनस्थ कार्यपालिका निश्चित रूप से उनकी सहायता करने,उनकी मंशाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होती या रहती है। बहुत सीमा तक न्यायपालिका भी अप्रभावित नहीं रहती है। बुद्धिमान राजा यानी वर्तमान में प्रधान मंत्री को स्वयं और अधीनस्थों को यानी मत्रियों को निम्न … Read more

भारत माता का राजदुलारा चन्द्रशेखर आजाद

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** पुण्यतिथि (२७ फरवरी) विशेष भारत राष्ट्र को स्वतन्त्रता दिलाने हेतु प्राण निछावर करने वाले स्वतन्त्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद( बचपन का नाम चन्द्रशेखर सीताराम तिवारी)एक ऐसे सेनानी थे जो अंग्रेजों के हाथों कभी भी जीवित गिरफ्तार न होने की अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहे। इसी के चलते वे न केवल पूरे विश्व … Read more

भारत:सच्चा लोकतंत्र लाने में देर नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* दुनिया के किन-किन देशों में कैसा-कैसा लोकतंत्र है,इसका सर्वेक्षण हर साल ब्लूमबर्ग नामक संस्था करती है। इस साल का उसका आकलन है कि दुनिया के १६७ देशों में से सिर्फ २१ को आप लोकतांत्रिक कह सकते हैं। ५६ देश खुद को लोकतांत्रिक बताते हैं लेकिन वे लंगड़ाते हुए लोकतंत्र हैं। याने दुनिया … Read more