वीर जवान की संगिनी…

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** भारतीय वीर जवान जब युद्ध में लड़ते-लड़ते मौत के पहलू में सो के शहीद होने वाला होता है,तभी अपनी जीवन संगिनी को आख़री संदेश सुनाता है। उस संदेश में वो आशाओं का दीप जलाए रखता है, वो अपनी पत्नी को ये नहीं कह पाता कि,वो अब कभी न लौट पाएगा। … Read more

सूर्योपासना का पर्व-छठ पूजा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* छठ पर्व मूलतः सूर्य की आराधना का पर्व है,जिसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ … Read more

रचना का हस्ताक्षर

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* साहित्य के क्षेत्र में किसी भी रचना का हस्ताक्षर लेखक के दस्तखत न होकर उसके द्दवारा लिखी गई प्रस्तावना या भूमिका होती है। आजकल प्रस्तावना या भूमिका शीर्षक से अभिहित न होकर नए स्वरुप में शीर्षक रचते हैं। लेखक द्वारा रचना प्रकाशन के समय प्रस्तावना व भूमिका लिखने से रचना को … Read more

पेगासस जासूसीःसरकार की मुश्किलें बढ़ी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार की खूब खबर ले ली है। पिछले २ साल से चल रहे जासूसी के पेगासस नामक मामले में अदालत ने सरकार के सारे तर्कों,बहानों और टाल-मटोलों को रद्द कर दिया है। उसने कई व्यक्तियों,संगठनों और प्रमुख पत्रकारों की याचिका स्वीकार करते हुए जासूसी के इस मामले की … Read more

उन घड़ियों में रोएं क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली ************************************** जिन्दगी का एक लक्ष्य है- उद्देश्य के साथ जीना। सामाजिक स्वास्थ्य एवं आदर्श समाज व्यवस्था के लिए बहुत जरूरी होता है कर्तव्य-बोध और दायित्व-बोध। कर्तव्य और दायित्व की चेतना का जागरण जब होता है,तभी व्यक्तिगत जीवन की आस्थाओं पर बेईमानी की परतें नहीं चढ़ पाती। सामाजिक,पारिवारिक एवं व्यक्तिगत जीवनशैली के शुभ मुहूर्त … Read more

दीपावली ख़ुशियों वाली

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… ‘दीपावली’ का नाम सुनते हीं दीयों की क़तार, रोशनी की जगमगाहट,आतिशबाज़ियाँ,रंगीन कंदील,रंग-बिरंगे कपड़े,गुजिया,लड्डू,मिठाईयाँ,नमकीन,चकली आदि…आदि…बहुत सारी बातें चलचित्र की तरह आँखों के सामने घूमने लगती हैं और चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेर जाती हैं। इस वर्ष फिर ‘दीपावली’ का पावन पर्व देश की संस्कृति का दर्शन कराने … Read more

दीपों का सांस्कृतिक पर्व

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… दीपों का सांस्कृतिक पर्व दीपावली हमारे देश का सबसे उल्लासमय त्योहार है। यह त्योहार हमें परम आनन्द की अनुभूति कराता है व दैनिक कार्यों से हटकर उल्लास प्रदान करता है। सुख-समृद्धि,मंगल तथा आलोक का यह पर्व अंधकार पर प्रकाश का व अज्ञान पर ज्ञान की … Read more

कष्ट देकर पटाखे जलाना जरूरी ?

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… बहुत पहले हम अपनी खुशियों का इज़हार प्रसन्नता,आनंद के साथ मनाते और व्यक्त करते थे पर अब जबसे आर्थिक उन्नति हुई और व्यक्तिगत स्वच्छंदता बढ़ी,सामाजिकता घटी,तब से धन,जन, मन,वातावरण का मूल्य घटा है। आज हम आधुनिक शिक्षित हुए अपनी मर्यादा छोड़ दी या तोड़ दी। जहाँ एक ओर … Read more

बुद्ध की खोज ही विश्व शान्ति का एकमात्र समाधान

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** आपको लगता है कि बुद्ध को राजनीति की समझ नहीं थी ? पिता शुद्धोधन के इतने प्रयास के बाद भी उनका मोह सत्ता और राजपाट से ऐसे ही छूट गया ? आपको लगता है कि बुद्ध को इतनी समझ नहीं थी जितनी मार्क्स,लेनिन,मोदी और ट्रम्प को है इस दुनिया की … Read more

भारत को दबने की जरुरत नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* इस बार ग्लासगो में होने वाला जलवायु-परिवर्तन सम्मेलन शायद क्योतो और पेरिस सम्मेलनों से ज्यादा सार्थक होगा। उन सम्मेलनों में उन राष्ट्रों ने सबसे ज्यादा डींगें हांकी थीं,जो दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी और प्रदूषण फैलाते हैं। उन्होंने न तो अपना प्रदूषण दूर करने में कोई मिसाल स्थापित की और न ही … Read more