बच्चों का सर्वांगीण विकास सही मार्गदर्शन-प्रेम से ही संभव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** परिवार यानी माता-पिता बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला है। उसमें भी ‘माँ’ की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है। अगर माता-पिता अपने बालक से प्रेम करते हैं और उसकी अभिव्यक्ति भी करते हैं,उसके प्रत्येक कार्य में रुचि लेते हैं,उसकी इच्छाओं का सम्मान करते हैं तो बालक में उत्तरदायित्व,सहयोग,सद्भावना आदि सामाजिक … Read more

भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी बलदेव बंशी

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** हिन्दी योद्धा……… भारतीय भाषाओं को उनका हक दिलाने के लिए १९८० के दशक में संघ लोक सेवा आयोग के द्वार पर वर्षों तक चलाए गए धरने के अध्यक्ष रहे बलदेव बंशी अपने संघर्ष के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। इसी संगठन से जुड़े पुष्पेन्द्र चौहान को भला कैसे भुलाया जा सकता … Read more

रूस-पाकःभारत हाशिए में

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला मास्को होकर आए हैं। कोविड के इस भयंकर माहौल में हमारे रक्षा मंत्री,विदेश मंत्री और विदेश सचिव को बार-बार रूस जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है ? ऐसे कई मुद्दे हैं,जिनकी वजह से दोनों मित्र-राष्ट्रों के बीच सतत संवाद जरूरी हो गया है। सबसे पहला … Read more

मातृभाषा के बिना व्यक्ति-राष्ट्र का समुचित विकास संभव नहीं…

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** मातृभाषा दिवस विशेष-भाग १ विश्व में संभवत: कोई ऐसा वैज्ञानिक, शिक्षाविद,दार्शनिक,चिंतक अथवा भाषाविद् नहीं होगा जिसने मनुष्य के विकास के लिए मातृभाषा के महत्व को स्वीकार न किया हो। भाषाविदों के अनुसार समाज विकसित या अविकसित हो सकते हैं लेकिन कोई भी भाषा अविकसित नहीं होती। संसार की हर भाषा में … Read more

पंजाब:चुनाव नतीजों पर किसान आंदोलन का साया!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** अमूमन किसी भी राज्य में स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव नतीजों पर देश का ध्यान तब जाता है,जब परिणाम सत्तारूढ़ दल के खिलाफ आएं। इस संदर्भ में पंजाब में हुए हालिया स्थानीय निकायों के चुनाव नतीजों को कई कोणों से देखा जा रहा है, और इसमें निहित संदेश को राष्ट्रीय कैनवास … Read more

चीनी-भारतीय सैनिक लौट रहे ?

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*********************************************** सैनिक गए नहीं थे,पर वापिस लौट रहे हैं। कभी-कभी बहुत सी चीज़ों में रहस्य छुपा रहता है,जैसे किसी से पूछो-आपने झूठ बोलना बंद कर दिया ? इसका उत्तर क्या हो सकता है ? ऐसी ही स्थिति भारत और चीन की है। यानी दोनों देशों में युद्ध नहीं हुआ, यानी कोई किसी की सीमा … Read more

निजता कानून से मिलेगी बात छिपाने की आजादी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* पिछले तीन-चार सौ साल से दुनिया में एक बड़ी लड़ाई चल रही है। उसका नाम है,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। ब्रिटेन,यूरोप,अमेरिका और भारत-जैसे कई देशों में तो यह नागरिकों को उपलब्ध हो गई है लेकिन आज भी चीन,रूस और कुछ अफ्रीकी और अरब देशों में इसके लिए लड़ाइयाँ जारी हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या … Read more

‘मुक्तिबोध’ का काव्य संसार और आलोचना के मापदण्ड

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ कार्लमार्क्स की साम्यवादी विचारधारा ही मार्क्सवादी विचारधारा कहलाई। वे एक वैज्ञानिक समाजवादी विचारक थे। वे यथार्थ पर आधारित समाजवादी विचारक के रूप में जाने जाते हैं। सामाजिक राजनीतिक दर्शन में मार्क्सवाद उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व द्वारा वर्गविहीन समाज की स्थापना के संकल्प की साम्यवादी विचारधारा है। मूलतः मार्क्सवाद उन … Read more

सामाजिक चुनौतियों का सामना किए बिना उत्थान संभव नहीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* ‘राह पथरीली बहुत थी,फिर भी हम चलते रहेमन में मंज़िल के लिए,अरमां सदा पलते रहे।’सामाजिक समस्याओं के अध्ययन में सामाजिक विचारकों का ध्यान सहज रूप से इसलिए आकर्षित होता है,क्योंकि सामाजिक समस्याएँ सामाजिक जीवन का अविभाज्य अंग हैं। मानव समाज न तो कभी सामाजिक समस्याओं से पूर्ण मुक्त रहा है,न … Read more

यह ऋतु मस्तानी

सुखवीन कंधारीनवीं मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************** ‘बसंत पंचमी’ को हिंदी के प्रसिद्ध कविवर ‘सेनापति’ की इन पंक्तियों के साथ सांझा करना चाहती हूँ-‘चहकि चकोर उठे,करि-करि जोर उठे।टेर उठी सारिका,विनोद उपजावने।चटकि गुलाब उठे,लटकि सरोज पूंज।खटकि भराल रितुराज सुनि आवे॥’भारत एक महान देश है। इसकी प्राकृतिक शोभा निराली है। पूरे संसार में छः ऋतुओं की सुंदरता संसार के किसी … Read more