भाषा पर चिन्ता प्रकट करता समाज
भाषा और संस्कृति के अंर्तसंबंधों पर भारतीय मनीषियों ने हर एक समय-काल में चिंतन किया है। उस चिंतन को अपने वक्तव्यों, विमर्शों, लेखन और संवादों द्वारा समाज तक पहुँचाने की कोशिश भी करता रहा है। अनेक समय-कालों में ये चिंतक सफल हुए हैं। हमारे समयकाल में इनकी चिंताएं समाज ने अनसुनी की हैं। भाषा के … Read more