धर्म का मर्म समझें
राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** भक्ति, शक्ति और दिखावा… ‘आनंद लूट ले बंदे, तू प्रभु की बंदगी का,न जाने छूट जाए,कब साथ जिंदगी का।’आप सोच रहे होंगे कि, यह क्या ! लिखा हुआ है ‘धर्म का मर्म’ तो क्या धर्म का यही मर्म है कि, प्रभु की बंदगी करते रहो!प्रभु की बंदगी का मतलब यह नहीं है … Read more