भारतीय भाषाएँ:कहीं देर न हो जाए!
डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** ‘हिंदी दिवस’ विशेष… हिंदी और भारतीय भाषाओं का जो हश्र आजादी के बाद हुआ, वह विचारणीय ही नहीं चिंताजनक भी है। स्वाधीनता के समय ९९ फीसदी से भी अधिक लोग मातृभाषा में पढ़ते थे और अब गाँव-गाँव तक एवं नर्सरी से ही अंग्रेजी माध्यम छा गया है। अगर हिंदी की बात … Read more