उत्तराधिकारी

डॉ.स्वाति तिवारी भोपाल(मध्यप्रदेश) ********************************************************** ”मरने के बाद कितना निर्विकार लगता है चेहरा ?” ”एकदम निर्मल पानी की तरह स्वच्छ। लगता है बस अभी उठेंगे और आवाज लगाएंगे-समर…l” जिज्जी की निर्मल आत्मा अपने भाई के निर्विकार चेहरे को पढ़ रही थी। ”हाँ,प्राणविहीन चेहरे निर्विकार ही होते हैं! विकार तो सारे जीवित अवस्था में ही फलते-फूलते हैं।” … Read more

आत्मनिर्भर

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** “उमा,कब तक दूसरों के बच्चों से खेलती रहोगी ? अब अपना भी सोचो।” पास खड़ी मिसेज शर्मा ने कहा। उमा बस-“जी चाची जी” ही कह पायी,अब कहे भी क्या ? ऐसी बातों से अब अक्सर उसे दो- चार होना ही पड़ता है। शादी के पाँच वर्ष बाद भी उसकी गोद … Read more

बहू नमक की तरह होती है..

निशा सतीशचन्द्र मिश्रा यामिनी मुंबई(महाराष्ट्र) ************************************************ मुरैना भदोही गांव की रहने वाली रेवा का इलाहाबाद के एक बड़े व्यापारी के बेटे सरजू के साथ ब्याह हुआl नए घर में बड़े ही आदर-सम्मान के साथ रेवा ने गृहप्रवेश कियाl शादी के दो-तीन साल काफी मजे और ख़ुशी के साथ निकल गए और जैसे-जैसे दिन बीतता गया,रेवा अपनी … Read more

शिकार

गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ जंगल में एक शिकारी,शिकार करने के लिए गया था। वो पूरे दिन जंगल में घूमा लेकिन उसे कुछ मिला नहीं,तो वो थक गया इसलिए एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठा। वो सोच रहा था कि काश कोई परी आ के हमें स्वर्ग में ले जाए,तो ये रोज-रोज की … Read more

पापा की तलाश

जितेन्द्र वेद  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************* मम्मी,मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी भीड़ से आमना-सामना होगा। सब तरफ लोग ही लोग। इतने लोगों के बीच पापा को ढूंढना कुछ ऐसा ही है जैसे भूसे के ढेर में से सुई का पता लगाना। फिर तकनीक के इस जमाने में चुंबक की मदद से सुई … Read more

शिक्षिका का मातृत्व रूप

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… रोज सुबह चाय का प्याला लेकर अखबार पढ़ना प्रतिभा की आदत है। आज भी रोज की तरह अखबार पढ़ने बैठी ही थी,कि दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। वह उठकर दरवाजे तक गई,तो देखा एक व्यक्ति फूलों का गुलदस्ता लिए खड़ा है। प्रतिभा को देखते ही बोला-“मैडम … Read more

किताबों की शवयात्रा

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** कई वर्षों के बाद आज मैं अपने शहर आई हुई थी। इस शहर में मेँ जन्मी,पली बढ़ी और विवाह के पश्चात दूसरे शहर चली गई। आज अपने शहर में आकर मुझे बड़ा सुकून महसूस हो रहा था। मुझे शोध के लिए कुछ किताबों की आवश्यकता थी,अतः आज सदर बाजार आई हुई … Read more

पिता

ममता बनर्जी मंजरी दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) ****************************************************************************** आज नीलकंठ बाबू का अवकाश ग्रहण करने का आखिरी दिन है। सुबह जल्दी-जल्दी नहा धोकर पूजा-पाठ निपटाने के बाद एक-एक कर अपने बीबी और बच्चों की शुभकामनाएं लेते हुए रोज की तरह आफिस की ओर रवाना हुए। दिसम्बर की कड़कती ठण्ड में एक-एक कदम भारी पड़ रहा था उन्हें,मगर बगैर … Read more

पश्चाताप-एक गलती का

विनोद वर्मा आज़ाद देपालपुर (मध्य प्रदेश)  ************************************************ हैदराबाद ट्रेनिंग के दौरान एक महिला जो मिश्रा थी बिहार से, आयु भी करीब उस समय ५९ के आसपास थी। राखी का दिन था। केन्द्रीय सांस्कृतिक स्रोत प्रशिक्षण स्थल हैदराबाद की भोजनशाला में हम सभी ६२ साथी नाश्ता कर रहे थे,तभी बैठी संगीत शिक्षिका ने कहा-“विनोद भैया,आज क्या दिन … Read more

बन्द मुट्ठी

डॉ.स्वाति तिवारी भोपाल(मध्यप्रदेश) ********************************************************** आज सुबह से ही सामने वाला दरवाजा नहीं खुला था। अखबार बाहर ही पड़ा था। ‘कहीं चाची?..नहीं,नहीं,मैं बुदबुदा उठती हूँ। एक अनजानी आशंका से मन सिहर जाता है,पर मैं इस पर विश्वास करना नहीं चाहत़ी। मन-ही-मन मैं सोचती हूँ,रात को तो बच्चों को बुला रही थीं। मन में शंका फिर जोर … Read more