तन-मन सराबोर

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘आज बिरज में होरी रे रसिया’ गले में ढोलक लटकाए हुए गुलाटी जी गुलाल उड़ाते हुए होली के खुमार में पूरी तरह डूबे हुए रमन को आवाज दे रहे थे। वह तो पहले से ही प्लेट में गुलाल और गुझिया सजा कर तैयार बैठे थे। बस शुरू हो गया ‘रंग बरसे भीगे … Read more

पिचकारी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ रंग बरसे… (होली विशेष)… सुखिया की सुबह जैसे ही आँख खुली थी, उसका पोर-पोर दर्द से दु:ख रहा था। तभी बगल में लेटे अबोध लालू ने अपनी फरियाद सुना दी थी,-“अम्मा मोहे भी पिचकारी चाही।”बेटे की आवाज सुनते ही माँ के शरीर में नयी ऊर्जा आ गई और सोचने लगी कि वह … Read more

बदनसीबी

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** हिमाचल की हसीन वादियों की एक चोटी पर नंदू का भी अपना एक छोटा-सा घर परिवार है। वह अपने परिवार के भरण पोषण के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करता है। न सुबह की परवाह, न सांझ की खबर, बस लगा रहता है। उसकी १ बेटी है और १ बेटा। बेटी का … Read more

क्या बाप का नाम जरूरी… ?

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** ऊपर की कोठरी से सिसकने के साथ-साथ बतियाने की आवाजें आ रही थी। “तुम ठीक कहती थी दादी। सच में औरत का सबसे बड़ा दुश्मन उसका शरीर होता है। अगर तो वह कुछ सुंदर हुआ, तो तब तो और भी आफत समझो।”“मैं तो तुझे कब से समझा रही थी बेटी, पर … Read more

ए.आई.

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** निर्मला अपनी सहेली से फोन पर बात करने में व्यस्त थी। “मम्मी, मम्मी मुझे इस क्वेश्चन का आंसर नहीं मिल रहा, प्लीज बता दो ना।” “सनी दिखाई नहीं दे रहा, मैं अपने फ्रेंड से बात कर रही हूँ, डिस्टर्ब मत करो। जाओ, ए.आई. से पूछो।”सनी मुँह लटकाए रूम में चला … Read more

जात-पात

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** अपनी अरुणिमा को बिखेरते हुए सूर्य देव हिमालय की पावन वादियों में पहाड़ियों के बीचों-बीच बसे इस छोटे से सुंदर एवं सुरम्य गाँव को ऐसे नहला रहे थे, कि मानो आद्या सुंदरी, परा शक्ति प्रकृति का चाकर बन कर अपनी सेवाएं नियमित दे रही हो। घाटी के इस छोटे से गाँव … Read more

चिड़ा मर गया…

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** रमा घर की दहलीज पर बैठी हुई थी और अंदर से किसी की आवाज आ रही थी, “रमा! ओ रमा! बबलू कहाँ है ?” “पता नहीं काकी। यहीं कहीं खेल रहा था।” रमा बोली।सर्दियों के दिन थे। बाहर बर्फ गिरी हुई थी। आज मौसम साफ हो गया था। बाहर बिछी बर्फ … Read more

मेरी प्यारी हिंदी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ मानसी डिग्री कॉलेज में हिंदी विषय की अध्यापिका थीं। उनकी प्रधानाध्यापिका के अथक प्रयासों से हिंदी दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी के लिए उनका विद्यालय चुना गया था। यह हमारे कॉलेज के लिए गर्व की बात थी। पूरा कॉलेज दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था। देश-विदेश से हिंदीप्रेमी, विद्वान आने वाले थे। … Read more

ठंड का हाट

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** “क्या बात है माँ साहब, आज बड़ी टेंशन में दिख रही हो ?” रविवार के हाट बाजार में पास की सब्जी की दुकान पर बैठे आदमी ने सब्जी वाली वृद्धा से पूछा।“हाँ भैया, अभी तक सब्जी की बोनी भी नहीं हुई है।”“चिंता मत करो माँ साहब, जो हमारी किस्मत में … Read more

गृह-लक्ष्मी

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** मौसम का मिजाज बदल रहा था। एक तरफ चिलचिलाती गर्मी, तो दूसरी तरफ बारिश ने अपना कब्जा जमा रखा था। रोज कमाने, रोज खाने वालों के लिए पेट पर बन आई थी। दो वक्त भोजन की जगह एक वक्त ही नशीब हो पा रहा था। ५० दिन की छुट्टियाँ खत्म हो रही … Read more