विभाजन का दर्द

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** विभाजन का दर्द वे ही समझेंगे, जिसने अपनों को वारा हैकश्मीर से कन्याकुमारी तक, भारत को सबने संवारा है मिली आजादी से देश, अब लगता कितना प्यारा है,बहती गंगा-जमुना सी नदियाँ, यहाँ की पावन धारा है लहराता है जब तिरंगा, देखो लगता कितना प्यारा है। बलिदानियों के बलिदान से, हुआ देश आजाद हमारा हैएक पल को छपक गई देशभक्तों … Read more

शीघ्र आ जाइए

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचना शिल्प-८, ८, ८,६… हर पल भारी लगे,हर साँस तुम जगे,प्रतीक्षा में बीते पल,शीघ्र आ जाइए॥ मिट जाएगा अंधेरा,होगा फिर से सवेरा,प्रतीक्षा का फल मीठा,टेर लगाइए॥ पल में उमंग जगे,हिया धड़कन लगे,प्रतीक्षा के बीच गीत,गुनगुनाइए॥ कैसे कहूँ मन बात,तड़पत दिन-रात,अगन-सी जल रही,इसे बुझाइए॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में … Read more

वो पिता की सीख

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरी असली प्रेरणा…. पिता ने इतना ही कहा— सत्य पथ कभी न छोड़ना, लाभ मिले या हानि मिले, निज धर्म नहीं तुम तोड़ना।क्षणिक सफलता के पीछे तुम मत अपने मूल्य गंवाना-चरित बचा तो जीवनभर सम्मान  रहेगा जोड़ना॥ पिता ने सिखलाया मुझको श्रम से बढ़कर है धन क्या ?कर्मठता की उजली आभा से  सुंदर जीवन क्या ?भाग्य सहारे बैठा मानव मंज़िल कभी पा सकता-पुरुषार्थों … Read more

पिता सिखाते बुद्धि-अनुबुद्धि

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** मेरी असली प्रेरणा… पिता प्रेरणा, पिता चेतना,पिता चिंतन, पिता संवेदनापिता ब्रम्हांड, पिता वंदना,पिता साध्य, पिता साधना। पिता बुद्धि, पिता सुबुद्धि,पिता शुद्धि, पिता विशुद्धिपिता संशुद्धि, पिता परिशुद्धि,पिता संबुद्धि, पिता प्रबुद्धि। पिता दूर करते सारी कुबुद्धि,पिता में अजब होती प्रतिबुद्धिपिता सिद्ध हो, पा लेते सिद्धि,पिता सिखाते बुद्धि-अनुबुद्धि। पिता प्रबोध, पिता ही … Read more

कम मत समझना पिता के संघर्ष को

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मेरी असली प्रेरणा… कम मत समझना पिता के संघर्षों को,संघर्ष से भरा सारा जीवन ही रहता,पसीने से भरा शर्ट रहता पिता का। करते रहते हमेशा अरमान पूरा हमारा,पिता होते हैं बच्चों की सारी हिम्मत,हमारी खुशी का सपना, पहचान हमारा। पिता के होंठों पर मुस्कान हो,जेब हो खाली फिर भी न कहते कभीकभी … Read more

खुशी का पता

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* मैं निकला खुशी ढूंढने,ढूंढते-ढूंढते मिला एक नेतासोंचा इसके पीछे सारी जनता,यही होंगे सच में खुशी के देवता। पर देखा गद्दी पर बैठा था उदास,माथे पे चिंता की गहरी लकीर खासपिछला चुनाव तो जीत लिया था,अगले चुनाव का डर सता रहा था। उसे छोड़कर मैं और आगे बढ़ा,देखा दूर एक अमीर … Read more

पिता का साया सही राह

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* मेरी असली प्रेरणा… पिता का साया अगर साथ हो,तो होती हर मुश्किल आसानउनकी हर एक सीख जीवन के,कदम-कदम पर आती काम।  रिश्तों की फुलवारी के, वे होते सच्चे माली हैंउनके साथ होने से ही,घर में खुशहाली होती है।   जीवन रथ के कठिन सफ़र में,थामे रहते दृढ़ लगामअपने धैर्य और अनुभव से,देते हमको सही … Read more

उजियारे की पहचान ‘पिता’

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मेरी असली प्रेरणा… दिखाते रहे जीवन-पथ पर उजियारे की पहचान पिता,भरते रहे हर कठिन घड़ी में साहस का वरदान पिता। संवारते रहे सपनों को अपने श्रम और त्याग से,सिखाते रहे आगे बढ़ना सच्चाई और अनुराग से। बनते रहे धूप में छाया, दु:ख में स्नेहिल आधार,रखते रहे हर पल मुझ पर … Read more

योग ‘कला’, प्रकृति से जुड़ें

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** योग दिवस विशेष (२१ जून)…. जब तक है ये मानव जीवन,जीवन में उलझन ही उलझन कुछ पल निकालें, योग करें,हम लाएँ जीवन में संतुलन। योग दर्शन में पतंजलि ने,महत्व और सूत्र प्रस्तुत कियामोदी जी ने राज को समझा,इसे जन-जन में विस्तृत किया। बड़े फायदे हैं योग के, इसे,लोगों ने भी स्वीकार कियाप्राचीन संस्कृति, योग कला है,प्रकृति ने अनमोल … Read more

हमारी माँ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** माँ, माँ तो होती है सर्वश्रेष्ठ रचनाकार,माँ, माँ हमारी है सर्वश्रेष्ठ सलाहकार। हमारी माँ से ही मिलता है हमें प्यार,माँ से ही मिलता है अपार स्नेह, दुलार। माँ ही उठाती नखरे हमारे दिन-रात,माँ बिना नहीं होती हमारी औकात। चोट लगे हमें दवा वो बन जाती है,रोनी सूरत देख झट समझ जाती है। … Read more