मुस्कुराती कली गुलाब की
नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)****************************** खिली कली, खिलकर हँसी,क्षण-क्षण मुस्कुराती रहीगुलाब की नन्हीं-सी कली,काँटों के बीच भी खिलती रही। हँसती रही, मुस्कुराती रही,काँटों के ऊपर रहकर भीदिखला दी जग को यह बात,हिम्मत से खिलती हर रात। मैं नन्हीं ही सही,पर हूँ किसी से कम नहींचाहे कितने भी संकट आएँ,चाहे कितने भी दर्द सताएँ। शूल चुभें राहों … Read more