कुण्डलिया
पुष्प
प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ लाली पीली बैगनी,बागों खिलते फूल।उपवन में रहते सभी,कलियाँ जाती झूल॥कलियांँ जाती झूल,प्रेम की बात बताती।अपनी खुशबू संग,बाग को वह महकाती॥रंग-बिरंगे फूल,सजे पेड़ों की डाली।मधुर-मधुर मुस्कान,बिखेरे सुंदर लाली॥ काँटे सँग रहते सदा,सुंदर-सुंदर फूल।कोमल-कोमल पंखुड़ी,नहीं चुभते शूल॥चुभे कभी नहिँ शूल,बीच रहकर मुस्काती।सदा बाँटती प्रेम,ईश चरणों में जाती॥ममता के ये फूल,हमेशा खुशियाँ … Read more
माता रानी
बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* माता रानी अंबिके,कर देना शुभ काज।आए तेरे द्वार पर,रखना सबकी लाज॥रखना सबकी लाज,शरण में आज तिहारे।देखो हाहाकार,मचा है देश हमारे॥कहे ‘विनायक’ राज,करें क्या समझ न आता।तुमसे हैं अब आस,बचा लो जग को माता॥ कहना मेरा मान लो,हे जगजननी मात।जोत जलाऊँ आपकी,नव दिन अरु नवरात॥नव दिन अरु नवरात,करूँ सेवा मैं माता।तुम … Read more
बाल श्रम रोकें
आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* रोकें मिलकर बाल श्रम,समझे मनुज सुजान।बच्चों के इस कार्य से,बाधित है उत्थान॥बाधित है उत्थान,बालपन कोमल होता।शिक्षा से रह दूर,नित्य ही सब-कुछ खोता॥धर लें उत्तम मार्ग,बढ़ें वे नित पढ़-लिखकर।होवे पूर्ण निषेध,इसे सब रोकें मिलकर॥ उत्तम जीवन हम गढ़ें,यही हमारा फर्ज।शिक्षा के शुभ मार्ग में,नाम कराये दर्ज॥नाम कराये दर्ज,बाल ही यही अधारा।जाएँ वे … Read more
गर्मी
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* दोपहरी की धूप से,बढ़ा ताप चहुँ ओर।तप्त तवे सी है धरा,पवन मचाए शोर॥पवन मचाए शोर,नहीं यह मौसम भाता।गर्मी का ये रूप,सभी को ये झुलसाता॥कहता कवि करजोरि,लगे अब रात सुनहरी।तन पर बहता स्वेद,रहे अब गरम दुपहरी॥ गरमी के इस ताप से,सूखे ताल तड़ाग।सूरज भी झुलसा रहा,बरसाता है आग॥बरसाता है आग,विकल हैं प्राणी … Read more
मजदूर
प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ मजदूरी का काम है,करते प्रतिदिन काम।बहे पसीना माथ से,मिले नहीं आराम॥मिले नहीं आराम,हाथ छाले पड़ जाते।सर्दी हो या ठंड,सभी श्रम करके खाते॥परिवारों को देख,रहे सबकी मजबूरी।कैसे हो हालात,करे फिर भी मजदूरी॥ कहते हैं मजदूर को,जग के वो भगवान।कर्म करें वो रात-दिन,बने नेक इंसान॥बने नेक इंसान,सभी के महल बनाते।करते श्रम … Read more