छायावाद के प्रखर स्तम्भ ‘जयशंकर’
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मन में दीप जलाए शंकर तम से प्रतिदिन लड़ते जाते,आशा नवसुर शब्द सजाकर, शंकर राहें गढ़ते जाते।मौन की कोख में पलती है अनकही अन्तर्मन अनुभूति-सपनों को सच करने तत्पर, पौरुष पग-पग बढ़ते जाते॥ शब्दों की शुचि गंगाजल में हिय भाव कमल खिलते जाएँ,संवेदित अंतस से गीतों मधुरिम छन्दों ढलते … Read more