एकांकी अब जीवन गाथा
डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** कहाँ गया रिश्तों से प्रेम…?… जीवन-मृत्यु के बीच ही,जूझता रहता मानव जीवनसत्य-असत्य नहीं दिखता,भटक रहा उसका अंतर्मन। धर्म सनातन भूल रहा जन,भौतिक जीवन में तर्क बढ़ाआत्मबोध का ज्ञान रहा ना,पाप-पुण्य बीच द्वंद खड़ा। जीवन पथ से भटका राही,दिशा-दशा अब बदल रहीप्यार-विश्वास खत्म हुआ सब,आसुरी प्रवृत्ति अब बढ़ रही। ये रिश्ते-नाते, प्यार मुहब्बत,अपने … Read more