प्रथम पूज्य ‘बप्पा’ की जय हो
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग मेंगजानन पधारे,विशाल या नन्हेंचतुर्थी पर,अपने रथ पर होकर सवारगाड़ी से उतरकर,हाथ में संदूक पकड़। पंडाल हुआ रौशन,मूषक राजा देख फैशनकभी बजाए बाजा,नाचे सुर-ताल पर। बच्चे-बूढ़े,खुश होकर बोलेबप्पा आए,हमारे द्वार। लाएँ खुशियों की बौछार,चरणों में उनके हम न्योछावरभक्त जन करते आरती देवा की,लिए मन में भक्ति अपार। सुबह-शाम … Read more