उफ़! ये बारिश की बूँदें…
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** उफ़! ये बारिश की बूँदें,जैसे धरती के मन की मुस्कानथके हुए पत्तों को है सींचतीं,हर जीव को देतीं नया अरमान। गिरती हैं, फिर मिट जातीं,पर हर बार नया जीवन जगातींसिखातीं कि गिरना अंत नहीं,गिरकर उठना ही सच्ची करामात है कहीं। हर बूँद कहती है धीमे सुर में-“जीवन बहाव है, रुकना नहीं।”छोटा … Read more