कितने चौराहों पर
डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ कितने चौराहों पर,दिख जाती हैंबेबस, विक्षिप्त स्त्रियाँ…गंदे, फटे लिबास में लिपटी,रहबरों की मुस्कान से चिढ़तीरोती, गाती, चिल्लाती,भूखी-प्यासी, बड़बड़ातीहाथों में दंड और गठरी में सिमटी,गिरती, रुकती, लड़ती, हँसतीयातनाओं से जूझती, मिटती,मनोरंज का साक्ष्य बनींमन को व्याकुल कर जाती हैं,बेबस, विक्षिप्त स्त्रियाँ। कितने चौराहों पर,लुट जाती हैंबेबस विक्षिप्त स्त्रियाँ…अट्टहास करता मानव उन … Read more