उड़ान…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** भौतिक जग में कब हुई, सुख से ही पहिचान। मन मेरा भरता रहा, नित-नित नवल उड़ान॥ मन रे थोड़ा रुक जरा, अपने को पहिचान। काहे को भरता सदा, इत-उत नवल उड़ान॥ आज देश को मिल गई, एक नई पहिचान। युवा मनों की हो रही, सपनों भरी उड़ान॥ दुर्बल तन नित … Read more

श्याम की दीवानी हुई

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- (रचना शिल्प: वार्णिक छंद ८८८७-३१) श्याम की दीवानी हुई, प्रेम की कहानी हुई, पैरों में घुँघरू बाँध, नाचती ही जाये है। कान्हा जाये मिल गर, फिर नहीं कोई डर, मेवाड़ की राणी मीरा, जोगन हो जाये है। बाँसुरी की धुन पे वो, बावरी-सी झूम उठे, हाथ खड़ताल लिये, साँवरा … Read more

निकाल दिया दिल से तुम्हें..

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** तेरी उस अदा का हूँ मैं आज भी दीवाना, भूल नहीं सकता तेरा वो खूबसूरत मुस्कुराना। हाँ सच में बस तुझे ही निहारना था मेरा काम, साँसें भी मैंने अपनी कर दी थी तेरे ही नाम। मैंने अपनी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत गुनाह किया था, तभी तो सौंप दी थी … Read more

दिल हमारा खो गया

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** (रचना शिल्प:बह्र/अर्कान-२१२२×३-२१२-फाइलातुन×३-फाउलुन)  हुस्न उनका चाँद से ज्यादा नशेमन हो गया। दिल हमारा याद में उनके उन्हीं पे खो गया। जब नज़र उन पे गई तोआशिकाना दिल हुआ, इश्क में डूबे सनम फिर होश मेरा तो गया। शर्बती आँखें कहें या फिर नशीली ही कहें, देख उनका जादुई लहजा असर तन … Read more

ढूँढते रह जाओगे…

रीता अरोड़ा ‘जय हिन्द हाथरसी’ दिल्ली(भारत) ************************************************************ आने वाले कुछ साल में, मिलेंगे ऐसे हाल में। हर कोई बदहाल में, तरसेंगे बोलचाल में। ढूँढते रह जाओगे…ll माँ को तरसेंगी माॅम, भारत की सारी कौम। शहर बनेंगे सभी गाँव, तरसेंगे पेड़ों की छाँवl ढूँढते रह जाओगे…ll चूल्हे पर पकी रोटी, खेलना सड़क पर गोटी। लड़की की … Read more

उड़े रंग-गुलाल

बृजेश पाण्डेय ‘विभात’ रीवा(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** उड़े हो रंग अबीर गुलाल। युवा शिशु करते वृद्ध धमालll होलिका है पावन त्यौहार। लाल भाभी के गोरे गाल। बरस रंगों की रही फुहार। भीगती चोली और रुमाल। उड़े हो रंग अबीर गुलाल…ll बहे हृदय से प्रेम की धार। विविध रंगी चुनर कर डाल। मधुर बनें घर-घर जेवनार। हुए हैं … Read more

क्या तुझे भी दीवाना याद आता है…

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************** कोई क़यामत न कोई करीना याद आता है। जब दुपट्टे से तेरा मुँह छिपाना याद आता है। एक लिहाफ में सिमटी न जाने कितनी रातें, यक ब यक दिसम्बर का महीना याद आता है। ज़ुल्फ़ की पेंचों में छिपा तेरा शफ्फाक चेहरा, किसी भँवर में पेशतर सफीना याद आता है। … Read more

फागुन आया

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** हवाओं की नरमी जब मन को गुदगुदाने लगे नई-नई कोपलें जब डालियाँ सजाने लगें, खुशनुमा माहौल लगे,मन में उठें तरंग तब समझो फागुन आया,लेकर खुशियों के रंग। खिलते टेसू पलाश मन झूमे हो के मगन पैर थिरकने लगे नाचे मन छनन-छनन, बैर-भाव भूलकर खेलें जब सभी संग तब समझो फागुन … Read more

एकता नहीं रही..

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* अब हमारे गाँव में एकता नहीं रही, इन्सानों के दिल में नेकता नहीं रहीl होलिका दहन करते थे सब साथ मिलकर, अब खर-कतवार जुटाने की चिंता नहीं रहीl जाते थे हम घर-घर जो गुलाल लेकर, अब पड़ोसियों से भी मित्रता नहीं रहीl पी के शराब बकते हैं घर में जो … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* ‘आत्मजा’ खंडकाव्य से अध्याय-६ करती माँ आगाह सदा यों, बेटी अब तू हुई सयानी रखना फूँक-फूँक पग आगे, नाजुक होती बहुत जवानी। समझ न पाती माँ की बातें, आगे कुछ भी पूछ न पाती मुँह तक आता प्रश्न किन्तु वह, लज्जा फिर आड़े आ जाती। प्रश्न-प्रश्न ही रहे सदा से, मिले … Read more