आज़ादी का मतवाला

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** आज़ादी का युवा जोश क्रांति का मतवाला भगत,बचपन से दृढ़ संकल्पित स्वाधीनता का दीवाना भगतब्रिटिश के छक्के छुड़ाता मस्ती में था सिंह भगत,‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों में गूँजता मेरा वीर भगत। दिल्ली की एसेंबली में बम धमाके कर भगत ने किया बवाल,अंग्रेजों में अफरा-तफरी, दहशत में ब्रिटिश सेना, उठे सवालमर्दों … Read more

दोष किसका ?

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियाँ थी। नरपत काका के चारों बेटे खेतों में जी-जान से जोर लगा रहे थे। उम्मीदें सबकी ये थी कि इस बार खूब फसल होनी चाहिए। फसल से जो कमाई होगी, बाबा वह जरूर हमारी शिक्षा पर खर्च करेंगे।नरपत काका अपना पेट मसोस कर बच्चों की अच्छी … Read more

बुलंद किरदार

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दानिश का जिक्र होगा तो मैं भी दबीर हूँ।आदम की ही मैं आल हूँ उसका खमीर हूँ। मैं खुद अनापरस्त भी हूँ बा उसूल भी,इज़्ज़त के मामले में बड़ी ही अमीर हूँ। सौ बंधनों में बंध के भी टूटी नहीं कभी,हक़ ही बयान करती हूँ, गो की सगीर हूँ। दुश्मन … Read more

रवि ने दिखाए ताव

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ग्रीष्म का बढ़ा प्रभाव,रवि ने दिखाए ताव,तपे वसुधा गगन,जल पान कीजिए॥ ताप का प्रकोप जारी,फैल रही महामारी,लोग सभी परेशान,सिर ढक लीजिए॥ खग मृग ढूंढें छाँव,सूने गली गली गाँव,ताल सरोवर सूखे,आश्रय भी दीजिए॥ गरम तवे सी धरा,सूखा खेत हरा भरा,आतप से बचें सभी,ठंडा रस पीजिए॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में … Read more

आओ, सनातन की ओर चलें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गहन तिमिर से नाता तोड़ें, उजियारे को अब भाएँज्ञान, चेतना, नव विवेक का, दीपक सतत् जलाएँ।यूँ ही नहीं कभी हम भटकें, अब व्यर्थ न आँख मलें,वापस लौटें फिर अब गृह को, आओ, सनातन की ओर चलें…॥ बहुत हो चुका बिन विवेक के, भूल-भुलैया में सब थे,तजकर निज संस्कार,दीन थे,ता-ता थैया में … Read more

तन-मन सराबोर

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘आज बिरज में होरी रे रसिया’ गले में ढोलक लटकाए हुए गुलाटी जी गुलाल उड़ाते हुए होली के खुमार में पूरी तरह डूबे हुए रमन को आवाज दे रहे थे। वह तो पहले से ही प्लेट में गुलाल और गुझिया सजा कर तैयार बैठे थे। बस शुरू हो गया ‘रंग बरसे भीगे … Read more

सात रंगों का त्योहार

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** रंग बरसे… (होली विशेष)… यह बेला है रंगों की,जिसमें है साथी-संगी। पकवान हैं मीठे-मीठे,जिसे खाने में सभी जुटे। त्योहार है यह बहार की,फागुन में बरसती फुहार की। लाल-हरा-पीला-गुलाबी,अनगिनत हैं कितने रंग यहाँ भी। अच्छाई की जीत का,यह अलग एक जश्न है। बुराई को है त्यागना,जिसका यह एक संदेश है। जब सात … Read more

मन मेरा सुन्दर

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** मन मेरा सुन्दर,तन कुछ समझे नामन कहे भज ले हरि,तन यहाँ मोह से परे ना। कहता मन,तन को ना देखोहै नहीं यह तेरातजना है यह सारा। मन मेरा सुन्दर,तन कुछ समझे नामन चाहे हरि शरण,तन धन का करे वरण। तन हो गया आदी,यहाँ सुख भोग कामन जानता है पूरा,यह जीवन … Read more

केसरिया रंग मोहे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* केसरिया नित मांगलिक, धर्म सनातन मान।भारत माँ परिधान यह, ध्वजा तिरंगा शान॥ केसरिया परिधान मन, मोहे प्यारे रंग।लगे प्रिया तनु चारुतम, भर दे प्रीति उमंग॥ महाशक्ति मानक सदा, स्वाभिमान ध्वज देश।सत्प्रेरक विजयी समर, केसरिया परिवेश॥ राष्ट्रधर्म प्रतिमान यह, केसरिया शुभ रंग।बजरंगी पहचान बन, भरता अंग उमंग॥ कुसुमाकर की अरुणिमा, … Read more

फागुन की बहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** फागुन की बहार आई,करके श्रृंगार आईटेसुओं के रंग की,छटा बिखेर लाई है। पवन झकोरे चलें,डालियाँ भी झूम उठींमधुबन में फिर से,बहार कोई आई है। लाल, गुलाबी, पीत,परागी, सिंदूरी रंगरंग और गुलाल की,फुहार मन भायी है। सरसों के खेत लहराए,देखो ऐसे आजपीला परिधान ओढ़,धरा मुस्कुराई है। उड़े हैं गुलाल चारों,इन्द्रधनुषीधरती से अम्बर के,मिलन … Read more