श्रमेव जयते
गोवर्धन थपलियालनई दिल्ली******************************************** श्रम आराधना विशेष… सूरज आक्रोशित हो आग बरसाता जाता है,घाम की तीव्रता चढ़ रही जन-जन प्यासा है। इस भीषण गर्मी में मानव जूझता रहता है,सुबह-सबेरे से दिन ढले कृषि श्रम करता है। तपती दोपहरी में मजदूर मजदूरी करता है,इस ज्वाला में कभी दिल नहीं पिघलता है। अजगर चाकरी करता है पंछी भी … Read more