चैत में ‘राम’ छाँव

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** राम चैत की चिलचिलाती धूप में नीम की ठंडी छाँव है,राम भरी ग्रीष्म में औघड़ पीपल पर लहलहाती पत्तियों का गाँव हैराम शिशिर की सांवली काया पर छाया फूलों का पड़ाव है,राम चम्पा की चितवन चुराती मंगल खुशबू का छिड़काव है। राम आम पर लटकती झूलती मस्तमौला अमियों की मस्ती है,राम … Read more

इरादों से ऊँची कोई चट्टान नहीं

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* चल दिए हैं नयी मंज़िल की ओर,नये सफर की ओर, नयी डगर की ओर। माना कि मंज़िल अभी दूर है,पर हौसले हों बुलंद तो कुछ भी दूर नहीं है। जब ज़हन में हो दर्द तो चीख निकलती है,इरादे हों बुलंद तो ज़हन में उमंग उठती है। रुक जाना नहीं कभी राह … Read more

स्वागत में हर्ष

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** शुक्ल पक्ष के चैत्र से आया है नववर्ष,स्वागत में हिंदू जगे दिल में लेकर हर्षनवरात्र जगदम्बे आराधना देता नव उत्कर्ष,हर घर भगवा ध्वज लगे अद्भुत ये आकर्ष। माँ शक्ति की पूजा हो कैसे, सब लें परामर्श,पूजा विधि जटिल है संत से कर लें विमर्शकन्या पूजन सार्थक है, करना इसे सहर्ष,नव … Read more

हाँ, मैं कर्ण…

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* क्षत्रिय कुल का अंश था,तेजस्वी सूर्य का वंश थासंयोग से कोख में आ गया,हाँ, मैं कुंती पुत्र कर्ण था। कुल की लाज बचाने को,पितृ का नाम छिपाने कोसूर्यपुत्र होकर भी कर्म-वश,त्यागा माता ने प्रिय पुत्र को। घुंघराले केशो के गुच्छ से,आच्छादित नयन-नक्श सेकर देती बयां यह सच्चाई,मैं था किसी क्षत्रिय-कुल से। … Read more

रणवीरों की होलियाँ

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** रंग बरसे…(होली विशेष)… रंगों की होली से ना हो चूर ऐ दुनिया,देख सरहद पर लाल-रंग कैसे बिखरा पड़ा हैजश्न-ए-रंग की खुमारी से तू बाज आ,देख! सरहद की खातिर कैसे रणवीर खड़ा है। खून की होलियाँ देखो वो कैसे खेलने चले हैं,मांग माँ की देखो खून से भरने को वो अड़े हैंभर लो … Read more

कि होली आयी रे

विजयलक्ष्मी विभा प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)************************************ रंग बरसे… (होली विशेष)… बरसे रंग गुलाल भुवन में खेलें नंद गोपालकि होली आयी रे।बारे, बूढ़े, ज्वान भुवन में, नभ तक भरें उछाल।कि होली आयी रे…॥ मार-मार पिचकारी भागेंछिप-छिप के गुब्बारे दागें,फाड़-फाड़ कर कपड़े त्यागें,दिखें सभी बेहाल भुवन में, खेलें नंद गोपाल।कि होली आयी रे…॥ कौन किसे मारे पिचकारी,कौन यार किससे है … Read more

मैं रंग जाऊँ तेरे रंग में

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मैं रंग जाऊँ तेरे रंग में फागुन रंगोली साथ में,मैं सजनी दिलबाग फाग में रंगीले हमदम हाथ में। आज हुई समरस जीवन में, आलिंगन प्रियतम साथ में,मधुशाला की नशा नशीली हाला भूलूँ ले हाथ में। खिली रोशनी नयी भोर में, इन्द्रधनुषी दीनानाथ में,केसरिया कुसमित सुरभित मन नव उमंग प्रिय … Read more

मन में नाचे मोर

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* मौसम आया आज सुहाना, अब तो छाई घटा घनघोर।वसंत ऋतु की सुंदरता से, देखो मन में नाचे मोर॥ कोपल फूटे पेड़ों पर अब, कलियों में अकुलाहट आई,फूलों ने अब ली अँगड़ाई, ऋतु बसंत की आहट आई।झूम-झूम कर भँवरे आये, बाग में बहुत मचाये शोर,मौसम आया…॥ सरसों पीले खेत हो गये, … Read more

हर रंग में कुछ बात है

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* खुशी के रंग,दु:ख के रंगप्रीत का रंग,विरह का रंग। मिलने का रंग,बिछड़ने का रंगदिन का रंग,रात का रंग। हँसी का रंग,अश्कों का रंगजीवन का रंग,संगीत का रंग। प्रकृति का रंग,मानवता का रंग।सब रंग हमारे साथ है,हर रंग में कुछ बात है॥ परिचय- शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापक (अंग्रेजी) के रूप में … Read more

तो समझो होली है…

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** रंग बरसे…(होली विशेष)…. जब उड़े रंग गुलाल, मचे धमाल तो समझो होली है,जब आए अपनों में अनुराग तो समझो होली हैजब दिखे हुड़दंगी जमात तो समझो उपद्रवी टोली है,जब हो रंगों की बरसात, तो समझो बच्चों की होली है। बने घी के सौ व्यंजन और पकवान तो समझो होली है,जहाँ … Read more