दर्द सीने में
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दर्द सीने में है जज़्बात का, कैसे रोकूं,सिलसिला है यही हर रात का, कैसे रोकूं। रोज़ आता है ख्यालों में वही चेहरा फिर,एक रेला-सा है ज़ुल्मात का, कैसे रोकूं। दिल सुलगता है मगर होंठ तो खामोश नहीं,ज़ोर मैं अपने ख्यालात का, कैसे रोकूं। हर तरफ़ बिखरी हैं महरूमी व तन्हाई … Read more