धूप और यादें
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** चैत की धूप चिलचिलाने लगी है,लू की लपटें तेज चलने लगी हैऐसे में मुझे महामार्ग के इर्द-गिर्द वाले,उन पुराने पीपलों और बरगदों की याद सताने लगी हैजो कभी महामार्ग के दोनों तट सुशोभित करते थे,उनके रहते महामार्ग का अलग मिजाज़ थालगता था यह रास्ता स्वर्ग की ओर जाता होगा,वे घने पीपल, … Read more