काश! तुम समझ सकते
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम थक कर सो गए थे न,फिर मध्य रात्रि मेंउनींदी अखियों से,क्यों झांका वॉट्सएप में!मेरा शेर, कभी मेरी कवितापढ़ने के लिए या फिर सिर्फ,ये देखने कि मैंने क्या लिखा है ? तुम जान-बूझ कर,इसका जवाब नहीं दोगेरात और सुबह तन्हा रहकर,उन पंक्तियों को दुबारा पढ़कर भीतुम खामोशी की परत चढ़ाकर,मेरी लेखनी … Read more