काश! तुम समझ सकते

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम थक कर सो गए थे न,फिर मध्य रात्रि मेंउनींदी अखियों से,क्यों झांका वॉट्सएप में!मेरा शेर, कभी मेरी कवितापढ़ने के लिए या फिर सिर्फ,ये देखने कि मैंने क्या लिखा है ? तुम जान-बूझ कर,इसका जवाब नहीं दोगेरात और सुबह तन्हा रहकर,उन पंक्तियों को दुबारा पढ़कर भीतुम खामोशी की परत चढ़ाकर,मेरी लेखनी … Read more

साहस की कहानी था ‘सिंदूर’

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. देश तभी होता सुरक्षित है,जब त्याग घर-घर जलता हैएक सैनिक सीमा पर रहता है,पीछे पिघलता पूरा परिवार है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ केवल,सीमा का अभियान नहीं थायह नारी के साहस की कहानी,मौन और गंभीर गीत था। सीमा पर जब उड़ी थी धूल,आकाश में बारूद भरा थाधरती ने सुना … Read more

अपना धर्म निभाते हैं…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. मेहनत की रोटी खाते हैं,हम पसीना खूब बहाते हैंसबका साथ निभाते हैं,हम गीत खुशी के गाते हैं‘मजदूर दिवस’ हम मनाते हैं…। मकानों की नींव हमसे है,बालू-सीमेंट के गारे हमसे हैहम ही तो ताजमहल बनाते हैं,हाथों में छाले पड़ जाते हैं‘मजदूर दिवस’ … Read more

सम्मान के अधिकारी हैं, दो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. संघर्ष रात-दिन किया, मगर वो मौन रहा,अपनी पीड़ा को कभी किसी से नहीं कहापरिवार का पालन करने को, दिन- रात काम में जुटा रहा,तपती हुई भीषण गर्मी में वो ईंट और गारा ढोता रहा। भीषण शीत-ताप सह, भवन बनाने में संलग्न … Read more

कैसा ये इंसान ?

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सिसकती मानवता,दम तोड़ती संवेदनाएंहृदय हीन मानव,इन्हें कैसे इंसान कहें ? आँखों में हवस,दिल में हैवानियतदरिंदगी का आलम,इन्हें कैसे इंसान कहें ? पहचान इंसान की इंसानियत,मानव की मानवता से,ये भी जो भूल बैठा आज,इन्हें कैसे इंसान कहें ? जानवर अवाक हैं,आँखों में प्रश्न हैं।क्या अंतर है हम दोनों में,इन्हें कैसे इंसान कहें ??

छालों की चुप्पी — सम्मान की पुकार

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. धूप जली, तन जला, फिर भी चला — वो चला,राह कठिन, पग थके, मन न डरा — वो चला। हाथों में छाले लिए, स्वप्न पाले लिए,दर्द छिपा, हँस पड़ा, अश्रु टाले लिए। ईंट पर ईंट रख, जग सँवारा सदा,खुद … Read more

नई राह दिखलाऊं

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन करता है सूरज जैसे,मैं भी प्रकाश फैलाऊंभूले भटके लोगों को,नई राह दिखलाऊं। मन करता है चाँद जैसे,मैं भी शीतलता पाऊंगुस्से पर काबू करना,सबको मैं सिखलाऊं। मन करता है बादल जैसे,मैं भी बरस जाऊंसूखी धरती पर थोड़ी,हरियाली मैं फैलाऊं। मन करता है कोयल जैसे,मैं … Read more

नारी के विविध रूप

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ममता की गोद में सपनों का संसार है,आँचल में सिमट हर जीवन का विस्तार हैथामे हुए शिशु को मुस्कानों में ढालती,वो नारी ही है जो सृष्टि का आधार है। रसोई की आँच में तपकर जो खिलती है,थाली में प्रेम सजाकर हर दिन मिलती है,अपने ही हाथों से खुशियाँ परोसती,वो … Read more

आस लगाना बेवकूफी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जगह-जगह बात बनाना भी बेवकूफी है,किसी से लगाव लगाना भी बेवकूफी है। काट-छांट हो शब्दों की अगर कहीं,ऐसे में बातचीत करना भी बेवकूफी है। जो किसी के दर्द को समझ ना सके,ऐसे रिश्तों से आस लगाना भी बेवकूफी है। जब मन हो साथ दे, जब चाहे छोड़ दे,फिर तो साथ बैठना भी … Read more

मेरी प्यारी माँ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक चिट्ठी अब, मेरी माँ के नाम,जो करती रहती, घर के पूरे काम। सुबह से लेकर, रात तक लगातार,फिर करती है, मेरी माँ तब आराम। माँ से आती है, ममता की खुशबू,मेरी माँ बस, तू ही तू होती हर सू। तेरे आँचल में है, अपना बसेरा,तेरे सिवा नहीं है, कोई अब मेरा। … Read more