बारिश केवल बूँदें नहीं

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* बारिश केवल बूँदें नहीं,जो आसमान से धरती पर टपकती है एक-एक करके,भिगो देती है धरती का आँचलदेती है नवजीवन…।  बारिश, कभी यादों की होती हैकभी भावनाओं-सी होती है और कभी कभी,मन को प्रसन्न कर शांति प्रदान करने वाला एक,एहसास होती है…।  बारिश की,कुछ बूँदें भिगोकर जाती है तन को, मन को और कुछ बुंदे यादें दिलाती है,कुछ … Read more

कैदी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** कैदी हूँ मैं कैदी,इस जग की कैदीमिला है मुझको,आजीवन कारावास सब हैं मेरे पहरेदार,मन से जा न सकूँ,मन में आ न सकूँजग में रहूँ कैद,एक कैदी जैसीजग चाहे जब तक,रखे कैद तब तकहँस न सकूँ,रो न सकूँगा न सकूँ,मन की कभीमन की कभी। कैदी हूँ मैं कैदी,हरदम रहूँ चुप-चुपसंशय में जिऊँ,रहना … Read more

भरोसा

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)********************************************** बड़े शहर की भीड़ में सावित्री नाम की एक विधवा अपने छोटे से संसार के साथ जी रही थी। उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी उसकी ११ वर्ष की बेटी रिया। दिनभर वह घर-घर जाकर बर्तन माँजती और रात को सिलाई करती। उसके हाथों की मेहनत का एक ही सपना था कि … Read more

उतरन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* उतरन के उपयोग से, घट जाती है शान।केवल मौलिक से बढ़े, मानव का नित मान॥ उतरन में है हीनता, खो जाता विश्वास।पर से हित को चाहना,है केवल आभास॥ उतरन तो अवसाद है, कभी न मिलता हर्ष।मौलिक की तू खोज कर, करके नित संघर्ष॥ उतरन से पीड़ा मिले, मौलिक से आनंद।साधो तुम … Read more

छोटे लोग, छोटी बातें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** परिवार में जब कई सदस्य हों तो काम बढ़ ही जाता है। मुझे याद है मैं, मेरा भाई, दादी और मेरे चाचा और माँ-पापा, सब मिला कर छः लोग थे। माँ को पैरों में अक्सर दर्द हो जाता, बहुत भाग-दौड़ वाला काम नहीं कर पातीं थीं। वैसे जब तक सब घर में … Read more

लगाओ वृक्ष

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** ‘पर्यावरण’हमेशा अच्छा होगा लगाओ वृक्ष। देते हैं छायाहमेशा देते फल वृक्ष हमारे। जन्म दिन में करो वृक्षारोपण अच्छी प्रेरणा। वृक्ष हमारे,है धरती की शान माने जहान। जीवनदायीधरती पर वृक्ष मित्र हमारे। वृक्ष लगाओ उनकी रक्षा करो सुखी जीवन। वृक्ष से नाता भाई जैसे रखिए मजा आयेगा। पीकर विष हमें जीवन देते वृक्ष हमेशा॥ परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ … Read more

सुकून के लिए..

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )*********************************** कहीं बूँदों की रिमझिम,कहीं ‘बरसात’ का पानी ऐसे में सोचता है ‘पागल’ मन,ठहर जाए यहीं ‘जमीं पर सुकून के लिए। यही सुखद अहसास है बरसात का,मन भी तृप्त, ‘आत्मा’ भी प्रसन्न, सुख का आगमनधरती की ‘तपन’ में जब पानी की बूँदें गिरतीं है,तो ‘मिट्टी’ की सौंधी महक जमीं पर सुकुन लिए … Read more

सेवा सदा करते रहें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** पितु-मात सम कोई नहींआशीष उनसे लीजिए,चरण रज छू करके उनकेसफल जीवन कीजिए। उनके किए उपकार काहम ऋण चुका सकते नहीं,करते हैं कितना प्यार वेवह भी बता सकते नहीं। जो हो सके उनके लिएसेवा सदा करते रहें,खुश उनको रखना आपकोतरकीब खुद चुनते रहें। ये बात बिलकुल सत्य हैजीवन अलग है आपका,समय पर मिलना-मिलानाकर्तव्य … Read more

तुझसे ही साँसें मिलीं

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)****************************************** तुझसे ही साँसें मिलीं तुझसे जीवन गीत,तुझसे ही रिश्ते जुड़े तू पावन-सी प्रीति। तेरी लोरी में बसा है सुर संगम आभास,तेरे क़दमों में बिछा हम सबका आकाश। माँ ममता की महक है, माँ है सूर्य प्रकाश,माँ हरियाली-सी लगे माँ जीवन की आस। माँ के चरणों में बसे गीता और चारों धाम,माँ का जो … Read more

परोपकार क्यों नहीं करते!

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)***************************************** स्वार्थ आज की दुनिया में सर्वोपरि हो गया है,हर मानव अपने स्वार्थ की पूर्ति में ही लगा हैकाम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर और अहंकार,ये हैं माया के रोग, मन के विकार। मन में ही ये पलते-बढ़ते रहते हैं,मानव के जीवन को दुःखों से भरते हैंमानसिक पीड़ा का यही आधार बनते … Read more