तरक्की में बाधक के लिए दंड आवश्यक

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** आज से नहीं…वर्षों से जिस दल का सबसे अधिक समय शासन रहा, उनके नेता दुबई जाते रहे हैं, लेकिन दुबई से कुछ नहीं सीखा। यदि सीख लेते तो आज भारत देश ने कितनी तरक्की कर ली होती। हमने तो एक बार जाकर यह बात महसूस की। दुबई से दूसरी फ्लाइट पकड़नी थी, … Read more

प्रेमचंद का भाषा चिन्तन:सुझावों पर ध्यान नहीं

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************** हिन्दी के योद्धा-जन्मदिन विशेष…. आज भी प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८०-८ अक्टूबर १९३६) सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले हिन्दी के लेखकों में हैं। बड़े विद्वानों के निजी पुस्तकालयों से लेकर रेलवे स्टेशनों के बुक स्टाल तक प्रेमचंद की किताबें मिल जाती है। प्रेमचंद की इस लोकप्रियता का एक कारण उनकी सहज सरल … Read more

बेतुके बोलते अ ‘धीर’ से घायल कांग्रेस

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** बिखरी, अनुशासनहीन और मनमर्जी सहित कार्यकर्ताओं से इतर ‘परिवारवाद’ से चलाई जा रही कांग्रेस में बेतुके बोलने वालों की कोई कमी अब तक नहीं हुई है, यह बात कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहकर फिर साबित की है। सत्तासीन प्रमुख दल भाजपा ने इस मामले को … Read more

परिदृश्य

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ विशाखा ऑफिस के कार्य में व्यस्त थी। इस समय उसे एक बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य करना था। वह उसी प्रोजेक्ट कमेटी की हेड थी।विशाखा हर कार्य बड़ी निपुणता से कर रही थी, ‘क्योंकि उसे हमेशा व्यवस्थित कार्य पसन्द था।उसके कार्य से उसके बॉस बहुत खुश थे, लेकिन ऑफिस के कुछ पुराने … Read more

भ्रष्टाचार का दलदल एवं कीचड़ की राजनीति

ललित गर्गदिल्ली************************************** भ्रष्टाचार के खेल ने दुनिया के सारे लोकतंत्रों को खोखला कर दिया है। भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए इसकी साफ-सफाई ज्यादा जरूरी है। इन दिनों गैर भाजपा प्रांतों में भ्रष्टाचार के मामले बड़ी संख्या में उजागर हो रहे हैं। पहले दिल्ली में आम आदमी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र … Read more

सामर्थ्य के विमर्श में मातृभाषा की भूमिका

डॉ. गिरीश्वर मिश्र, गाजियाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************* मनुष्य इस अर्थ में भाषाजीवी कहा जा सकता है कि, उसका सारा जीवन व्यापार भाषा के माध्यम से ही होता है। उसका मानस भाषा में ही बसता है और उसी से रचा जाता है। दुनिया के साथ हमारा रिश्ता भाषा की मध्यस्थता के बिना अकल्पनीय है। इसलिए भाषा सामाजिक सशक्तिकरण के … Read more

यकृत का बचाव बहुत जरुरी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* वर्ल्ड हेपेटाइटिस दिवस(२८ जुलाई) विशेष… इसके बचाव और इलाज़ में आंवला बहुत उपयोगी है, क्योंकि विटामिन ‘सी’ से भरपूर होता है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर से टॉक्सिन को हटाने में मदद करते हैं। आंवले के प्रयोग से प्रतिरोधकता बढ़े व पाचन शक्ति मजबूत हो, इसके लिए कच्चे आंवले को छोटे-छोटे … Read more

कृषि मंत्रालय में कोई भी काम हिन्दी में नहीं

शिकायत….. प्रति,सचिव,राजभाषा विभाग,भारत सरकार(नई दिल्ली) प्रति,सचिव,राजभाषा विभाग,भारत सरकार(नई दिल्ली) संदर्भ-लोक शिकायत सं.-डीओएएसी/ई/२०२०/ ३७५७७ दिनांक ३० सितंबर २०२० और अनेक अनुस्मारक। विषय-कृषि मंत्रालय में कोई भी काम हिन्दी में नहीं किया जाता है, लोक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। महोदय, मेरे जिला रायसेन के किसी भी किसान को अंग्रेजी का ज्ञान नहीं है, यह … Read more

चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* आजादी के ७५ वें साल में मैकाले की गुलामगिरी वाली शिक्षा पद्धति बदलने की शुरुआत अब मध्यप्रदेश से हो रही है। इसका श्रेय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विश्वास सारंग को है। मप्र की वर्तमान सरकार भारत की ऐसी पहली सरकार है, भारत की शिक्षा के इतिहास … Read more

राष्ट्रवाद:एक अवलोकन व विवेचना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* उपरोक्त विचारों से स्पष्ट हो जाता है कि, भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास उन परिस्थितियों में हुआ जो राष्ट्रवाद के मार्ग में सहायता प्रदान करने के स्थान पर बाधाएँ पैदा करती है। वास्तविकता यह है कि, भारतीय समाज की विभिन्नताओं में मौलिक एकता सदैव विद्यमान रही है और … Read more