सुनहरी धूप
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ****************************************** हौले-हौले गुनगुनी धूप,शरदाकुल प्यारा लगती है।करे ऊष्म जगत नित शिथिल गात्र,आलस तनु ऊर्जा भरती है। पूर्णिमा धवल महिना कार्तिक,सर्दी से धरा ठिठुरती है।सुनहरी धूप आनन्दित जग,कुसुमाकर सुरभि महकती है। गुनगुनी धूप राहत जीवन,बिन गेह वसन पथ रहती है।कम्पायमान ठिठुरती तन-मन,करुणामयी धूप सहजती है। अरुणिम प्रभात बाहर सब जन,मुस्कान किरण … Read more