हमसफ़र
शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* मन की किताब पर एकांतवास पसरा हुआ था। देवनार के वृक्ष की जड़ें चारों ओर मन की ज़मीं पर फैलीं हुई थीं। दुश्वारियों के रेले को दुनिया की भीड़ में अकेला खींचने का बरबस खेलने मैं स्वयं को उस्ताद समझ रहा था। परिपूर्णता की तलाश में स्वप्नों की राह पर अकेला … Read more