बेटियों की बात ही निराली

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** बेटियों की बात ही निराली है,ये तो लगती ही बहुत प्यारी हैं।जब हँसती हैं तो चहचाता सारा उपवन,जीवन की हर कठिनाई कोहम हँसते-हँसते सह जाते हैं,फिर भी लोग हमें अबला नारी कहते।पिता के घर की रौनक हैं हम,तो पति के घर का सम्मान हैंदो-दो घरों को सजाती हैं,वंश बेल को बढ़ाती हैं।हम … Read more

चंदा तू है बड़ा अनोखा

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* नीला आकाश है आलोकित,चाँदनी संग देखो चाँद आयाऐ चंदा तू है बड़ा अनोखा,लेकर आए हो प्रिय आभास। कभी पीड़ाओं को बाँटें,तुझ संग औ ख़ुशी आसभीगता तन-मन जगाते तुम,सुख का वो अहसास। जन्म लिया तब से देखा,नानी-दादी का हुलासतुझे देख बच्चे पुलकित,किलकारी होती ख़ास। प्रीत राग के छंद जगते,पिया दर्शन सुखमय … Read more

‘संकेत’ में गहरा संदेश देती हैं ‘पोटली’ की लघु कथाएं- सतीश राठी

इंदौर (मप्र)। लघु कथा बहुत कठिन विधा है,इसका निर्वहन करना आसान नहीं। लघुकथा संग्रह ‘पोटली’ की लघुकथाएं बहुत समृद्ध हैं। आने वाली पीढ़ी में जीवन मूल्यों के बीज बोने वाली यह लघु कथाएं संकेत में ही गहरा संदेश देती हैं। पोटली को पाठकों द्वारा अनिवार्यत: पढ़ा जाना चाहिए।लघुकथा के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ लेखक सतीश राठी … Read more

भूल जाऊं कैसे प्रियतम!

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मेरे मन के गलियारे मेंविचरण करते रहते हरदम,तुम्हें भूल जाऊं कैसे प्रियतम ?मैं दूर जाऊं कैसे प्रियतम ? विरह-वीथिका में साजन,स्मृति बनके जाते हो बिखरधूमिल जीवन के पन्नों में,बनके अक्षर आते हो उभर।जीवन बगिया में महके हो,धरती अंबर तक छाए तुम।तुम्हें भूल जाऊं… तुम दीप हो मेरे जीवन का,जलता है और कभी … Read more

प्रयास

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचना शिल्प: सगण + लघु ११२-११२-११२-११२, ११२-११२-११२-११२-१…. नित कर्म करो कुछ राह चुनो,खुश हो नव उज्ज्वल काम करो न।भर लो मन में कर काम सदा,तुम भी अपना सब काज करो न।रख लो कुछ जोश भरो मन में,मन में न प्रयास कभी कम हो न।सत् के पथ नित्य बढ़ो खुश हो,जग में … Read more

मोहित स्वयं है विराग

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ जागा री सखि अनुराग।जीवन की नदिया सींचे बह-बह के,यौवन की बगिया सावन-सी लहके।सपनों की कलियों के चिटके वदन से-फूटा सुनहला पराग। अँखियों की कोर आज झांके मन पपिया,ढूंढे क्षितिजवा के छोर रंग रसिया।सुख की अँधियारी दरारों के भीतर,उजला प्रभाती चिराग। खुशियों के मोर नचे मानस कगारे,आशा के छोड़ रही पावस फव्वारे।साँसों की झोंकों … Read more

गाँवों का खलिहान रो रहा

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** उत्तम खेती वाला देखो,भारत में वरदान रो रहा,व्यापारी के भुज पाशों में,गाँवों का खलिहान रो रहा। कृषक रंग पड़ा है पीला,नेता के गालों पर लाली,कृषक सूना आँगन देखो,लाला के घर में हरियालीमंडी का सौदागर हँसता,खेती का बलिदान रो रहा,उत्तम खेती वाला देखो,भारत में वरदान रो रहा। जब से भारत मुक्त हुआ … Read more

वीर रानी

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* लक्ष्मी बाई जयंती विशेष….. शत-शत नमन है आपको हे राजकुमारी लक्ष्मीबाई,अपने बल शक्ति से दुश्मनों का कलेजा था थर्राई। बाबा की प्यारी मन्नू झांसी की कुलवधू वन्दना है आपकी,हर एक भारतवासी नमन करता है,पूजा करते हैं आज आपकी। नहीं कच्चे-पक्के खेल-खिलौने से,कभी खेली थी,खेली तलवार,भाला,बरछा से,वही आपकी सहेली थी। गुण गाती … Read more

जाने दुआ कब काम आ जाए

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* एक दिन तो सबको ही जाना है,छूट जायेगा यहीं पर सारा ताना-बाना है।अमर नहीं जीवन,बस करो कर्म अच्छे-गिनती की साँसें,गिनती का ठिकाना है॥ जब आता बुलावा,चलता नहीं बहाना है,इस सृष्टि का यह सच यही फसाना है।इसलिए कहते कि,करो कुछ उपकार भी-प्रभु के पास जाकर,वह हिसाब दिखाना है॥ गिने हुए श्वांस का ही,यह … Read more

थी असली वीरांगना

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** थी वो असली वीरांगना,नाम था जिसका लक्ष्मीबाई,शत-शत नमन आज भी आपको हे रानी लक्ष्मीबाई। चीरा था अपने शौर्य से जिसने दुश्मनों का कलेजा,नाम था लक्ष्मीबाई,बाबा की प्यारी मन्नू ने था घर-प्रांत सब सहेजा,नाम था लक्ष्मीबाई। बनी झांसी की कुलवधू,देख वक्त थाम ली तलवार, नाम था लक्ष्मीबाई,वन्दन है आपको,होती आज भी जय-जयकार,नाम था … Read more