वाणी वीणा की
दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** टूटा कभी,जब वाणी का तार।लेकर जा पहुंचा,मैं टूटी सितार।साज-सितार काया संगीत का वह।खोल कर बैठा,जो वीणा तार-तार।कुछ कही-अनकही,बातें थी मेरी।कुछ रटी-रटाई,बातें थी उसकी।एक की तीन और,तीन की पांच।ना जाने,कितना झूठ उड़ाताया जाने थी,बातों में सांच की आंच।सोचूं कि समझूँ,समझूँ तो जानूं।बातों ही बातों में,जो वो कहे वही मानूं।शक-शुभाहकि क्या … Read more