अपने-पराए
संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** मिले जब गैरों से प्यार,और अपने समझे बेकारतो ऐसी स्थिति में हम,किसे अपना समझें ?जब अपने ही अपनों को,लूटे जा रहे होंऔर फिर भी एहसानवो जताये जा रहे हों,तो ऐसों को अपना कहनाबड़ी भूल ही होगी। पराए तो पराए हैं,फिर भी इंसानियत दिखाते हैंपर अपने सदा अपनों को,बड़े ही प्यार से डसते … Read more