प्रकाशोत्सव पर्व

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************* दीप जलाएँ आज हम,पावन पर्व प्रकाश।ननकाना पावन धरा,नानक ज्ञानाकाश॥ कहूँ सन्त,फक्कड़ पथिक,दीन दुखी सरताज।अवतारी मानव जगत,प्रीति नीति आवाज़॥ संन्यासी निर्मोह जग,कर कुटुम्ब परित्याग।विविध रूप अनुभूत जन,नानक गुरु अनुराग॥ अवसीदित जनत्रासदी,व्याकुल नानक चित्त।लोभ स्वार्थ मिथ्या कपट,यवनत्रास आवृत्त॥ देख धर्म की हानि जब,मानवता का ह्रास।विकल हृदय नानक चला,बना प्रकाश नवास॥ उद्दोलक … Read more

विकास की रीढ़ महिला

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** विकास की रीढ़ है महिला,प्रगति की राह है महिलाआर्थिक विकास की धुरी है महिला,फिर इतनी तकरार क्यों,होता इतना अत्याचार क्यों ?यह हमें समझना होगा,उत्तम राह बनानी होगीसशक्तिकरण पर बात अब जरूरी है,उन्नत भाव संग उद्यम खूब जरूरी है।सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक और फिर,सांस्कृतिक सहभागिताएक सुन्दर अपूर्व शुरुआत है,उन्नति प्रगति और विकास यात्रा मेंमहिला सशक्तिकरण का अब,दिखता जरूरी … Read more

तुम भी भाग चले

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ आँसुओं! तुम कैसे निकले!आई व्यथा बसी अन्तर में,भगदड़ मची हृदय मेंभागे अन्तरवासी ऐसे,जैसे जीव प्रलय मेंओह! सभी उर के शुभ चिन्तक,साथी गये छले। भाग गया विश्वास अधम वह,भागी आशा चंचलभागा प्रिय आनन्द अगोचर,भागा सब सुख निर्बलतज सब अपना चले निकेतन,जिसमें रहे पले। जब इस जीवन में मधु ऋतु थी,तुम भी थे मानस मेंतब … Read more

समाधान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* उलझन को सुलझाइए,लेकर सुलझे भाव।जिसके सँग है सादगी,रखता प्रखर प्रभाव॥ उलझन है मन की दशा,नहीं समस्या मान।यह है दुर्बलता-दशा,आज हक़ीक़त जान॥ मन को रख तू नित प्रबल,उलझन होगी दूर।जो रखता ईमान वह,नहीं खो सके नूर॥ उलझन उसको ही डसे,जो सच में डरपोक।कौन लगा सकता यहाँ,साहस पर तो रोक॥ उलझन को … Read more

मेहनत व्यर्थ नहीं जाती

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** बहुत बहक लिया किस्मत से,मेहनत भी करके देख,हार मान कर क्यूं बैठा है,कठिनाइयों से लड़ के देखहिना रंग खूब बिखेरती,जितना घिसती है पत्थर पर,यही जज्बा मेहनत का तू,खुद के दिल में भरकर देख। राह के बड़े प्रस्तरों को,बहती जल धार ने बहा दिया,छोटे पंखों से उड़ता रहा,उस पंछी ने नभ को … Read more

स्वर्ग का कोना

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* कोना-कोना स्वर्ग हो,करना ऐसा काम।हरियाली चहुँओर हो,महके सुमन तमाम॥महके सुमन तमाम,सुगन्धित हो जग सारा।सबसे सुन्दर देश,बने यह भारत प्यारा॥कहे ‘विनायक राज’,बीज तुम ऐसा बोना।सबके दिल में प्यार,बसे महके हर कोना॥

बैसाखी

मधु मिश्रानुआपाड़ा(ओडिशा)******************************** “अब खा भी लो सुलभा,कल से तुमने कुछ भी नहीं खाया है.. तुम्हें इस तरह ख़ामोश देखकर मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता..क्या हुआ कल वेद का कॉल नहीं आया तो… आज आ जाएगा…! हो सकता है उसे ऑफ़िस में काम ज़्यादा होने के कारण समय ही न मिला हो… पर तुम हो … Read more

बेटियों की बात ही निराली

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** बेटियों की बात ही निराली है,ये तो लगती ही बहुत प्यारी हैं।जब हँसती हैं तो चहचाता सारा उपवन,जीवन की हर कठिनाई कोहम हँसते-हँसते सह जाते हैं,फिर भी लोग हमें अबला नारी कहते।पिता के घर की रौनक हैं हम,तो पति के घर का सम्मान हैंदो-दो घरों को सजाती हैं,वंश बेल को बढ़ाती हैं।हम … Read more

चंदा तू है बड़ा अनोखा

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* नीला आकाश है आलोकित,चाँदनी संग देखो चाँद आयाऐ चंदा तू है बड़ा अनोखा,लेकर आए हो प्रिय आभास। कभी पीड़ाओं को बाँटें,तुझ संग औ ख़ुशी आसभीगता तन-मन जगाते तुम,सुख का वो अहसास। जन्म लिया तब से देखा,नानी-दादी का हुलासतुझे देख बच्चे पुलकित,किलकारी होती ख़ास। प्रीत राग के छंद जगते,पिया दर्शन सुखमय … Read more

‘संकेत’ में गहरा संदेश देती हैं ‘पोटली’ की लघु कथाएं- सतीश राठी

इंदौर (मप्र)। लघु कथा बहुत कठिन विधा है,इसका निर्वहन करना आसान नहीं। लघुकथा संग्रह ‘पोटली’ की लघुकथाएं बहुत समृद्ध हैं। आने वाली पीढ़ी में जीवन मूल्यों के बीज बोने वाली यह लघु कथाएं संकेत में ही गहरा संदेश देती हैं। पोटली को पाठकों द्वारा अनिवार्यत: पढ़ा जाना चाहिए।लघुकथा के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ लेखक सतीश राठी … Read more