क्या लिखूँ…?

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** वो कहती हैं मुझसे हमेशा,कुछ अलग-सा गीत लिखोखुशियों के सुरीले बोल लिए,मीठे-मीठे से गीत लिखो।कोयल-सी मीठी हो जो ऐसी,मधुर-मधुर-सा संगीत लिखोखिल जाए उपवन की कलियां,ऐसा सुन्दर-सा गीत चुनो।रंगों की सतरंगी रंगों वाली,हो जाए ऐसी बरसात लिखोइन्द्रधनुष रंगों-सा सुन्दर,मधुरिम मधुर गीत चुनो।राहों के कंटक-वंटक छोड़ो,फूलों की सुन्दरता को देखोछोड़ो दु:ख के राग कष्टदायी,कोई सुखद-सा … Read more

आत्मा के परमात्मा से मिलन का भक्ति पर्व ‘महारास’

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** शरद पूर्णिमा विशेष… भगवान कृष्ण के महारास को समझने के लिए विवेक पूर्ण विवेचन की अत्यंत आवश्यकता है। ‘रास’ शब्द संस्कृत के ‘रस’ से उत्तपन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-निचोड़,तत्व-अर्क,आनन्द। काव्य में जो आनन्द आता है,वह ही काव्य का रस है। काव्य में आने वाला आनन्द अर्थात् रस सामान्यतः लौकिक ही … Read more

माँ तुम फिर आना

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** नवरात्र विशेष…. सूनी-सूनी गलियाँ हो गईं,सूना हो गया घर आँगन,ढूंढ रही आँखें माता को,बुझा-बुझा सा है ये मन। सूनी पड़ी माता की चौकी निःशब्द हो गए भजन,खाली थाल आरती का,खाली हल्दी कुंकुम चंदन। सुबह भी सूनी-दोपहर सूनी हुई,सूनी शाम मद्धम,मौन किया धारण रातों ने,छाया सन्नाटा और तम। अब कहीं न … Read more

द्वैष नहीं पलने देना

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* हृदय भाव में द्वेष नहीं पलने देना।झूठ कपट अरु स्वार्थ नहीं भरने देना॥ मानवता की राह सदा चलना हमको,सत्य पथिक बन साँचे में ढलना हमको।लोभ मोह में व्यर्थ नहीं जलने देना,हृदय भाव में द्वेष नहीं पलने देना…॥ समता का ही पथ हमको निज अपनाना,मृदुभाषी का श्रेय हमें है नित पाना।कपट पूर्ण … Read more

बहे निर्मल गंगा

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** निर्मल गंगा नीर से,मिटे सकल संताप।पापनाशिनी सुरसरी,रक्षा करना आप॥रक्षा करना आप,मैल को दूर हटाना।रहे प्रदूषण मुक्त,सभी को है समझाना॥कहे ‘विनायक राज’,बहे नित गंगा कलकल।इसका रहे खयाल,सदा पावन हो निर्मल॥

मित्रता

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** यह ज़िन्दगी की एक सबसे बड़ी तासीर है,जिंदगी में सब-कुछ पा लेने की तस्वीर है। मित्रता खुशी देने वाले यौवन की सौगात है,इसके बिना जिंदगी में सब-कुछ बकवास है। सुख-दुख के साथ दिव्य ज्योति-सा यह एक दर्पण है,जीवन में खुशी पाने का यह एक भव्य आकर्षण है। मित्र है साथ तो जंग में जीत … Read more

प्रिये मांगे रंग चुनरिया

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** प्रिये मांगे रंग चुनरियामैं बेरंग-सा आप,मैल छुड़ाऊं तन अपनाऔर तन पर रगड़ूं राख। रुह फ़कीरों-सी अपनीसमझूं,न मंदिर,न जाप,कहां से दूं तुझे अटरियाहो बेखूंटा भटकूं आप। महल-चौबारे ख्वाब तेरेधूना,हाथ मेरे हैं ख़ाक,खुद से खुद झगड़ा मेरारंग मानो जीवन है श्राप। रंग-रंगीली,तू छबीलीभाए कान्हा बांसुरी वाद,जीवन मेरा डमरू जैसादोनों ओर से पड़ती थाप। ढूंढ … Read more

कन्या पूजन श्रेष्ठतर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************* दुराचार या भ्रूण पतन जग,नीच सोच मनरोग समझ लोकन्या पूजन सदा श्रेष्ठतर,श्रद्धा ममता योग समझ लो। शक्ति भक्ति सह प्रीति सदय,करुणा मर्म अपार समझ लोनवदुर्गे जगदम्बे जननी,कन्या बन अवतार समझ लो। महाशक्ति निर्भय सबल जग,सारस्वत कुलगान समझ लोलाज नेह सरला सहजा हिय,वधू मातु वरदान समझ लो। रिद्धि-सिद्धि जननी तनया … Read more

धरती

मदन गोपाल शाक्य ‘प्रकाश’फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)************************************** जयति जननी स्वरूपिणीं,जय हे धरा धरणीं रूपिणी। जगत रक्षिका जगदीश्वरी,रत्नगर्भा,दाती-ए-भूमेश्वरी। अन्नदायक हो जीव रक्षक,साहक सर्वत्र जग संरक्षक। जय अपारणीं जगत्तारिणीं,जग आधारणीं भार धारणीं। जन्नति प्राणियों के लिए जो,उन्नति प्राणियों के लिए जो। पालन करे है सृष्टि मात्र का,खेल है अलौकिक सृष्टि का। आदि जो है धरा कल्याणीं,भार स्वरूपा जग … Read more

भारत की तरफ से ठोस पहल हो

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने अलग-अलग मौकों पर अफगानिस्तान के बारे में जो भी कहा है,वह शत-प्रतिशत सही है लेकिन आश्चर्य है कि भारत की तरफ से कोई ठोस पहल क्यों नहीं है ? २० प्रमुख देशों के जी-२० सम्मेलन में दिया गया नरेंद्र मोदी का भाषण अफगानिस्तान की … Read more