हम जिएँ यहाँ कुछ इस तरहा

गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’बारां (राजस्थान)******************************** हम जिएँ यहाँ कुछ इस तरहा,सबको खुशी हमसे मिले,किसी चेहरे पर नहीं हो उदासी,रौनक हर चेहरे पर मिले॥ आपस में हम नहीं लड़ें,नहीं बांटे हम यह जमीं,मिलता नहीं है इससे कुछ,बन जाते हैं दुश्मन सभी।हम जीएँ और जीने दें सबको,अमन यहाँ हर जगहा मिले,हम जिएँ यहाँ कुछ इस…॥ ना कोई दुःखी … Read more

भगवान तुम हो

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** ओ पापा-मम्मी,तुम ही सजाना,पक्के से पक्का,मुझको बनानामुझको तुम ही जीना सिखाना। भगवान तुम हो,मै हूँ पुजारी,ये जिन्दगी है देन तुम्हारीफूलों जैसी तुम महकाना। दुनिया हमारी,जीवन हमारा,फिर क्यूं न इसको हम ही सँवारेंइक गुलशन-सा इसे निखारें। तुम पाठशाला,तुम विद्या मंदिर,है कौन जग में तुमसे भी सुन्दरऐसी रहे हर सोच ही … Read more

समझदारी से काम लें,हृदय की देखभाल करें

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** यह मानव शरीर परमपिता परमेश्वर की अनमोल संरचना है। इसका मूल्य आप आँक ही नहीं सकते। सभी जानते हैं कि,जब इन्सान माँ के पेट में होता है,तभी से हृदय धड़कना शुरू कर देता है और इंसान की मृत्यु होने पर ही इसकी धड़कन बंद होती है।हम थकावट होने पर आराम करते … Read more

हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उभारने का प्रथम श्रेय शास्त्री जी को

नकुल त्यागीमुरादाबाद(उप्र)********************************** विशेष श्रृंखला:भारत-भाषा सेनानी….. आर्य समाज के प्रसिद्ध नेता,संसद में हिन्दी के ओजस्वी वक्ता,हिंदी एवं संस्कृत के प्रकांड विद्वान पूर्व सांसद स्व. प्रकाशवीर शास्त्री का जन्म ३० दिसंबर १९२३ को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रेहरा गाँव में हुआ था। आगरा विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद गुरुकुल वृन्दावन के उप कुलपति नियुक्त किए … Read more

हैं अंज़ाम तस्वीरें

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली****************************************** विवश करती हुई यादों की हैं अंज़ाम तस्वीरें।बिख़रते से ख़यालातों की हैं अंज़ाम तस्वीरें। फ़साने बन ही जाते हैं सफ़र हो मुख़्तसर फिर भी,तेरी क़ुर्बत के अफ़सानों की हैं अंज़ाम तस्वीरें। कहाँ तक ज़ज्ब कर पाता मैं हूँ हालात का मारा,अधूरी अनकही बातों की हैं अंज़ाम तस्वीरें। मुझे मालूम था अंज़ाम पर रोका … Read more

गुनगुनी धूप-सी खुशियाँ

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** सुबह की गुनगुनी धूप-सी,खुशियाँदेती है दस्तक,कभी-कभी हमेंक्यों नहीं रुक जाता ये पल,सदा के लिएयही कहीं,हमारे आस-पास। चंद लम्हों का ये जीवन,कुछ जिम्मेदारियाँतो कुछ अवसर,अक्सर खो जातेबातों-बातों में,आओ रोक लें इन पलों कोयही कहीं,हमारे आस-पास। जो न हो अपनों का साथ,कैसे कटे जीवनजी लें इन पलों को भरपूर,जितने भी पल हों पासफिर … Read more

समाज और गुलामी

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** मानवता का पाठ पढ़कर,मानव धर्म निभाएंगेएक सभ्य समाज का,निर्माण हम सब करकेलोगों के दिलों में स्नेह,प्यार को जिंदा रखेंगेऔर इंसानों को इंसानियत,हम सब सिखा देंगे। बिखरा हुआ संगठन कभी भी,समाज को मजबूती नहीं दे सकतालाखों लोग होते हुए भी इन पर,हुकूमत कोई और करता है।और अपनी खुद की कमी का,एहसास खुद को … Read more

कविता मनभावन

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* ये कविता लगती मनभावन,गागर सागर से भर जाये। भाव भरो मन में अति पावन,मान बढ़े यह ज्ञान सिखाये। जीवन की सरिता बहती नित,कोमल से मधु गीत सुनाये। लेखन की यह रीत निरापद,काव्य विधा सुर-साज सजाये। मोहन तो मन में बसते अब,वो सखियां मिल रास रचाये। गान सदा करते कविता नित,प्रेम बसे सजना … Read more

साहित्य की पुष्टि के लिए च्यवनप्राश है ‘माधवी’ उपन्यास

लोकार्पण…. इंदौर(मप्र)। जैसे मनुष्य का शरीर होता है, ठीक वैसा ही शरीर साहित्य का होता है। पूरे शरीर का पुष्ट होना साहित्य के लिए भी उतना ही ज़रूरी है,जितना ये शरीर के लिए है। मुझे लगता है कि,साहित्य की पुष्टि के लिए च्यवनप्राश का कार्य करने वाला ये ‘माधवी’ उपन्यास है। इस प्रकार का आदर्श … Read more

ख्वाहिश जब पलकों में…

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)****************************************** रिमझिम बारिश की फुहार में-कड़क ठंड की लहरों में,याद आया तुझे यार-होंगे हम दोनों गुँजनों में गुलजार! व्यस्तता के बाज़ार में-गए थे तुझे मिलने यार,भीड़ से घिरे हो तुम-चारों ओर तेरी जय-जयकार! कितनी ऊँचाई में हो तुम-दूर से देता है दिखाई,जयकारे के शोर में-कहां होगी मेरी सुनवाई! तेरी नजरें कैसे पड़ेगी … Read more