जिंदगी की जंग

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** मंजिल उस पार है जंग इक उधार है,डरना ही तो हार है जितना जहान है। कामयाबी लेने चले दिलदार दिलजले,मुसीबत मिल गले,आसमां मचान है। रास्तों की ज़द्दोज़हद,करती जिंदगी हद,हौसलें ले के महज साँसों की उड़ान है। दिल में भर ले जोश,गुनाह से पर्दापोश,जाग रूह रख होश,नेकी की कमान है। ज़ायका अजीब बड़ी,पेट … Read more

प्रणाम करूँ

आदर्श पाण्डेयमुम्बई (महाराष्ट्र)******************************** जग को मैं प्रणाम करूँ,युद्ध को मैं विराम करूँ। सरल स्वभाव से उत्तम जीवन,मानव के साथ जीऊँ। सरल शब्द को मैं शहद बनाऊँ,कठोर शब्द का मैं रस बनाऊँ। देशद्रोही,मानव विद्रोही का,मैं तलवार से तिरस्कार करूँ। देश सुरक्षा हित में जो खड़े हैं वीर,उनका मैं देवता-सा अभिवादन करूँ॥

बर्फीला सौंदर्य…

एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** बर्फीले पहाड़ों पर ही,सौंदर्य बिखरा पड़ा हैऊंची चोटियों पर यह,गर्व से उन्नत खड़ा है। चारों ओर सफेदी की,श्वेत धवल चाँदनी हैमानो भूगर्भ जलस्तर,की पिघली चाशनी है। सूरज की किरणों ने,स्वर्ण चादर ओढ़ी हैबर्फीले तूफानों से ही,सर्द हवाएं निगोड़ी है रात मद्धिम रोशनी में,ये बर्फीली सिलवटें हैप्रकृति की सुंदरता में,ये सजीली करवटें है। बर्फीले … Read more

नई राह दिखाते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** कल्पनाओं के हम उड़नखटोले,शब्दों के विशाल नीलाभ बनातेअन्तस्तल अनुभूति निनाद भाव को,चासनी नवरस सुन्दर काव्य बनाते। देश काल परिधि और पात्र विघटित,बन दर्पण सामाजिक दृश्य सजातेसार्वजनिक घटी गतिविधियाँ समेट,युगों नवागत नई राह दिखाते। रच लेख मनोहर ललित कलित चारु,शौर्य,शील,त्याग संंबल यश गातेगुणातीत प्रकृति वर्णिता धरा विशद,ममता स्नेह दया रस … Read more

हमारी प्यारी हिंदी की वैश्विक चमक

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  ***************************************** ‘विश्व हिंदी दिवस’ विशेष….. एक भाषा के रूप में हिंदी हमारी पहचान है। हमारे जीवन मूल्यों,संस्कृति-संस्कार की संप्रेषक व परिचायक है। हिंदी विश्व की सहज सरल वैज्ञानिक भाषा है। हिंदी अधिक बोले जाने वाली,ज्ञानदायक, प्राचीन सभ्यता-आधुनिक प्रगति के बीच सेतु है।वंदेमातरम की शान है। हिंदी,देश का मान है,हिंदी संविधान का गौरव,भारत … Read more

बेटी-इक मूरत

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** बेटी तुम घर मंदिर की इक मूरत हो,तुम्हीं जगत में धरती माँ की सूरत हो।तुम्ही धरा पर शक्ति सृजन की उत्सृजक-तुम्हीं सृष्टि में सृजन प्रेम की मूरत हो॥ बेटी ही जग की पावन उपहार है,बेटी ही माँ बन देती सब प्यार है।बेटी घर की दीप उसी से ज्योति है-उसी ज्योति में … Read more

माँ तू कैसे छली गई!

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** कहाँ गए वो लाल तेरे माँ,कोख में जिनको बड़ा कियाआज उन्होंने लाकर तुझको,किस मोड़ पर खड़ा किया। जिस संतान पर वारा जीवन,वही छोड़कर चली गईअपने कलेजे के टुकड़ों से,माँ तू कैसे छली गई। संतानों की तकलीफों पर,तू कैसे रोया करती थीजब सो जाते थे लाल तेरे,बस तभी तू सोया करती … Read more

श्रम को अपना लो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* पाते हैं नववर्ष तब,खोते जब इक साल।आशा लेकर आ गया,आज नया इक काल॥आज नया इक काल,बंधु उम्मीदें पा लो।भाग्य-भरोसा छोड़,आज श्रम को अपना लो॥जिनके कर्मठ हाथ,वही बढ़ते जाते हैं।धुन है जिनके साथ,वही मंज़िल पाते हैं॥ परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL … Read more

मेरा बसन्त…तुमसे

देवश्री गोयलजगदलपुर-बस्तर(छग)********************************************** मेरा बसन्त…तुमसे शुरू…,तुम्हीं में अंत…मन में हो जब…,रीत पतझड़ की…कैसे लिखूं…,तुम्हें बसन्त…! दिन गाये…राग फागुनी…,रात कनक…मंजरी चटके…,झर-झर…जूही,चाँदनी…,तन-मन में…हैं झरते…! प्रणय पर्व की…बेला मधुबनी…,ऋतुओं का…मधुमास सजे…,अवनि से…अम्बर तक देखो…,अमराई की…कलश सजे…! दहके पलाश सिंदूरी…मलय बहे…,मनभावनी…मोर पपीहा…,कोयल कूके…चंद्र किरणों की…,सेज सजाए…ऋतु बनी है…,आज सुहागिनी…! ऐसे में तुम…आओ भर दो…,खुशियों से मेरा मन…रात चम्पई…,दिन सुनहरी…प्रीत का … Read more

आह्वान:वीर सेनानियों का

शकुन्तला बहादुर कैलिफ़ोर्निया(अमेरिका) **************************************** देश के सपूतों! शूरवीर सैनिकों!!साहसी सेनानियों! कर्मवीर बन्धुओं!!माँ तुम्हें पुकारती,माँ तुम्हें पुकारती॥ आज तुम आतंकियों को,और देशद्रोहियों को,आक्रमणकारियों को,आस्तीन के सर्पों को।चिरनिद्रा में सुला दो,भारत-माँ से उऋण हो जाओ।माँ तुम्हें पुकारती…॥ आओ तिलक भाल पर कर दूँ,प्रहरी बन सीमा पर जाओ।शत्रु पराजित करो और तुम,विजयी होकर वापस आओदेश का मान बढ़ाओ।माँ तुम्हें … Read more