चेतनाओं को विकसित करने वाला पर्व ‘संक्रांति’

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** जीवन के रंग (मकर संक्रांति विशेष)…. मकर संक्रांति भारतवर्ष का एक ऐसा बड़ा प्रसिद्ध त्यौहार है,जो अलग-अलग राज्य में भिन्न-भिन्न नामों से जाना ही नहीं जाता है, बल्कि कई तरीक़ों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है तो तमिलनाडु में पोंगल नाम है,जबकि गुजरात में … Read more

आओ थोड़ा मुस्कुरा लो

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** बहुत हुई भाग-दौड़,बहुत हुई आपाधापीभीड़ में थोड़ा खुद को अलग कर लो,आओ थोड़ा मुस्कुरा लो। खुशी अपनी,निर्भरता क्यों दूसरे पर,ढूंढो न इसे चहुँओरये तो पास हमारे,जब जी चाहे आजमा लो।आओ थोड़ा मुस्कुरा लो… कभी धूप कभी छाँव,बहुत खूबसूरत जीवन नावहवा का रुख जिस ओर भी हो,हँसकर जीवन नैया पार कर लो।आओ … Read more

युवा

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** युवा युग में युवा बनकर,रहना जरूरी हैराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए,जबरदस्त पहलअब हमें करनी,बन गई मजबूरी है। युवा युग शक्ति है,उर्जा का स्त्रोत हैदेश की प्रगति का,सर्वोत्तम सुलभप्रमाणित व सम्बल,रक्त गोत्र है। युवा युग में,प्रगति पथ पर आगेबढ़ने की गति मिलेगी,देश में सर्वत्र स्वीकार्यनेतृत्व को हरपल,सहर्ष स्वीकृति मिलेगी। युवा सोच व युवा खयालात,सर्वोत्तम व उत्कृष्ट … Read more

दास्तां अब हम लहू से

गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’बारां (राजस्थान)******************************** दास्तां अब हम लहू से,लिख रहे हैं किसकी।तस्वीर हम अपने लहू से,बना रहे हैं किसकी॥दास्तां अब हम लहू से… क्यों हमको चैन नहीं है,हसरत क्या है अब बाकी,यह धुंआ क्यों उठ रहा है,नफरत क्यों है अब बाकी।जिंदगी अब हम लहू से,सजा रहे हैं किसकी,दास्तां अब हम लहू से…॥ टुकड़े क्यों इस … Read more

होता है कल्याण

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** जीवन के रंग (मकर संक्रांति विशेष)…. पौष मास में सूर्य जब,करता मकर प्रवेश।तभी मने संक्रांति हैं,पूजन करें दिनेश॥ प्रातः उठकर स्नान कर,रक्त पुष्प ले हाथ।लोटा पानी अर्घ्य दे,चन्दन अक्षत साथ॥ स्नान दान अरु पुण्य से,होता है कल्याण।प्रमुख पर्व होता यही,शुद्ध होत है प्राण॥ भगवत गीता पाठ कर,कम्बल तिल घी दान।करते … Read more

सर्दी और प्यार…

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की,आपस में बातें होती हैसर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने की,कसमें खाई जाती हैऔर चलता है दौर आपस में,मेल-मिलाप करने कापर होती है दिल को पीड़ा,सर्दी में बिछड़ने पर। चारों ओर हरियाली,कितनी छाई रहती हैमंद-मंद हवाओं के साथ,हल्की ओस गिरती हैजिससे बदन सूकड़ा-सा,और गरम हो जाता है।जो दिल … Read more

समझ-समझ का फेर

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** समझ-समझ का फेर है,मानव तो सब एक।भजना चाहे भी जिसे,काम करो बस नेक॥ कोई पूजे राम को,है कोई रहमान।समझ-समझ का फेर है,इक प्रभुवर ये मान॥ अभिमानी इंसान कुछ,चलें कुपथ दिन रात।समझ-समझ का फेर है,समझत कब सच बात॥ चुन-चुन रखते नोट हैं,दीवारन के बीच।समझ-समझ का फेर सब,रखते आँखें मीच॥ समझ-समझ का फेर सब,इतना सबको … Read more

युग पुरूष स्वामी विवेकानंद

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* स्वामी विवेकानंद जयंती विशेष….. भारत आन,स्वामी विवेकानंद-युग पुरूष। देव पुरूष,धन्य माता भारती-सन्यासी तुम। विश्व के गुरू,उच्च थे उद्देश्य-सम्मान देश। संसृति तुम्हें,कोटि-कोटि नमन-निराली भक्ति। विश्व में राग,संस्कृति और धर्म-गाये महान। थे उर्जावान,वेद शास्त्र ज्ञाता-संत महान। ज्योत जलाए,युवा शक्ति महान-दिए प्रेरणा। लक्ष्य हो प्राप्त,रूकना नहीं चलो-थके ना पग। सदा नमन,‘युवा दिवस’ आज-विश्व … Read more

ऊँच-नीच को मिटाया

दिनेश कुमार प्रजापत ‘तूफानी’दौसा(राजस्थान)***************************************** विवेकानन्द जयन्ती विशेष…. जिसका कंठ सुरीला,था युवा नेता छबीला,माँ शारदे के लाल की आरती उतारेंगे।ऊँच-नीच को मिटाया,नारी शिक्षा को बढ़ाया,विवेकानंद के पद,राम से पखारेंगे। भारती के पूत उठो,जागो तब तक भागो,लक्ष्य नहीं मिले यदि,जन्म जन्म वारेंगे।धर्मों का किया सम्मान,नहीं किया अपमान,ऐसी महान आत्मा को,मन में उतारेंगे॥

दूरियाँ

शकुन्तला बहादुर कैलिफ़ोर्निया(अमेरिका) ********************************************************* दूरियाँ अब दूर होंगी क्या कभी ?मन हमारे मिल सकेंगे क्या कभी ? द्वेष की आँधी भयानक,चल रही ऐसी यहाँ,दृष्टि धुँधली हो गई,सन्मार्ग अब दिखता कहाँ। हो गया विस्फोट ऐसा,ध्वंस सब कुछ हो गया,देख कर भयभीत मन,विक्षुब्ध सा कुछ हो गया। स्वार्थ टकराएँ न अब,संघर्ष का भी अन्त हो,स्नेह और सौहार्द ही … Read more