हम गलत नहीं थे
अभिजीत आनंद ‘काविश’बक्सर(बिहार)******************************************* बुरे वक़्त के सितम से सहमे मेरे दिन-रात थे,हम गलत नहीं थे,बुरे मेरे हालात थे…। सिसकियों संग सिमटी जीने की अभिलाषा,बेरंग हुई जिंदगी बनकर रह गई तमाशा…संकटों के मेघ घुमड़-घुमड़ कर बरस रहे थे,जीवन की मझधार में हम खुशियों की फुहार को तरस रहे थे…। रिश्तों के फलक पर अपने भी ग़ैरों … Read more