जी लें एक ज़िन्दगी नई
रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ आओ आज,करें कोई बात नई।छोड़ो पुराने गिले-शिक़वे,छेड़ो कोई ग़ज़ल नई। गर्म हवाओं से,जिस्म थकने लगा है।दे इसको एक,ठंडक नई। ज़िन्दगी की तल्ख़ियों ने,आज ख़ुद को भुलाया है।दें अपने अस्तित्व को,आज एक पहचान नई। परिवार का सुख याद रहा,ख़ुद का सुख भूल गए।आओ एक पल को सही,जी लें एक ज़िन्दगी नई। गुज़रते वक़्त से … Read more