प्रकृति,पृथ्वी और प्रगति में संतुलन आवश्यक

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है,उसने समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं। बढ़ते…

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पृथ्वी के मुख पर कालिख़

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जब मैं जन्मी, पूरी की पूरी पृथ्वी मेरे इर्द-गिर्द थी, पहाडों से फूटते झरने सरसराते पेड़ों से लिपटी…

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हिंसक सत्ता की नाकामी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** महावीर जयंती के अवसर पर हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की एक रपट दुनिया के आंदोलनों पर छपी है। यह खोजपूर्ण रपट इस मुद्दे पर छपी है…

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सीख गई सबक निम्मी

निशा सतीशचन्द्र मिश्रा यामिनी मुंबई(महाराष्ट्र) ************************************************ निम्मी अभी कॉलेज से आती ही होगी, यह सोच जल्दी-जल्दी घर के काम को आभा निपटाते हुए जल्दी से किचन में जाकर दोपहर के खाने…

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धरती माँ की रक्षा अनिवार्य

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… आज सारी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय समस्या से जूझ रही है,यद्यपि कई देशों की सरकारों द्वारा कई कदम उठाए…

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कांग्रेस पर बांस की बोराई

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** राजस्थानी में कहावत है-'केला,बिच्छी,केकड़ा वनस्पतियों में बांस,अपने जन्मे आप मरे या फिर सत्यानाश।' यानि केला व बांस जिन्दगी में एक ही बार फल-फूल देते हैं और…

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हरी-भरी हो धरा

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… लो संकल्प- हरी-भरी हो धरा, नहीं विकल्प। एक ही नारा- प्रदूषण मुक्त हो, देश हमारा। बीमार मन- उगे…

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धरा

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरा करती श्रृंगार, देखो वर्षा की फुहार हरियाली हर ओर, धरती हरियाई। छाई है देखो बहार, नाचता है मन मोर…

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उल्टा दांव

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** "हमारे घर ऐसा होता है,हमारे घर वैसा होता है।" यही जुमला सुन-सुन कर रेखा के कान पक चुके थे। अभी लग्न लेकर लड़के वाले रेखा के…

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आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* 'आत्मजा'  खंडकाव्य से,अध्याय-८ ... बोली माँ पति से समझा कर, अब है समय नहीं सोने का खोजो वर सुयोग्य बेटी को, नहीं एक भी क्षण खोने…

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